जुबां पर मायके जाने की बात, इरादे थे खतरनाक
Updated at : 06 Jun 2018 4:28 AM (IST)
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सास के साथ हुआ था पारिवारिक कलह मांझी : मांझी रेलवे स्टेशन पर दो बेटियों के साथ आत्महत्या करने आयी महिला डेरनी थाना क्षेत्र के सुतिहार गांव से अपने मायके दाउदपुर थाना क्षेत्र के मदनसाठ गांव जाने की बात कह कर निकली थी. पति अनिल राम समेत ससुराल वालों को क्या पता था कि मायके […]
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सास के साथ हुआ था पारिवारिक कलह
मांझी : मांझी रेलवे स्टेशन पर दो बेटियों के साथ आत्महत्या करने आयी महिला डेरनी थाना क्षेत्र के सुतिहार गांव से अपने मायके दाउदपुर थाना क्षेत्र के मदनसाठ गांव जाने की बात कह कर निकली थी. पति अनिल राम समेत ससुराल वालों को क्या पता था कि मायके जाने के बहाने बच्चियों के साथ आत्महत्या करने का प्रयास करेगी. पति काम करने के लिए घर से निकला था.
इसी बीच सूचना मिली कि पत्नी अपनी सास से कुछ पारिवारिक कलह के कारण घर से मायके जाने की बात कह कर निकली थी. पति भी थोड़ी ही देर में ससुराल चल दिया. ससुराल पहुंचने पर पति ने पत्नी के संबंध में पूछताछ किया, लेकिन ससुराल वालों ने सुमन के नहीं आने की बात कही. इसी बीच ससुराल में खबर मिली कि सुमन अपने दो बच्चों के साथ मांझी रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या करने की नीयत से ट्रेन के सामने कूद गयी है. सूचना पर पति मांझी अस्पताल पहुंचा. हालांकि पति खुद ही इस घटना से इतना बदहवास था कि उसकी बोली नहीं निकल रही थी.
घंटों रेल व स्थानीय पुलिस के बीच फंसा रहा मामला : घटना के बाद रेल तथा स्थानीय पुलिस के बीच मामला फंसा रहा .घायल महिला तथा बच्चियों को अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका. स्टेशन पर मौजूद रेल पुलिस स्थानीय पुलिस का मामला बता रहे थे. इसी बीच महिला दोनों बच्चियों को लेकर स्टेशन परिसर में ही घंटों बैठी रही. बाद में स्टेशन संचालक लालबाबू ने रिक्शे से दोनों बच्चियों तथा महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया.
वहां चिकित्सकों ने एक को मृत घोषित कर दिया. पिता अनिल राम अपनी बेटी का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर रहे थे.
इलाज के नाम पर हुई खानापूर्ति
घायल महिला तथा दोनों बेटियों को रिक्शा पर लाद कर स्टेशन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां डॉक्टरों ने रिक्शा पर ही इलाज शुरू कर दिया. वहां डॉक्टरों ने बड़ी बेटी रूपमा को मृत घोषित कर दिया. वहीं छोटी बेटी तथा सुमन को डॉक्टरों ने रिक्शा पर ही इलाज शुरू कर दिया. मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इसके पहले भी घायलों का इलाज ठेले पर कर छपरा रेफर कर दिया गया था. इस अस्पताल में ठेला तथा रिक्शा पर ही इलाज कर रेफर कर दिया जाता है. घायलों का इलाज के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति कर दी जाती है. वहीं स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी रोष देखा जा रहा है.
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