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मोहनपुर में आकर ठहर जायेंगी फोरलेन सड़क निर्माण की कोशिशें

Updated at : 19 Jan 2025 11:39 PM (IST)
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मोहनपुर में आकर ठहर जायेंगी फोरलेन सड़क निर्माण की कोशिशें

सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2016 में पूरा हो जाना था, वर्ष 2024 खत्म हो जाने के बाद भी उसका निर्माण आधा-अधूरा पड़ा हुआ है.

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मोहनपुर : यह अजीब बात है कि जिस महत्वाकांक्षी बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2016 में पूरा हो जाना था, वर्ष 2024 खत्म हो जाने के बाद भी उसका निर्माण आधा-अधूरा पड़ा हुआ है. सरकार ने इस पर अनेक मंथन किये, कोशिशें कीं, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया. करोड़ों रुपये राजस्व की क्षति हुई, लेकिन यह मामला अधर में लटका रह गया. हाल ही में इसको लेकर पदाधिकारी स्तर की विशेष बैठक आयोजित की गयी है. निर्णय लिया गया है कि इस निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर निबटाया जाये. परंतु यह काम सहज नहीं है. बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन सड़क निर्माण के लिए इस बीच नयी निर्माण तिथियां निर्धारित की जाती रही हैं. सरकार ने इस निर्माण कार्य को लेकर संवेदक भी बदले. परंतु आशंका है कि यह निर्माण कार्य अभी कई वर्षों तक ऐसे ही लंबित रहेगा. उल्लेखनीय है कि बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन सड़क मोहनपुर की कई पंचायतों से होकर गुजरती है. इनमें डुमरी दक्षिणी, बिशनपुर बेड़ी और राजपुर जौनपुर पंचायतों के नाम प्रमुख हैं. अन्य कई पंचायतों के किसानों से सड़क निर्माण क्षेत्र में आनेवाली जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है. इस अधिग्रहण के एवज में किसानों को मुआवजे की मोटी रकम अदा की गयी है. मध्य विद्यालय, डुमरी जैसे सरकारी संस्थानों को भी मुआवजे की राशि दी जा चुकी है. परंतु बरसों पहले सरकार की ओर से मुआवजा लेने के बावजूद मध्य विद्यालय, डुमरी अपने पुराने स्थान पर ही संचालित हो रहा है. ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने मुआवजे की रकम प्राप्त कर लेने के बावजूद निर्धारित जमीन पर कब्जा जमा रखा है. राजपुर जौनापुर के लोगों ने अनेक बार निर्माण कार्य रोका.

2016 में पूरा होना था निर्माण कार्य, अभी भी बाकी है पचास प्रतिशत काम

उनका अंदेशा है कि निर्माणाधीन फोर लेन के बीच में बड़े आकार का पुल नहीं बनाया गया, तो गांव के पहुंच पथ प्रभावित होंगे. इस कारण किसानों को अपने खेतों तक आने में असुविधा होगी. उन्हें लंबी दूरी तय कर अपने खेतों तक आना पड़ेगा. दूसरी ओर समाज में निवास करने वाले परिवारों का भी एक – दूसरे से संपर्क भंग हो जायेगा. बड़े आकार का पुल नहीं देने से बाढ़ के पानी का खतरा बढ़ सकता है. आने वाली बाढ़ निकल नहीं पायेगी. इस प्रकार गृहभूमि एवं कृषि भूमि डूबी रह जायेगी. जान माल का नुकसान हो सकता है. बड़े आकार के पुल के निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने अनेक बार धरना-प्रदर्शन भी किया है. पुल निर्माण के लिए ऊंचे स्तर पर बात पहुंचायी गयी है. सरकार ने बड़े आकार के पुल बनाने की मांग को स्वीकार करने का मन भी बनाया. लेकिन सुनने में आया है कि बिशनपुर बेड़ी गांव के लोग बड़े आकार के पुल की मांग का विरोध करते हैं. उन्हें आशंका है कि यदि बड़े आकार के पुल बना दिये जायें, तो बाढ़ का पानी मटियौर आदि गांवों को डूबो देगा. जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी स्तर पर इस विवाद को सुलझाने की अनेक कोशिशें हुईं. लेकिन फिलहाल यह विवाद सुलझता हुआ नहीं दिखता. बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन निर्माण के कार्य में अपेक्षित प्रगति होने में संदेह नजर आ रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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