मानव कल्याण के लिए सनातन धर्म सर्वोपरि, मिथिला पहुंचे शंकराचार्य ने भक्तों को दिया एक खास संदेश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Apr 2022 7:38 PM
उन्होंने कहा कि जीवन कल्याण के लिए मंदिर, मठ, शिक्षा, धर्म और सेवा यही आधार है और इसी से मानव जीवन का कल्याण हो सकता है. उन्होंने प्रकृति के बारे में भी बताते हुए कहा कि प्रकृति का असंतुलन मानव जीवन के हित में नहीं है.
मधुबनी/कलुआही : कलुआही प्रखंड क्षेत्र के गांव लोहा शुभंकरपुर में नॉलेज फस्ट कॉमर्स एकेडमी के संस्थापक सुजीत कुमार झा के आवास परिसर में गुरुवार को पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में धर्मगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस दौरान दीक्षांत कार्यक्रम भी आयोजित हुआ. वहीं श्री नारायण पादुका पूजन भी किया गया. इस मौके पर वहां महिला व पुरुषों की भारी भीड़ जमी हुई थी. आस-पास के गांवों के भी लोग उपस्थित हुए थे और शंकराचार्य के दर्शन कर रहे थे. धर्म गोष्ठी को संबोधित करते हुए पुरी पीठाधीश्वर ने कहा कि मानव कल्याण के लिए सनातन धर्म सर्वोपरि है.
इसी क्रम में उनसे कई श्रोताओं ने अपनी शंका समाधान के लिए कई प्रकार के प्रश्न भी किए, जिसका बड़े ही सहज और सरल अंदाज में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने उत्तर देकर उनकी शंका का समाधान किया. उन्होंने कहा कि जीवन कल्याण के लिए मंदिर, मठ, शिक्षा, धर्म और सेवा यही आधार है और इसी से मानव जीवन का कल्याण हो सकता है. उन्होंने प्रकृति के बारे में भी बताते हुए कहा कि प्रकृति का असंतुलन मानव जीवन के हित में नहीं है. क्योंकि प्रकृति अपना संतुलन स्वयं बनाता है. अगर प्रकृति के साथ खिलवाड़ हुआ तो मानव जीवन को इसका फल निश्चित रुप से भुगतना होगा.
प्रखंड के हरिपुर बक्शीटोल गांव में जन्म लेने वाले शंकराचार्य स्वामी ने अपने बचपन के दिन को याद करते हुए कहा कि करीब 62 साल पूर्व वे मिथिला को छोड़ सन्यासी बनने के लिए घर से निकल गए थे. उन्होंने बचपन की पुरानी यादों को साझा किया कि लोहा हाई स्कूल की चर्चा करते हुए कहा कि स्व. रामकृष्ण झा प्रधानाध्यापक के समय वे 8 वीं, 9 वीं एवं दशवीं का पढ़ाई किये हैं.
उन्होंने बताया कि लोहा स्कूल से नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने भी पढ़ाई किया है. कहा कि विश्व की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित सनातन धर्म के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है. सनातन परंपरा में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शुद्र सभी के लिए सन्यासी, वानप्रस्थ आदि के लिए अलग अलग मार्ग दिखाया गया है. उसके अनुसरण से जनसंख्या का संतुलन कायम रहेगा. उन्होंने मिथिला की धरती को नमन करते हुए महान कहा.
जगतजननी मां सीता को अपनी बहन मानते हुए जगतगुरु शंकराचार्य ने कहा कि मिथिला की धरती की उर्वराशक्ति बहुत अधिक है. 27 – 27 पीढ़ी तक राजा जनक ने जीवन युक्त शासन किया है. विश्व मे ऐसा कहीं नही संभव हुआ है. विश्व बैंक,नासा सहित अन्य संस्थान आज भी अपनी गुत्थी सुलझाने मेरे पास आते हैं. मिथिला के लोग गुरु, गोविंद और ग्रन्थ से अपने को दूर नही करें.
उन्होंने कहा कि सभी मिथिलानी जगतजननी सीता का अनुकरण करें एवं सात्यिवक आहार – विचार का पालन करने को कहा. इस दौरान सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था रही. सुरक्षाकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे. मौके पर बोध कृष्ण झा, सुजीत झा, सुधीर झा, सुमित झा, ग्रामीण रविंद्र झा, कृष्ण कुमार झा गुड्डू, अनिल झा, प्रफुल्ल चंद्र झा, गांधी मिश्र गगन सहित हजारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
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