जमीनदाता पूर्वजों के उदार चेहरे पर वंशज ने डाला कब्जे का घूंघट

Updated at : 19 May 2024 11:03 PM (IST)
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जमीनदाता पूर्वजों के उदार चेहरे पर वंशज ने डाला कब्जे का घूंघट

अतीत की लब्ध प्रतिष्ठित पहचान के साथ वर्तमान को संवारने में विद्यापति प्लस 2 विद्यालय दक्षिण फिलवक्त चर्चा में है. छात्र जीवन में कई मेधावी छात्र इस विद्यालय की गरिमा को उच्च पदों पर रहकर सुशोभित कर चुके हैं.

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विद्यापतिनगर : अतीत की लब्ध प्रतिष्ठित पहचान के साथ वर्तमान को संवारने में विद्यापति प्लस 2 विद्यालय दक्षिण फिलवक्त चर्चा में है. छात्र जीवन में कई मेधावी छात्र इस विद्यालय की गरिमा को उच्च पदों पर रहकर सुशोभित कर चुके हैं. फिलहाल यह अपनी उपलब्धियों को धार देने में जुटा है. वर्षों बाद प्रभारी प्राचार्य के पद पर आये शिक्षक के जज्बे को लोग सलाम कर रहे हैं. प्रभारी प्राचार्य अमित भूषण ने शैक्षणिक वातावरण में सुधार के साथ विद्यालय भवन की मरम्मत का कार्य करा क्षेत्र के शिक्षाप्रेमी को सुकून दिलाया है. इसके साथ ही विद्यालय के खेल मैदान सहित इसके भूभाग को चहारदीवारी के बीच सुरक्षित करने का कार्य प्रगति पर है. जहां अतिक्रमणकारी का दंश रह-रह कर विद्यालय को पीड़ा का अहसास करा जाता है. यह विद्यालय वर्षों से ही अतिक्रमण का दंश झेल रहा है. परिणाम स्वरूप खेल मैदान की चारदीवारी के लिए हर वर्ष विभाग से आवंटित राशि लौट जाया करती थी. प्रभारी प्राचार्य की इच्छाशक्ति के कारण इस वर्ष विद्यालय के जीर्णोद्धार का कार्य कराया जा रहा है. जहां दानदाता पूर्वज के उदार चेहरे पर उनके वंशज का कब्जे वाले घूंघट चहारदीवारी के निर्माण में बाधा बन कार्य में रुकावट पैदा कर रहा है. पूर्वजों का भूमि दानपत्र अब छलावा हो रहा साबित विद्यापति प्लस 2 विद्यालय दक्षिण को कुल सात बीघा पंद्रह कट्ठा जमीन भूमिदाता से प्राप्त है. विद्यालय की स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी. इसे सरकारी मान्यता 1951 में दी गई. कुल इक्कीस लोगों ने तब विद्यालय के लिए भूमि दान किया था. इसमें पांच वैसे लोग शामिल थे जिन्होंने दूसरे की जमीन को अपने नाम से विद्यालय को दे दिया. ऐसी भूमि आज विद्यालय के लिए जी का जंजाल बना है. वहीं पूर्वजों के दिए भूमि दान वाले भूभाग पर उनके वंशज कब्जा जमाये बैठे हैं. इससे विद्यालय की चहारदीवारी के निर्माण में कठिनाई हो रही है. नये नक्शे में अंकित नहीं है विद्यालय भवन का नामो निशानबड़े से भूभाग में बना विद्यालय का भवन भूमि की पैमाइश वाले नक्शे से गायब है. जिसे पूर्वज भूमिदाता के वंशज की करतूत कही जा रही है या फिर नक्शा निर्माण की भूल. जानकारी दी जा रही है कि फिलवक्त इन इलाकों में भूमि की पैमाइश नये नक्शे को आधार मान कर किया जा रहा है. अंचल कार्यालय की सहमति भी यही बताई जाती है. ऐसे में नये नक्शे में विद्यालय के भवन व भूमि का नहीं होना कितना लाजिमी है. अंचल अधिकारी कुमार हर्ष ने बताया कि विद्यापति प्लस 2 विद्यालय दक्षिण की चहारदीवारी के निर्माण से पूर्व जमीन की पैमाइश कराई गई थी. इसके बाद घेराबंदी का कार्य प्रारंभ हुआ. इसके सीमांकन में स्थित भूमि मालिक के अवरोध पर उनसे उनके जमीन का पेपर मांगा गया है. प्रस्तुत पेपर के आलोक में पुनः सीमांकन कर कार्य शुरू कराया जायेगा.

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