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Samastipur News:बियाडा के खिलाफ उतरा मुस्लिम चेंबर ऑफ कॉमर्स, 11-12 फरवरी को महाधरना

Updated at : 09 Jan 2026 7:10 PM (IST)
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Samastipur News:बियाडा के खिलाफ उतरा मुस्लिम चेंबर ऑफ कॉमर्स, 11-12 फरवरी को महाधरना

बिहार में उद्योग लगाने की राह में रोड़ा बन रहा है बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार.

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Samastipur News:समस्तीपुर : बिहार में उद्योग लगाने की राह में रोड़ा बन रहा है बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार. बियाडा के अधिकारियों के खिलाफ अब उद्यमियों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है. मुस्लिम चेंबर ऑफ कॉमर्स ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि बियाडा की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आगामी 11 एवं 12 फरवरी 2026 को बियाडा कार्यालय, पटना के समक्ष शांतिपूर्ण महाधरना दिया जाएगा.चैंबर की ओर से जारी अल्टीमेटम में कहा गया है कि एक तरफ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बिहार को औद्योगिक रूप से सशक्त बनाने और युवाओं को रोजगार देने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं, वहीं बियाडा के कुछ पदाधिकारी सरकार की इन मंशा पर पानी फेर रहे हैं. संगठन ने विशेष रूप से मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में प्रशासन में पारदर्शिता आयी है, लेकिन बियाडा का तंत्र अब भी पुराने ढर्रे और भ्रष्टाचार में लिप्त है.

– लगाया भ्रष्टाचार व मनमानी का आरोप, मुख्यमंत्री को भेजा अल्टीमेटम

उद्यमियों ने आरोप लगाया है कि निवेश के लिए आने वाली फाइलों को महीनों तक जान बूझकर लंबित रखा जाता है. सरकार द्वारा लाई गई एमनेस्टी पॉलिसी के तहत आने वाले वैध मामलों को भी मनमाने ढंग से खारिज किया जा रहा है. नियमों की गलत व्याख्या कर निवेशकों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है. हमारा उद्देश्य अव्यवस्था फैलाना नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान उस भ्रष्टाचार की ओर खींचना है जो बिहार के औद्योगिक भविष्य को निगल रहा है. यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन को मजबूर होंगे. इनकी पांच सूत्री बियाडा में व्याप्त भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच हो.

दोषी अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.

लंबित और अनुचित रूप से अस्वीकृत फाइलों का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिये. उद्योग स्थापना की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए.

एमनेस्टी पॉलिसी के तहत रद्द किए गए मामलों की पुनः समीक्षा होनी चाहिये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GIRIJA NANDAN SHARMA

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By GIRIJA NANDAN SHARMA

GIRIJA NANDAN SHARMA is a contributor at Prabhat Khabar.

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