छह माह, तीन मुकदमे नष्पिादित

Published at :24 Dec 2015 6:22 PM (IST)
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छह माह, तीन मुकदमे नष्पिादित

छह माह, तीन मुकदमे निष्पादितविडंबना. जिला उपभोक्ता फोरम में आकर ही ठगा महसूस कर रहे हैं ठगी के शिकार लोग दुकानदारों द्वारा की जानेवाली ठगी के शिकार लोगों को न्याय मिलने की सुविधा प्रदान करने के लिए जिला उपभोक्ता फोरम का गठन किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य ठगी के शिकार लोगों को तीन माह के […]

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छह माह, तीन मुकदमे निष्पादितविडंबना. जिला उपभोक्ता फोरम में आकर ही ठगा महसूस कर रहे हैं ठगी के शिकार लोग दुकानदारों द्वारा की जानेवाली ठगी के शिकार लोगों को न्याय मिलने की सुविधा प्रदान करने के लिए जिला उपभोक्ता फोरम का गठन किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य ठगी के शिकार लोगों को तीन माह के अंदर न्याय दिलाने से था. परंतु, जिले में यह महज खानापूरी का काम कर रहा है. मुकदमों के निष्पादन की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक जुलाई से 23 दिसंबर तक लगभग छह माह में 125 मुकदमे ठगी के शिकार उपभोक्ताओं ने दर्ज कराये. परंतु, निष्पादन महज तीन का हुआ. इस दौरान उपभोक्ता फोरम के लिए वेतन मद में सरकार ने 14 लाख रुपये खर्च किये. कुल मिला कर यह कहा जाये कि जिला उपभोक्ता फोरम अपने उद्देश्य से भटक गया है, तो कोई अतश्योक्ति नहीं होगी. पांच से छह वर्षों के भीतर दर्ज मुकदमे अब तक लंबित छह माह में वेतन व अन्य मदों में सरकारी खर्च हुए 14 लाखछह माह में 125 मुकदमों के दर्ज होने तथा निष्पादन महज तीन का होना चर्चा का विषय उपभोक्ता दिवस पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाने में कागजों में आदेश व अनुपालन फोटो : 24 सीएचपी 6, कैप्प्शन होगा : जिला उपभोक्ता कार्यालय, सारणसंवाददाता, छपरा (सदर)सरकार द्वारा आधुनिकता के इस दौर में भोले-भाले उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के लिए उन्हें जागरूक करने तथा ठगे जाने के बाद त्वरित न्याय दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता फोरम की स्थापना की गयी है. जिले में फोरम कार्यरत भी है. इसके संचालन पर प्रति माह दो लाख से सवा दो लाख 25 रुपये तक वेतन एवं अन्य मदों में सरकार खर्च करती है. परंतु, मुकदमों के निष्पादन की मंथर गति ने तो उपभोक्ताओं को अहसास करा दिया है कि वे फोरम में न्याय के लिए आकर ही ठगे जा रहे हैं. आखिर वे करें तो क्या करें. छह माह में दर्ज 125 मुकदमे हुए दर्जजिला उपभोक्ता फोरम में उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय दिलाने की व्यवस्था है. इसके तहत 21 दिन के भीतर ठगे गये उपभोक्ता के वाद में नोटिस तथा 90 दिनों के अंदर मुकदमों का निष्पादन करना है. परंतु, मुकदमों के निष्पादन के लिए इसकी रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग छह माह में 125 मुकदमे ठगी के शिकार उपभोक्ताओं ने दर्ज कराये. परंतु, निष्पादन महज तीन का हुआ. वहीं, दो उपभोकताओं ने आपसी सहमति से वाद वापस ले लिया. फोरम के सूत्रों की मानें, तो 650 के करीब मुकदमे फोरम में पांच से छह वर्षों से लंबित हैं. हालांकि, इन दर्ज मुकदमों में नोटिस होने के साथ-साथ डेट-पर-डेट पड़ रहा है. उपभोक्ता मुकदमों की पैरवी के लिए खुद या अधिवक्ता के माध्यम से आर्थिक खर्च के अलावा शारीरिक परेशानी भी उठा रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिलता. छह माह से अध्यक्ष का पद रिक्त, दो सदस्यों की उपलब्धि भी नगण्य जिला फोरम के अध्यक्ष का पद 30 जून के बाद से रिक्त हो गया है. ऐसी स्थिति में एक पुरुष तथा एक महिला सदस्य फोरम के मुकदमों की सुनवाई करते हैं. इन्हें भारतीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 22 के तहत फैसला देकर ठगी के शिकार उपभोक्ताओं को न्याय दिलाना है. परंतु, मुकदमों की सुनवाई के बावजूद उपभोक्ताओं को परिणाम नहीं मिल रहा है. फोरम में दो सदस्य, एक पेशकार, एक प्रधान लिपिक, दो स्टेनों तथा दो आदेशपाल की पदस्थापना की गयी है. इनके वेतन पर प्रति माह लगभग सवा दो लाख रुपये खर्च होते हैं. उपभोक्ता दिवस भी मनाना भूल जाता है प्रशासनसरकार के द्वारा उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाने का निर्देश दिया गया है. यही नहीं, सरकारी निर्देश के आलोक में जिला आपूर्ति पदाधिकारी सह सचिव जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा तीनों अनुमंडलों के एसडीओ को उपभोक्ता दिवस मनाने का निर्देश देकर खानापूर्ति कर ली जा रही है. उपभोक्ता दिवस पर सरकारी आदेश के बावजूद संबंधित पदाधिकारी उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए सरकार स्तर पर कार्यक्रम नहीं मनाते हैं. हालांकि दो वर्ष पूर्व प्रशासन ने जिला स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण दिवस मनाया करता था. सरकार के द्वारा उपभोक्ता दिवस मनाने के लिए प्रशासन को आवंटन दिया जाता है. परंतु, उदासीनता के कारण जिले में विगत दो-तीन वर्षों से राष्ट्रीय उपभोक्ता या विश्व उपभोक्ता दिवस नहीं मनाया जा रहा है. कुमार कमला शरणजिला उपभोक्ता संरक्षण समिति, छपरा मुकदमों के निष्पादन में धीमी गति का कारण फोरम के अध्यक्ष के नहीं होने के अलावा अन्य सुविधाओं का नहीं होना है. शीघ्र ही मुकदामें के निष्पादन में तेजी आयेगी. फोरम का भवन मरम्मत कार्य भी मुकदमे के निष्पादन कार्य में बाधक है. रमेश कुमार सिंहपीठासीन सदस्य, जिला फोरम, सारण सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए निर्देश दिया गया है. अनिल कुमार रमणडीएसओ सह सचिव जिला उपभोक्ता फोरम, सारण

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