10 साल बाद भी स्थिति यथावत, चार कंपनियों ने पुल निर्माण से खींच लिया था हाथ

Updated at :24 Jun 2015 7:49 AM
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10 साल बाद भी स्थिति यथावत, चार कंपनियों ने पुल निर्माण से खींच लिया था हाथ

मोरवा : दुनिया तेजी से हाइटेक हो रहा है. विज्ञान के नये नये आविष्कार आमलोगों के मुश्किल को काफी हद तक कम कर रही है. लेकिन वरूणा पुल पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है. अभियंता दस सालों में भी यह जानने में असफल रहे कि आखिर इस मर्ज की दवा क्या है. विगत […]

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मोरवा : दुनिया तेजी से हाइटेक हो रहा है. विज्ञान के नये नये आविष्कार आमलोगों के मुश्किल को काफी हद तक कम कर रही है. लेकिन वरूणा पुल पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है. अभियंता दस सालों में भी यह जानने में असफल रहे कि आखिर इस मर्ज की दवा क्या है.
विगत सालों में इस पुल निर्माण को लेकर चार से ज्यादा कंपनियों द्वारा काम की शुरुआत तो बड़े जोर शोर से शुरू किया गया लेकिन कुछ दिनों बाद इससे हाथ खींच लिया. एन एच 103 पर अवस्थित यह अति महत्वपूर्ण पुल निर्माण में इंजीनियरिंग के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं.
बताया जाता है कि इस पुल के निर्माण के लिये अबतक करोड़ों रुपये के टेंडर पास किये गये. दस साल से ज्यादा का समय भी लगा लेकिन इसकी दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है. इस पुल के लिये दो किनारे के पाये के बीच में दो गोलाकार पाया बीच नदी में बनाने की प्रक्रिया शुरू की गयी. दोनों किनारे के पाये सही सलामत बन गये. मिट्टी भराई के बाद लोगों को लगा कि अब यातायात जल्द ही चालू हो जायेगा क्योंकि बीच वाले पाये का निर्माण कार्य प्रगति पर था. लेकिन पाया जैसे जैसे नीचे जाने लगा
अभियंताओं के माथे पर बल पड़ने शुरू हो गये. नीचे जाते जाते एक के बाद एक दोनों पाये टेढ़े होने लगे.
इंजीनियरों ने लाख दिमाग खपाया लेकिन इस गुत्थी को सुलझा न सके. पुल निर्माण के पहले यहां की मिट्टी एवं नदी के जलस्तर की जांच की गयी थी उसके बाद काम शुरू हुआ था लेकिन टेढ़े पाये ने सबकी कलई खोल कर रख दी. पुल निर्माण से जुड़े लोगों का कहना है कि इस नून नदी के नीचे सौ फीट के बाद पानी का भयंकर बहाव है जिसके कारण पाया के नीचे जाते ही दबाव के कारण पाया टेढ़ा हो जा रहा है.
लोगों ने इसे सुधारने के लाख प्रयास किया लेकिन सब बेकार साबित हुए. बताते चलें कि इस मार्ग पर बड़ी गाड़ियों का परिचालन विगत एक दशक से बंद है. एनएच को बने हुए भी पांच साल से ऊपर हो गये. मुख्यमंत्री से लेकर बिहार सरकार के सभी मंत्री इस मार्ग से गुजरते हैं. लोगों को इस बात से भी ताज्जुब हो रहा है कि यह पुल मोरवा और सरारंजन विधान सभा के बीच अवस्थित है और इन दोनों विधान सभा से चुने प्रतिनिधि आज बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं इतना सब होने के बावजूद इसकी दशा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है. इस मार्ग पर यातायात बाधित होने का सीधा प्रभाव क्षेत्र की जनता पर पड़ रहा है. माल ढुलाई के लिये लोगों को अधिक खर्च के बावजूद खासी मशक्कत करनी पड़ती है.
एनएच बन जाने के पटना का सीधा संपर्क दरभंगा और मधुबनी से हो गया है. छोटी गाड़ियां तो किसी तरह इससे पार हो जाती है लेकिन बड़ी गाड़ियों के लिये कई गुना ज्यादा दूरी तय करना पड़ता है. कई बार इस पुल के जीर्णोद्धार की सुगबुगाहट लोगों को सुनने को मिला लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका. इस पुल निर्माण में लगाये गये औजार भी अब बरबाद हो रहे हैं लेकिन पुल की स्थिति यथावत बनी हुई है.
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