बिना चावल लिये मिलरों को नहीं दें धान

Published at :07 Apr 2015 6:29 AM (IST)
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बिना चावल लिये मिलरों को नहीं दें धान

सारण में निर्धारित लक्ष्य के 52.6 फीसदी धान अधिप्राप्ति का दावा लाखों बकाया रखनेवाले मिलरों को नहीं दें धान बकाया वसूली के लिए प्रक्रिया करें तेज छपरा (सदर) : किसानों एवं पैक्स से अधिप्राप्ति किये गये धान को मिलरों से अग्रिम सीएमआर प्राप्ति के बाद ही दें. वहीं वैसे मिलर, जिन्होंने पूर्व में लाखों-लाख बकाया […]

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सारण में निर्धारित लक्ष्य के 52.6 फीसदी धान अधिप्राप्ति का दावा
लाखों बकाया रखनेवाले मिलरों को नहीं दें धान
बकाया वसूली के लिए प्रक्रिया करें तेज
छपरा (सदर) : किसानों एवं पैक्स से अधिप्राप्ति किये गये धान को मिलरों से अग्रिम सीएमआर प्राप्ति के बाद ही दें. वहीं वैसे मिलर, जिन्होंने पूर्व में लाखों-लाख बकाया रखा है, उन्हें तब तक अधिप्राप्ति किये गये धान को विभागीय निर्देश के आलोक में नहीं दें जब तक बकाया राशि का कम-से-कम 80 फीसदी रकम जमा करें. अधिप्राप्ति किये गये धान को एक माह में सभी एग्रीमेंट करनेवाले 20 मिलरों से एक माह में चावल बनाने का प्रयास करें.
ये बातें डीएम दीपक आनंद ने धान अधिप्राप्ति को लेकर अधिप्राप्ति से जुड़े पदाधिकारी को समीक्षा के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही बरदाश्त नहीं की जायेगी. बैठक में डीएसओ प्रमोद कुमार, डीसीओ मो. अमजद हयात वर्क, जिला प्रबंधक डीएन सिंह के अलावे विभिन्न प्रखंडों के अधिप्राप्ति से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित थे.
52.6 फीसदी हुई धान की अधिप्राप्ति : सरकार द्वारा गत खरीफ के दौरान धान अधिप्राप्ति के लिए सारण में निर्धारित लक्ष्य 75 हजार टन के विरुद्ध 39 हजार 757.63 टन धान की अधिप्राप्ति गत 31 मार्च तक हुई. इसमें पैक्स से 25 हजार 725. 58 एमटी तथा किसानों से 13732. 5 टन धान खरीद का दावा बिहार राज्य खाद्य निगम के पदाधिकारी करते हैं. जिला आपूर्ति पदाधिकारी सह धान अधिप्राप्ति के समन्वयक प्रमोद कुमार के अनुसार, यह खरीद विगत दो वर्षो में हुई अधिप्राप्ति से बेहतर है. अबतक किसानों को धान अधिप्राप्ति मद में 34 करोड़ 78 लाख 64 हजार 676 रुपये भुगतान करने का दावा एसएफसी के जिला प्रबंधक डीएन सिंह करते हैं. वहीं, यह भी स्वीकारते हैं कि सरकार से राशि नहीं मिलने के कारण अब भी किसानों को करोड़ों रुपये अधिप्राप्ति मद में भुगतान करना बाकी है.
अब तक जितनी धान अधिप्राप्ति हुई है उसमें 16 हजार 345 टन मिलर को भेज दिया गया है.लगभग आठ करोड़ रुपये बकाया रखनेवाले 14 मिलरों पर सरकार की कड़ी नजर : बैठक में वैसे 14 मिलरों का, जो लगभग आठ करोड़ रुपये बकाया रखे हैं, उनके खिलाफ नीलाम पत्र वाद दाखिल करने के बावजूद रिकवरी की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई का निर्देश सरकारी आदेश के आलोक में डीएम ने दिया. हालांकि बैठक में यह भी बात आयी कि बकाया रखनेवाले ये मिलर यदि बकाया राशि का 80 फीसदी भुगतान कर देते हैं, तो उनके साथ समझौता कर मिलिंग कराने का काम शुरू किया जायेगा.
जिन मिलरों ने विगत दो वित्तीय वर्षो में लगभग करोड़ रुपये बकाया रखे हैं, उनमें वित्तीय वर्ष 11-12 में बकाया रखनेवाले दो मिलरों में मढ़ौरा प्रखंड के तेजपुरवा के राइस मिलर वकील प्रसाद यादव के यहां 45 लाख 77 हजार रुपये, वैष्णवी राइस मिल एकमा के यहां 50 लाख 79 हजार रुपये तथा वित्तीय वर्ष 12-13 के सरकारी राशि बकाया रखनेवाले मिलरों में जय मां राइस मिल परसागढ़ के जितेंद्र महतो के यहां एक करोड़ 29 लाख 25 हजार रुपये, मशरक के दुर्गोली पैक्स संचालक तारकेश्वर सिंह के यहां एक करोड़ 75 लाख 97 हजार रुपये, सर्व श्री शाही राइस मिल धनेश छपरा लहलादपुर के ऋषिकांत शाही के यहां 49 लाख 90 हजार, राज लक्ष्मी राइस मिल, छपरा सदर के राकेश कुमार के यहां 31 लाख 34 हजार रुपये, रवि राइस मिल भुआलपुर के तारकेश्वर राय के यहां 99 लाख रुपये,
छपरा सदर के दानी मौर्यध्वज राइस मिल, डोरीगंज के संचालक के यहां 12 लाख 75 हजार रुपये, तिश्मत राइस मिल, जितवारपुर दरियापुर की तिश्मत देवी के यहां 44 लाख 94 हजार, मांझी पश्चिमी पैक्स राइस मिल के प्रमोद सिंह के यहां 20 लाख 45 हजार, रॉयल राइस मिल, चेतन छपरा, बनियापुर के यूसुफ खां के यहां 14 लाख 19 हजार, शिवम राइस मिल, तरैया के यहां 12 लाख, 51 हजार, गणोश राइस मिल, मकसुदपुर नगरा के यहां 26 लाख 78 हजार तथा नारायण एग्रो फूड प्रोडक्ट्स सोनिया, दाउदपुर के आनंद देव सिंह के यहां 15 लाख 64 हजार रुपये बकाया है.
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