जांच परीक्षा से वंचित हो गये दो दर्जन छात्र

Published at :21 Dec 2015 6:25 PM (IST)
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जांच परीक्षा से वंचित हो गये दो दर्जन छात्र

जांच परीक्षा से वंचित हो गये दो दर्जन छात्र कल्याण पदाधिकारी के फरमान से बंद कर दिया गया आवासीय विद्यालयखामियाजा भुगत रहे रामचक आवासीय विद्यालय के छात्रसैकड़ों बच्चों की पढ़ाई हो गयी बाधित 11 शिक्षकों में दो वर्षों से कल्याण कार्यालय में प्रतिनियोजित भोजन, अन्य बुनियादी जरूरतों का जिम्मा एनजीओ व संबंधित शिक्षक को संवाददाता, […]

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जांच परीक्षा से वंचित हो गये दो दर्जन छात्र कल्याण पदाधिकारी के फरमान से बंद कर दिया गया आवासीय विद्यालयखामियाजा भुगत रहे रामचक आवासीय विद्यालय के छात्रसैकड़ों बच्चों की पढ़ाई हो गयी बाधित 11 शिक्षकों में दो वर्षों से कल्याण कार्यालय में प्रतिनियोजित भोजन, अन्य बुनियादी जरूरतों का जिम्मा एनजीओ व संबंधित शिक्षक को संवाददाता, छपरा (सदर)मढ़ौरा स्थित अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालय में छात्रों द्वारा तीन दिनों तक भूख हड़ताल, तोड़-फोड़ तथा आगजनी के बाद जिला कल्याण पदाधिकारी ने फरमान जारी कर विद्यालय को अगले आदेश तक बंद कर दिया. परंतु, इसका खामियाजा सबसे पहले उन छात्रों को भुगतना पड़ा, जो मैट्रिक बोर्ड परीक्षा, 2016 में शामिल होने के लिए जांच परीक्षा दे रहे थे. सोमवार को इनकी जांच परीक्षा नहीं हो सकी. इससे छात्रों के एक वर्ष के भविष्य पर प्रश्न चिह्न लग गया है. नियोजन के दो शिक्षक पढ़ाने के बदले कल्याण कार्यालय में बने लिपिक रामचक आवासीय विद्यालय में एक से 10 तक की कक्षा में पढ़ने व रहने की व्यवस्था करने की जिम्मेवारी सरकार की है. इसके लिए तीन स्थायी तथा सात नियोजित शिक्षक हैं. परंतु, प्रधानाध्यापक की मानें, तो दो नियोजित शिक्षक रंजय पांडेय तथा संजय मांझी दो से तीन वर्षों से जिला कल्याण कार्यालय में प्रतिनियोजन करा कर लिपिक का काम कर रहे हैं. प्रधानाध्यापक द्वारा गत सितंबर में प्रभार ग्रहण करने के बाद कम-से-कम पांच बार जिला कल्याण पदाधिकारी को विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था बाधित होने के मद्देनजर इन दोनों शिक्षकों का प्रतिनियोजन रद्द कर विद्यालय भेजने का आग्रह किया गया था. वहीं, उसकी प्रति विभागीय निदेशक को भी दी गयी थी. परंतु, विभाग ने प्रधानाध्यापक के आग्रह को सुनने की जरूरत नहीं समझी. अब जब विद्यालय में छात्रों ने घटना को अंजाम दिया, तो जिला कल्याण पदाधिकारी ने विद्यालय तो बंद कर दिया. परंतु, 24 सेंटप छात्र, जिनकी जांच परीक्षा सोमवार को नहीं हो पायी, उनके भविष्य को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं. खाने-पीने का जिम्मा स्वयंसेवी संस्था कोरामचक आवासीय विद्यालय में होस्टल में रहनेवाले छात्रों के लिए एक से पांचवीं तक के छात्रों के लिए भोजन के लिए 1210 रुपये तथा 6 से 10 तक के लिए 1610 रुपये जिला कल्याण विभाग के माध्यम से बच्चों को उपलब्ध कराये जाते हैं. वहीं, बच्चों के साबुन-तेल आदि मद में प्रति छात्र 140 रुपये प्रभारी शिक्षक रवींद्र गिरि कोे उपलब्ध कराये जाते हैं. वहीं, भोजन की व्यवस्था सद्भावना विकास मंडल एनजीओ द्वारा की जाती है. पठन-पाठन के प्रभारी सुनील राय को प्रति बच्चे के हिसाब से विभाग से ड्रेस, पुस्तक, जूता, मोजा आदि सामग्री उपलब्ध करायी जाती है. ऐसी स्थिति में प्रधानाध्यापक के जिम्मे विद्यालय की देखभाल व प्रबंधन की जिम्मेवारी है. परंतु, कमोवेश कल्याण विभाग की कथित हस्तक्षेप व कारगुजारी बच्चों के बेहतर भविष्य में बाधक बनी है. क्या कहते हैं एचएमहमें तो विद्यालय में पठन-पाठन की व्यवस्था करनी है. 11 शिक्षकों में दो कल्याण विभाग में ही वर्षों से प्रतिनियोजन पर हैं. वहीं भोजन का जिम्मा एनजीओ को तथा साबून-तेल आदि उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी विद्यालय के शिक्षक रवींद्र गिरि की है. ऐसी स्थिति में शिक्षक की कमी, असहयोग व प्रबंधन से जुड़े लोगों की कारगुजारियों का खामियाजा हमें उठाना पड़ रहा है. मधुसूदन साह प्रधानाध्यापक, अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालय रामचक, मढ़ौरा विद्यालय के प्रबंधन में खर्च से संबंधित जानकारी वे दो-तीन दिन बाद ही दे सकते हैं. विद्यालय अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. वहीं, प्रतिनियोजित शिक्षकों के बारे में शीघ्र निर्णय लिया जायेगा. कृष्णा रामडीडब्ल्यूओ सारण

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