कुरेड़ी समाज के 32 जज और कई सिपाहियों ने लगाई अदालत, कालिख पोत दोषियों को पेड़ से बांधा, महिलाओं को भी नहीं बख्शा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Jul 2019 7:40 AM

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‘महा-अदालत’ ने महिलाओं को भी नहीं बख्शा, काटे गये बाल, पुरुषों की तरह सजा जजों द्वारा दोषियों को अर्थ दंड भी लगाया जाता था समस्तीपुर : शंभूपट्टी मध्यविद्यालय के सामने स्थित हाट का मैदान रविवार को कुरेड़ियों की महाअदालत में दी जाने वाली अनोखी सजा का गवाह बना़ हाट परिसर कुरेड़ी समाज की महिला, पुरुषों […]

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‘महा-अदालत’ ने महिलाओं को भी नहीं बख्शा, काटे गये बाल, पुरुषों की तरह सजा
जजों द्वारा दोषियों को अर्थ दंड भी लगाया जाता था
समस्तीपुर : शंभूपट्टी मध्यविद्यालय के सामने स्थित हाट का मैदान रविवार को कुरेड़ियों की महाअदालत में दी जाने वाली अनोखी सजा का गवाह बना़ हाट परिसर कुरेड़ी समाज की महिला, पुरुषों व बच्चों से खचाखच भरा था़
दोषियों को समाज के पुलिस कर्मी बारी-बारी से पकड़कर लाते थे. जैसे ही उन्हें लाया जाता था, पूरे परिसर में कोलाहल मच जाता था. दोषी के अदालत में पेश होते ही पहले उसके चेहरे पर कालिख व चूना पोता जाता था़ माथे में बेल बांधा जाता था़ उसके बाद समाज के सिपाही उसे 12 फुट मोटे खंभे से बांध देते थे. फिर जज सजा सुनाते थे.
मामलों की सुनवाई के लिए उनके 32 जज तैनात किये गये थे. महिला दोषियों के भी चेहरे पर कालिख और चूना पोता जाता था. इसके बाद बाल काटकर छोड़ दिया जाता था. जज दोषियों पर जुर्माना भी लगा रहे थे.
जजों ने बताया कि 51 हजार से दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है़ महाअदालत में गोवर्द्धन, अदालत, मृदाहा व काशमा के लोग शामिल थे. महाअदालत के पहले दिन विभिन्न कांडों के दोषी सात लोगों को सजा दी गयी़ इनमें तीन महिलाएं शामिल हैं
मामले की सुनवाई के लिए तैनात थे ‘जज’, तीन महिलाअों समेत सात दोषियों को दी गयी सजा
दोषियों को बारी-बारी से किया गया पेश
अदालत में दोषियों को बारी-बारी से पेश किया गया. सबसे पहले मृदाहा के द्वारा दोषी को पेश किया गया. दोषी मिथुन कुरेड़ी समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड के रामचंद्रपुर का रहने वाला है.
उस पर अपने ही भाई पर जानलेवा हमले का आरोप था. उसके चेहरे पर परंपरागत ढंग से कालिख और चूना पोता गया, माथे में बेल बांधकर खंभे से बांध दिया गया. जजों ने उसे 51 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. समस्तीपुर के समर्था कल्याणपुर के वसंत कुरेड़ी को भी इसी तरह सजा दी गयी. उसका दोष था कि उसकी पत्नी ने दूसरे पुरुष से संबंध बना लिया था. चौथे दोषी दरभंगा जिले के सोनकी निवासी बिज्जी कुरेड़ी व उसकी सास को सजा दी गयी. छठे दोषी रोसड़ा दुधपुरा के लालू कुरेड़ी को भी परंपरा के मुताबिक चेहरे पर कालिख चूना पोता गया, माथे बेल बांधकर खंभे से बांध दिया गया.
मुगलकाल से चली आ रही है परंपरा
घुमंतू खानाबदोश कुरियाड़ महासंघ के अध्यक्ष कमल करोड़ी ने बताया कि यह परंपरा मुगलकाल से चली आ रही है़ उस समय समाज की ओर से बनाये घेरे में जितने लोग आ गये सभी समाज के सदस्य हो गये.
तबसे यह परंपरा निरंतर जारी है. समाज भारतीय संविधान, कानून व मानवाधिकार आयोग का पूरा सम्मान करता है. इस परंपरा से भारतीय कानून व मानवाधिकार आयोग का उल्लंघन नहीं हो रहा है. आज तक उन लोगों का कोई मामला किसी कोर्ट और थाने में नहीं गया है. इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष रामसुरमन सिंह, भाजपा नेता शैलेन्द्र सिंह, राकेश रंजन पिंटू भी उपस्थित थे.
ताली नहीं बजाने की दी गयी हिदायत
जिस जगह अदालत लगायी गयी थी, वहां एक सूखे वृक्ष का 12 फुट लंबा खंभा काटकर गाड़ा गया. खंभे की समाज की 12 महिलाओं ने विधिवत पूजा की व चढ़ावा चढ़ाया़ मौके पर मौजूद सिपाहियों की पीठ पर हाथ में लाल रंग लगाकर थाप लगाया गया. उसके बाद जज पहुंचे. गोवर्द्धन, अदालत, मृदाहा व काशमा अलग-अगल टोली में बैठे थे. जजों के बीच आपस में उनकी अपनी भाषा में खूब बहस हुई. उसके बाद सिपाहियों को खंभा गाड़ने का आदेश मिला. हिदायत दी गयी कि कोई ताली नहीं बजाएगा. सिपाहियों ने लोगों की तलाशी भी ली गयी.
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