Samastipur News:सूरज बाबू नृशंस हत्या के बाद जयप्रकाश बाबू ने शुरू किया आंदोलन : आनंद मोहन

Edited by PREM KUMAR
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पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा है कि सूरज नारायण सिन्हा की नृशंस हत्या नहीं होती, तो मर्माहत जयप्रकाश नारायण इसके खिलाफ खड़े नहीं होते.

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समस्तीपुर : पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा है कि सूरज नारायण सिन्हा की नृशंस हत्या नहीं होती, तो मर्माहत जयप्रकाश नारायण इसके खिलाफ खड़े नहीं होते. वे मंगलवार को जिला अतिथि गृह में प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन शुरू नहीं हाेता तो देश में कांग्रेस का खात्मा नहीं होता. केन्द्र व राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार नहीं बन पाती. वे यहां 21 अप्रैल को दरभंगा में प्रस्तावित शहीद सूरज नारायण सिंह स्मृति की सभी की तैयारी के सिलसिले में समस्तीपुर पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि सूरज बाबू बिहार के भगत सिंह थे. जिनको फांसी पहले और बाद में कालापानी की सजा हुई. मुल्क की आजादी के बाद 1947 में टल गयी. सूरज बाबू वे शख्सियत थे, जिनके जननायक कर्पूरी ठाकुर, वशिष्ठ नारायण सिंह, रामविलास पासवान, रामजीवन सिंह, गजेन्द्र प्रसाद हिमांशु, हुकुमदेव नारायण यादव, परमेश्वर कुंवर, रामसेवक हजारी, देवेन्द्र प्रसाद यादव, देवनाथ यादव जैसे दर्जनों चर्चित नेता प्रेरणा पाते थे. वे उन्हें अपना आदर्श मानते थे. सूरज बाबू जमींदार परिवार में पैदा हुये थे और गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते हुये मारे गये थे. उन्होंने अपनी सारी संपत्तियां गरीबों में बांट दी थी. उन्होंने सिद्धांतों के लिये ललित बाबू द्वारा पेश मुख्यमंत्री का प्रस्ताव ठुकरा दिया. वे नख से सिर तक समाजवादी थे. अंतिम सांस तक शोषित, वंचितों गांव और गरीब की लड़ाई लड़ते रहे. आजाद दस्ता के नायक सूरज बाबू थे, जिन्होंने हजारीबाग जेल ब्रेक कर 42 क्रांति के नायक जय प्रकाश नारायण को मुक्त किया और दूसरी बार नेपाल में हनुमाननगर जेल तोड़कर जेपी और लोहिया को आजाद कराया. उन्होंने देश और समाज के लिए जितनी कुर्बानियां दी, उसका दसवां अंश भी समाज और सरकार ने अता नहीं किया. कहते हैं जो देश मर जाता है जो अपने महापुरुषों को भूल जाता है. भावी नस्लों को सूरज बाबू के व्यक्तित्व और कृतित्व को जानने समझने के लिये और उनके बलिदान के अनुरूप सम्मान दिलाने वास्ते ही दरभंगा में में शहीद सूरज बाबू की स्मृति सभा आहूत की गयी है. मौके ठाकुर उदय शंकर सिंह, जदयू जिला अध्यक्ष दुर्गेश राय, अशर्फी सहनी, करनी सेना के जिलाध्यक्ष अविनाश सिंह चंदेल, सुबोध कुमार सिंह, मृत्युंजय झा, अरुण गुप्ता, विजय सिंह, सत्यजीत सिंह, कैलाश नाथ सिंह, अरुण कुमार, आशुतोष अमन, सचिदानंद, नन्की सिंह, दीपक त्रिवेदी, बलवंत सिंह, अमरेश सिंह, रणवीर सिंह आदि मौजूद थे.

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