तीस वर्ष बाद फिर दी अपराधियों ने दस्तक

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विद्यापतिनगर : नदियां तो वरदान के लिये जानी जाती हैं पर अपराधियों ने गंगा की सहायक बाया नदी को अभिशप्त करार देने को बेकरार कर दिया है़ तब जब यह नदी मार्ग तीन दशक बाद अपराध की सुगबुगाहट पर चर्चा में आया है़. रविवार की रात तीन नाव पर सवार हो अपराधियों का गिरोह बाजार […]

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विद्यापतिनगर : नदियां तो वरदान के लिये जानी जाती हैं पर अपराधियों ने गंगा की सहायक बाया नदी को अभिशप्त करार देने को बेकरार कर दिया है़ तब जब यह नदी मार्ग तीन दशक बाद अपराध की सुगबुगाहट पर चर्चा में आया है़. रविवार की रात तीन नाव पर सवार हो अपराधियों का गिरोह बाजार पहुंच बाजार के कीमती सामान को खाली किये जाने की फिराक में थ़े

व्यवसायी के जागने पर वे सभी नाव छोड़ भाग निकल़े प्रखंड से गुजरने वाली बाया नदी गंगा की सहायक नदी न होकर कभी अपराध के सहायक नदी के तौर पर चर्चित थी़ सीमावर्ती होने के कारण व्यवसायी के लिये अभिशाप तो अपराधी के लिये यह वरदान बना था़ नाव के सहारे नदी से चलकर अपराधी अपराध को अंजाम दे रफ्फू चक्कर हो जाते थ़े.

दियारा इलाका व सीमावर्ती के कारण पुलिस नदी किनारे खड़ा हो तमाशबीन रहा करती थी़ सिलसिला परवान पर था तभी नदी के सहारे होने वाले अपराध के खात्मा के लिये पुलिस ने कमर कसी और देखते ही देखते अपराध पर हद तक अंकुश लग गया़ इसे लेकर आधे दर्जन अपराधी मारे गय़े जिनमें ललवा, नाथो विंद आदि कई नामी अपराधी का नाम शामिल है़

हालांकि बाया नदी किनारे बसा बाजार आज भी उन घटनाओं को भुला नहीं पाया है़ ऐसे अपराध से तो मऊ बाजार का अस्तित्व ही संकट से घिर गया था़ अस्सी के दशक में रंगदारी, फिरौती, हत्या, अपहरण जैसे वारदार से मऊ बाजार के दर्जनों व्यवसायी पलायन कर चुके थ़े जो आज तक आने की हिम्मत नहीं जुटा पाय़े क्योंकि उन सबों ने खूनखराबा अपने आंखों देखा था़.

बाया नदी के किनारे बसे बाजार बाजिदपुर बोचहा बिन बोचहा सभी आतंक के साये में सिमटे थ़े अपराधियों के खात्मे के बाद बाजार की रौनक वापस आयी़ तीस साल बाद फिर अपराधियों ने नदी मार्ग को अपना कर अपराध की आहट दी है जो एक बार फिर पुलिस के लिये चुनौती साबित होगा.

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