हरिहर नगरी में तोता वाच रहा भाग्य

Published at :20 Dec 2015 6:25 PM (IST)
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हरिहर नगरी में तोता वाच रहा भाग्य

हरिहर नगरी में तोता वाच रहा भाग्यजानना हो, तो पांच रुपये में जानिए भाग्यसड़क किनारे बैठे पंडित राशि के अनुरूप बताते हैं भाग्य11 से 51 रुपये में बताते हैं समस्या से मुक्ति के उपायअलग-अलग रंगों में रंगे अपने सोनपुर मेले का अनूठा है रंग संवाददाता, सोनपुरजहां धर्म होता है, वहां आस्था होती है. ऐसे में […]

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हरिहर नगरी में तोता वाच रहा भाग्यजानना हो, तो पांच रुपये में जानिए भाग्यसड़क किनारे बैठे पंडित राशि के अनुरूप बताते हैं भाग्य11 से 51 रुपये में बताते हैं समस्या से मुक्ति के उपायअलग-अलग रंगों में रंगे अपने सोनपुर मेले का अनूठा है रंग संवाददाता, सोनपुरजहां धर्म होता है, वहां आस्था होती है. ऐसे में भाग्य संवारने की कोशिश भी होती है. हरिहर क्षेत्र की धरती पर भी ऐसा ही कुछ दृश्य दिखाई पड़ रहा है. पंडित की कौन कहे, यहां तोता भी भाग्य वाचता है. तोता ऐसा-वैसा नहीं. काशी व हरिद्वार में पढ़ा है. नाम पुकारते ही राशि का कार्ड निकाल देता है. फिर ज्योतिष शास्त्र की पढ़ाई किये पंडित जी बताते हैं उपाय. हरि व हर की नगरी हरिहरक्षेत्र में लगा सोनपुर मेला वैसे तो विविध रंगों में रंगा है. लेकिन यहां धर्म के नाम पर कुछ अलग रंग है. मेले का चिड़िया बाजार इलाका. यहां से मुख्य सड़क को जोड़नेवाले मार्ग पर तोता पढ़ता है भाग्य, सड़क किनारे जमीन पर बैठे कुछ पंडित दिख जायेंगे. पिंजड़े में तोता. बगल में कुछ कार्ड. राशि के अनुरूप कार्ड जिस पर लिखा है बगल में कुछ अंगूठी एवं पत्थर. हां भाग्य जानने के लिए आपको जमीन पर ही बैठना होगा. पंडित जी पहले नाम पूछते हैं. कहते हैं आपकी अमुुक राशि है. फिर पिंजड़े में बंद तोते को पुकारते हैं. कहते है कि जरा देखो, इनका भाग्य क्या कह रहा है. पिजड़े का दरवाजा खोल देते हैं पंडित जी. पूरी तरह पारंगत तोता पिंजड़े से बाहर निकलता है. फिर सभी कार्ड को देखते हुए जिस नाम का बताया गया होता है, उस नाम का कार्ड निकालता है. अब तोते के काम खत्म. शुरू होता है पंंडित जी का काम. आपकी राशि मेष है. अभी शनि की साढ़ेसाती चल रही है. समय अच्छा नहीं चल रहा. जिस काम में हाथ डालते हैं, वह सफल नहीं हो रहा. उपाय करने होंगे. शनि की साढ़े साती सुनते ही भाग्य जानने पहुंचा व्यक्ति परेशान हो उठता है. कहा हैं कि पंडित जी कोई उपाय बताइए. फिर पंडित जी कहते हैं अमुक उपाय करने होंगे. पत्थर एवं अंगूठी से समस्या के निदान का उपाय बताते हैं. पत्थर एवं अंगूठी की कीमत भी हालांकि बहुत ज्यादा नहीं, 11 रुपये से लेकर 51 रुपये तक. कुछ लोग लेते हैं और कुछ पांच रुपये में अपना भाग्य जान कर आगे बढ़ जाते हैं. दोनों तरह के माननेवाले हैं लोगकुछ ऐसा भी लोग हैं, जो कह देते हैं अपना भाग्य क्यों नहीं सवार लेते. बैठे हैं सड़क पर, जितनी मुंह उतनी तरह की बात. छपरा के राजकुमार गिरि बताते हैं बनारस से की है ज्योतिष की पढ़ाई. तोता भी बनारस में पढ़ा है. वहां पढ़ाई होती है. मेले में आते हैं. मेला खत्म होने के बाद दूसरी जगह चले जाते हैं. पटना हाइकोर्ट के समीप भी बैठते हैं. बनियापुर के मंतोष कुमार गिरि ने भी ज्योतिष की पढ़ाई की है. मोतिहारी के वीरेंद्र झा काफी बुजुर्ग हो चुके हैं. बताते हैं कि मेले में 45 से 46 वर्षों से आ रहे हैं. तीन माह रहते हैं. उसके बाद मुजफ्फरपुर चले जाते हैं. देवघर भी जाते हैं. दरभंगा से पढ़ाई की है. हरिद्वार से तोता लाये हैं. वहां तोते की पढ़ाई होती है. राशि के अनुसार भाग्य वाचते हैं. कहते हैं, इसी में जीवन बीत गया. इसकी कमाई से परिवार चलता है. जिसे विश्वास होता है, कुछ दे देता है. जिसे विश्वास नहीं होता, आगे बढ़ जाता है. दोनों तरह के माननेवाले लोग हैं. लड़के मजाक भी करते हैं, ऐसे ही युवकों की टोली ठीक उसी वक्त उधर से गुजरती है. युवक अपने अंदाज में पूछते हैं? पंडित जी बतायी न बियाह कब होई. पंडित जी कुछ बोलते, तब तक युवकों की टोली हंसते हुए आगे निकल जाती है. अलग-अलग रंगों में रंगा है सोनपुर मेला. यहां मनोरंजन भी है. ज्ञान का भंडार भी है. व्यापर भी है और भाग वाचने का कारोबार भी.

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