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किसान लंबी अवधि वाले धान की नर्सरी 25 मई से लगायें : वैज्ञानिक

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए सत्तार ने किसानों को सलाह दी है कि किसान लंबी अवधि वाले धान की किस्मों की नर्सरी 25 मई से लगा सकते हैं.

समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए सत्तार ने किसानों को सलाह दी है कि किसान लंबी अवधि वाले धान की किस्मों की नर्सरी 25 मई से लगा सकते हैं. उन्होंने इसके लिए नर्सरी तैयारी करने की सलाह दी है. धान की लंबी किस्में में राजश्री, राजेन्द्र मंसूरी, राजेन्द्र स्वेता, किशोरी, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 वीपीटी-5204 तथा सत्यम की नर्सरी लगायी जा सकती है. बताया गया है कि स्वस्थ पौध के लिए नर्सरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का व्यवहार करें. नर्सरी में क्यारी की चौड़ाई 1.25 से 1.5 मीटर तथा लंबाई सुविधानुसार रखें. एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में राेपाई के लिये 800-1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की नर्सरी तैयार करें. बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्रोत से करें. बीज गिराने के पूर्व बीजोपचार कर लें. जिन किसानाें का खेत खाली है तथा वे खरीफ धान की नर्सरी समय से लगाना चाहते हैं वैसे किसान खेत की तैयारी शुरू कर दें. हल्दी की बोआई के लिए मौसम अनुकूल है. किसान इसकी बोआई करें. हल्दी की राजेन्द्र साेनिया, राजेन्द्र साेनाली किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 60 से 75 किलोग्राम, स्फूर 50 से 60 किलोग्राम, पोटास 100 से 120 किलोग्राम एवं जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. हल्दी के लिए बीज दर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें. बीज प्रकन्द का आकार 30-35 ग्राम जिसमें 4 से 5 स्वस्थ कलियां हो. राेपाई की दूरी 30 गुणा 20 सेमी तथा गहराई 5 से 6 सेमी रखें. अच्छी उपज के लिए 2.5 ग्राम इन्डोफिल 45 को 0.1 प्रतिशत बेविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से घोल बनाकर उसमें आधा घंटे तक उपचारित करने के बाद बोआई करें. बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्त्रोत से करें. लत्तर वाली सब्जियों नेनुआ, करैला, लौकी (कद्दू), और खीरा फसलों में फल मक्खी कीट की निगरानी करें. इन फसलों को क्षति पहुंचाने वाला प्रमुख कीट है. यह घरेलू मक्खी की तरह दिखाई देने वाली भूरे रंग की होती है. मादा कीट मुलायम फलों की त्वचा के अन्दर अंडे देती है. अंडे से पिल्लू निकलकर अन्दर ही अन्दर फलों के भीतरी भाग को खाता है. जिसके कारण पूरा फल सड़कर नष्ट हो जाता है. इस कीट का प्रकोप शुरू होते ही 01 किलोग्राम छोआ, 2 लीटर मैलाथियान 50 ईसी को 1000 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिनों के अन्तराल पर दो बार छिड़काव आसमान साफ रहने पर ही करें. किसान अदरक की बोआई शुरू करें. अदरक की मरान एवं नदिया किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 30 से 40 किलोग्राम, स्फूर 50 किलोग्राम, पोटाश 80 से 100 किलोग्राम जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम एवं बोरेक्स 10 से 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. अदरक के लिए बीज दर 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें. बीज प्रकन्द का आकार 20-30 ग्राम जिसमें 3 से 4 स्वस्थ कलियां हों. रोपाई की दूरी 30 गुणा 20 सेमी रखें. अच्छी उपज के लिए रीडोमिल दवा के 0.2 प्रतिशत घोल से उपचारित बीज की बोआई करें. खरीफ मक्का की बोआई के लिये खेत की तैयारी करें. खेत की जुताई में 10 से 15 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. बोआई के समय प्रति हेक्टेयर 30 किलो नेत्रजन, 60 किलो स्फुर तथा 50 किलो पोटाश का व्यवहार करें. उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित मक्का की किस्में सुआन, देवकी, शक्तिमान-1, शक्तिमान-2, राजेन्द्र संकर मक्का-3, गंगा-11 है. खरीफ मक्का की बोआई 25 मई से करें.

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