...दो-चार लफंगों से बिहार बदनाम नहीं हो सकता

…दो-चार लफंगों से बिहार बदनाम नहीं हो सकता चोटी के कवियों के कविता पाठ से विभोर हुए श्रोता देर रात तक बही हास्य-व्यंग्य की रस धारा नोट. फोटो सोनपुर से मेल से भेजा गया है. कैप्प्शन होगा : कवियों को सम्मानित करते डीएम व मंचासीन कविसंवाददाता, सोनपुरविश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले में पर्यटन विभाग […]
…दो-चार लफंगों से बिहार बदनाम नहीं हो सकता चोटी के कवियों के कविता पाठ से विभोर हुए श्रोता देर रात तक बही हास्य-व्यंग्य की रस धारा नोट. फोटो सोनपुर से मेल से भेजा गया है. कैप्प्शन होगा : कवियों को सम्मानित करते डीएम व मंचासीन कविसंवाददाता, सोनपुरविश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले में पर्यटन विभाग के मुख्य मंच से देश के चर्चित हास्य कवियों की रचनाओं से देर रात तक लोग आनंदित होते रहे. कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली एवं आज के राजनेताओं पर अपने व्यंग्य वाणी से हमला किया. कवि सम्मेलन का संचालन हास्य कवि पद्मश्री सुनील योगी कर रहे थे. उन्होंने बिहार पर एक रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘वो नालंदा वाला गौरव, नीलाम नहीं हो सकता, दो-चार लफंगो से बिहार बदनाम नहीं हो सकता’. वहीं नेताओं पर उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि आजादी के 67 वर्ष बाद भी सांसद और विधायक तो हुए, लेकिन कोई नेता नहीं हो पाया, नेता तो एक ही सुभाषचंद्र बोस हुए. जिन्हें लोग नेताजी के नाम से पुकारा करते थे. उसके बाद सुनील योगी ने ‘मुश्किल है अपना मेल प्रिय, ये प्यार नहीं है, खेल प्रिय’. उनके बाद राजेंद्र पंडित ने अपनी कविता प्रस्तुत करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर व्यंग्य करते हुए कहा कि हनुमान जी पुलिसवालों के देवता हैं. हनुमान जी ने अपहरण का पहला मामला सलटाया था, जिसमें सीता जी को बरामद किया था. हनुमान जी को संजीवनी बूटी नहीं मिली, तो पूरा पहाड़ उठा कर लाएं. इसी तरह पुलिसवालों को अपराधी नहीं मिलते हैं, तो उसके पूरे परिवार को उठा लाते हैं. डॉ सुमन दूबे ने अपनी कविता प्रस्तुत करते हुए ‘न राधा से गरज इनको, न घनश्याम बनते हैं’. यही बच्चे बड़े होकर आशा राम बनते हैं और उन्होंने भोजपुरी के एक गीत भी लोगों को सुनाई, तोहरे पिरितिया न रंगनी उमरिया आंख फेर के न जईह हो संवरिया. वहीं, डॉ सुरेश अवस्थी ने भी अपनी कविताओं से उपस्थित श्रोताओं को लोट-पोट कराते रहे और एक प्रस्तुति दी. वह घर-घर नहीं जंगल होता है, जिसमें बेटी व बहू नहीं होती. वहीं पदम् अलबेला भी अपनी कविताएं प्रस्तुत कर लोगों को गुमगुदाते रहे. सुनील योगी ने संचालन करते हुए सपना देख के दलाल हो गइले प्रस्तुत किया. इस अवसर पर सारण के डीएम दीपक आनंद, एसपी सत्यवीर सिंह, एडीएम राजेश कुमार, डीटीओ श्याम किशोर, डीपीआरओ वीरेंद्र कुमार शुक्ल, एसडीओ मदन कुमार, डीसीएलआर उपेंद्र कुमार पाल देर रात तक मौजूद रहे. कवि सम्मेलन की समाप्ति के बाद कवियों को डीएम दीपक आनंद तथा एसपी सत्यवीर सिंह ने अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया.
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