Samastipur News:विद्यापतिनगर : गाहे-बगाहे गरीब मजदूर का आशियाना उजाड़ अतिक्रमण पर किये कार्रवाई से अपनी पीठ थपथपाने वाले अधिकारी के कदम रसूखदार अतिक्रमणकारी के आगे ठिठक क्यों जाते हैं. अतिक्रमण पर एक दो कार्रवाई को छोड़ दें तो महत्वपूर्ण इलाके ऐसी कार्रवाई से अब तक अछूता है. प्रखंड के बाजारों में सुरसा की भांति अतिक्रमण से सरकारी भूमि पर कब्जा फैलता जा रहा है. आलम यह है कि मंदिर, मस्जिद, हाट, बाजार सहित यातायात को सुगम बनाने वाली सड़कें अतिक्रमण के भंवर जाल में उलझी है. ऐसा लोगों का कहना है. लोग बताते हैं कि यह सरकार के विकास के दावों को खोखला कर रहा है. यहां के प्रभावशाली कहे जाने वाले लोग या तो स्वयं अतिक्रमणकारी बने बैठे हैं या वे अतिक्रमणकारियों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रहे हैं. प्रखंड से गुजरने वाली मुख्य सड़क के किनारे की जमीन पर बालू गिट्टी के व्यवसाय फल फूल रहा है. तो व्यवसायिक प्रतिष्ठान का परिसर सड़क की कब्जा कर बनी है. मऊ बाजार, बाजिदपुर बाजार,बजरंग चौक से विद्यापतिधाम की सड़क पर अतिक्रमण का तांडव आम अवाम के लिए वर्षों से कष्टदायी बना है. रोजमर्रे की भाग- दौड़ हो या फिर पर्व त्योहार के खास अवसर खुशी बांटने की जगह ये पीड़ा पहुंचाती है. धनाढ्य या प्रभावशाली लोग सड़कों के किनारे दर्जनों गुमटियां स्थापित कर उसका आर्थिक लाभ बटोर रहे हैं. जहां बिगाड़ के डर से कानून प्रिये लोग ईमान की बात कहने से चुप्पी साध लेते हैं. सीमावर्ती प्रखंड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से स्थानीय अमन पसंद में एक आशा की किरण जगी थी. पर ऐसे लोगों की माने तो इलाके में प्रभावशाली लोगों की बहुतायत से सम्राट बुलडोजर की हवा यहां आते आते निकल गयी. लोगों की मानें तो इस ओर प्रशासनिक कार्रवाई केवल कमजोर वर्ग तक ही सीमित दिखाई दे रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद दुकानदारों, निजी संस्थानों और रसूखदार लोगों द्वारा किये गये अतिक्रमण पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. फुटपाथों पर स्थायी निर्माण, सड़क किनारे अवैध कब्जे और सार्वजनिक जमीन पर निजी उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है. इससे आम लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभियान चलाने की घोषणा तो की जाती है, लेकिन प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों पर हाथ डालने से परहेज किया जा रहा है. भारी भारीभरकम कवच से अतिक्रमण का घूंघट उठने का नाम नहीं ले रहा.
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