शुष्क व गर्म मौसम मक्का की फसल में तना छेदक कीट के लिये अनुकूल

Updated at : 21 Apr 2024 10:49 PM (IST)
विज्ञापन
शुष्क व गर्म मौसम मक्का की फसल में तना छेदक कीट के लिये अनुकूल

समस्तीपुर : वसंतकालीन मक्का में इन दिनों तना छेदक कीट का प्रकोप बढ़ गया है, इससे किसान परेशान हैं.

विज्ञापन

समस्तीपुर : वसंतकालीन मक्का में इन दिनों तना छेदक कीट का प्रकोप बढ़ गया है, इससे किसान परेशान हैं. किसानों का कहना है तना छेदक कीट मक्का की पत्तियां खा जाती है, वहीं तने के गुदे को भी खाकर पौधों को नुकसान पहुंचाती है. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए सत्तार ने कहा है शुष्क एवं गर्म मौसम वसंतकालीन मक्का में तना छेदक कीट के फैलाव के अनुकूल है. किसान इस कीट से फसल को बचाने के लिये लगातार फसल में तना छेदक कीट की निगरानी करें. इस कीट के फैलाव के लिए मौसत पूरी तरह अनुकूल है. अंडे से निकलने के बाद इस कीट कीछाेटी-छोटी सुंडियां मक्का की कोमल पत्तियों को खाती है तथा मध्य कलिका की पत्तियों के बीच घुसकर तने में पहुंच जाती है. यह तने के गुदे को खाती हुई जड़ की तरफ बढ़ते हुए सुरंग बनाती है. फलस्वरुप मध्य कलिका मुरझाई हुई नजर आती है. बाद में पौधा सूख जाती है. इस प्रकार पौधे की बढ़वार रुक जाती है एवं उपज में काफी कमी आती है. इस कीट के रोकथाम हेतु क्लोरपाईरिफॉस 20 ईसी दवा का 2.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल में समान रूप से छिडकाव करें. फसलों में सिंचाई शाम के समय में करें. ध्यान दें कि सिंचाई करते समय हवा की गति कम हो. वसंतकालीन मक्का की फसल जो घुटने की ऊंचाई के बराबर हो गयी हो, मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें. आवश्यक नमी हेतु फसल की सिंचाई करें. गरमा सब्जियों भिन्डी, नेनुआ, करैला, लौकी (कद्दू) तथा खीरा की फसल में कीट एवं राेग व्याधि की निगरानी प्राथमिकता से करते रहें. कीट का प्रकोप इन फसलों में दिखने पर मैलाथियान 50 ईसी या डाइमेथोएट 30 ईसी दवा का 01 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें.प्याज फसल में थ्रीप्स की संख्या अधिक पाये जाने पर प्रोफेनोफॉस 50 ईसी दवा का 1.0 मिली प्रति लीटर पानी या इम्डिाक्लोप्रिड दवा का 1.0 मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें. हल्छी व अदरक की बोआई के लिये करें खेत तैयार किसान हल्दी और अदरक की बोआई के लिए खेत की तैयारी करें. खेत की जुताई में प्रति हेक्टेयर 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद डालें. 15 मई से किसान हल्दी और अदरक की बोआई कर सकते हैं. किसान ओल की फसल की रोपाई शीघ्र संपन्न कर लें. रोपाई के लिए गजेन्द्र किस्म अनुशंसित है. ओल के कटे कन्द को ट्राइकोर्डमा भिरीडी दवा के 5.0 ग्राम प्रति लीटर गोबर के घोल में मिलाकर 20 से 25 मिनट तक डूबोकर रखने के बाद कन्द को निकालकर छाया में 10 से 15 मिनट तक सूखने दें उसके बाद उपचारित कन्द को लगायें ताकि मिट्टी जनित बीमारी लगने की संभावना को राेका जा सके तथा अच्छी उपज प्राप्त हो सके.

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन