मरीजों को नहीं मिल रही हैं जीवनरक्षक दवाएं

मरीजों को नहीं मिल रही हैं जीवनरक्षक दवाएं सरकारी अस्पतालों के खातों में बेकार पड़ी है राशिमरीजों को नहीं मिल रहा एंटी रैबीज संवाददाता, छपरा (सारण)सरकारी अस्पतालों में मरीजों को कुत्ता व सियार का एंटी रैबीज इंजेकशन नहीं मिल रहा है. छह माह से मरीजों को खुले बाजार से इंजेकशन खरीदना पड़ रहा है. सर्पदंश […]
मरीजों को नहीं मिल रही हैं जीवनरक्षक दवाएं सरकारी अस्पतालों के खातों में बेकार पड़ी है राशिमरीजों को नहीं मिल रहा एंटी रैबीज संवाददाता, छपरा (सारण)सरकारी अस्पतालों में मरीजों को कुत्ता व सियार का एंटी रैबीज इंजेकशन नहीं मिल रहा है. छह माह से मरीजों को खुले बाजार से इंजेकशन खरीदना पड़ रहा है. सर्पदंश का भी इंजेक्शन अस्पतालों में खत्म हो चुका है. आलम यह है कि आपातकालीन और ओपीडी मरीजों को भी जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल रही हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, रेफरल अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाएं नहीं रहने से मरीजों को सदर अस्पताल तथा पीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है. सरकार के द्वारा प्रत्येक प्रखंड में दवा क्रय करने के लिए एक-एक लाख की राशि उपलब्ध करायी गयी है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है. जिले में स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था लचर बनी हुई है. अस्पतालों में नहीं रहते हैं चिकित्सकजिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित अधिकतर सरकारी अस्पतालों में चिकित्साकर्मी नहीं रहते हैं. इस आशय की रिपोर्ट स्वास्थ्य अपर निदेशक डॉ रामनरेश कुमार ने सरकार को दी है. पिछले दिनों जिले के स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण के दौरान नयागांव में ताला बंद पाया था. अपर निदेशक जब दिन के 12 बजे नया गांव स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तो वह ताला बंद देख कर भौचक रह गये. अपर निदेशक ने इसको लेकर सिविल सर्जन को फटकार भी लगायी और प्रशासनिक व्यवस्था की लचर स्थिति पर चिंता भी जतायी. दवा का है अभाव सरकारी अस्पताल में मरीजों को जीवनरक्षक दवा उपलब्ध कराने के लिए एक लाख की राशि सभी प्रखंडों को सरकार के द्वारा उपलब्ध करा दी गयी है, लेकिन मरीजों को दवा नहीं मिल रही है. मरीजों को खुले बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है. अस्पताल में दवा की मांग करनेवाले मरीजों को चिकित्साकर्मियों को द्वारा तुरंत रेफर कर दिया जाता है. सर्पदंश के मरीजों को सीधे सदर अस्पताल या पीएमसीएच भेजा जाता है. छह माह से सर्पदंश का इंजेकशन अस्पतालों में नहीं है. कुत्ता व सियार के काटने के इंजेकशन एंटी रैबीज का भी घोर अभाव बना हुआ है. ऐसे मरीजों को बाजार से एंटी रैबीज खरीद कर लाने को कहा जाता है. ओपीडी तथा इमरजेंसी वार्ड के मरीजों को भी जीवनरक्षक दवाएं नहीं मिल रही हैं. सरकार द्वारा आवंटित राशि से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों के द्वारा दवा का क्रय नहीं किया जा रहा है. क्या है प्रावधान -ओपीडी मरीजों को 33 प्रकार की दवाएं नि:शुल्क-आपातकालीन मरीजों को 107 प्रकार की दवाएं नि:शुल्क -सीजेएम ऑपरेशन के लिए 15 एसेंशियल दवाएं नि:शुल्क -बंध्याकरण में आठ प्रकार की दवाएं नि:शुल्क -कुत्ता व सियार का इंजेक्शन एंटी रैबीज नि:शुल्क क्या है स्थिति-ओपीडी में 10 से 12 दवाएं उपलब्ध -इमरजेंसी में 40 से 45 दवाएं उपलब्ध-बंध्याकरण की दवाओं का अभाव-सीजेरियन की एसेंशियल दवाएं नदारद-सर्पदंश की इंजेकशन का अभाव-एंटी रैबीज का अभाव-सभी तरह की जीवनरक्षक दवाओं का घोर अभावक्या कहते हैं अधिकारीआवश्यक दवाओं का स्थानीय स्तर पर खरीद करने के लिए सभी प्रखंडों को एक -एक लाख रुपये उपलब्ध कराये गये हैं. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दवा क्रय करने की जिम्मेवारी दी गयी है. डॉ निर्मल कुमारसिविल सर्जन, सारण
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