Samastipur news: Trouble for urea: यूरिया के लिए किसान कर रहे त्राहिमाम, बढ़ा आक्रोश

प्रखंड क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए त्राहिमाम कर रहे हैं. खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही है लेकिन विभागीय उदासीनता की वजह से अब तक यूरिया की सप्लाई संभव नहीं हो पा रही है.
मोरवा : प्रखंड क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए त्राहिमाम कर रहे हैं. खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही है लेकिन विभागीय उदासीनता की वजह से अब तक यूरिया की सप्लाई संभव नहीं हो पा रही है. बताया जाता है कि गत एक महीने से प्रखंड क्षेत्र के लिए यूरिया का आवंटन नहीं मिलने से किसानों के लिए खेती करना काफी मुश्किल हो रहा है. किसान की फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है. बाजार से यूरिया गायब है. ऐसे में किसान खेती को कैसे बचाये रखें यह बड़ी समस्या बनी हुई है. किसान बड़ी उम्मीद से दुकानों पर यूरिया लेने के लिए पहुंचते हैं लेकिन दुकानदार द्वारा हाथ खड़े किये जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. किसानों का कहना है कि आधी से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई. गेहूं, सरसों और हरी सब्जी की खेतों में यूरिया नहीं मिलने से पैदावार पूरी तरह प्रभावित होने का डर है. यूरिया कब तक किसानों को उपलब्ध होगा, इस बारे में न तो दुकानदार कुछ बता पा रहे हैं और न ही अधिकारी के पास इसका कोई ठोस जवाब है. इस बाबत कौवा चौक के खाद विक्रेता कुमार फर्टिलाइजर के नलीन कुमार उर्फ बबलू ने बताया कि जनवरी महीने में काफी कम आवंटन मिला था. यूरिया के साथ नैनो यूरिया और सिलका लेने को लेकर किसानों को बाध्य किया जा रहा है. किसी तरह किसान थोड़ा बहुत यूरिया का उपयोग किये थे. पूरे फरवरी में यूरिया नहीं मिलने से किसान फसल को बचाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं. बताया जाता है कि पहले समस्तीपुर में रैक लगता था. माल ढुलाई भी कम लगती थी. अब काफी कम मात्रा में यूरिया लहेरियासराय रैक प्वाइंट डिपो पर उतारा जाता है. जहां से गाड़ी भाड़ा के रूप में ही प्रति बोरी 40 रुपये लगता है. विभाग के नियम के अनुसार तय कीमत पर यूरिया की बिक्री करनी है. पॉश मशीन से यूरिया की बिक्री होती है. पॉश मशीन में तकनीकी गड़बड़ी के कारण यूरिया का स्टॉक तो दिखाई देता है लेकिन खुले बाजार में यूरिया की भारी किल्लत है. किसानों के लिए बनी सहकारी संस्था पैक्स में भी यूरिया का अभाव है जिसके कारण किसान यूरिया के लिए दर-दर भटक रहे हैं. किसान गणेश शर्मा, समरेश शर्मा, दीपक कुमार, साजन कुमार, संजय कुमार, संतोष शर्मा, नागदेव राय आदि किसानों का कहना है कि मक्का की फसल खेत में बुरी तरह मुरझा रही है. पटवन के बाद उसे यूरिया चाहिए लेकिन बाजार में यूरिया ही उपलब्ध नहीं है फिर मक्के की फसल को कैसे बचाया जाये या समझ के पड़े है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




