जनता ने अपनाया ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ का नारा

Updated at : 24 May 2019 2:04 AM (IST)
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जनता ने अपनाया ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ का नारा

समस्तीपुर : चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के पक्ष में लहर देखी गई और नतीजा भी वैसा ही रहा. चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया है कि समस्तीपुर(सु.) व उजियारपुर लोकसभा सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के द्वारा उछाला गया ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ नारा को जनता ने अपना लिया है. इस […]

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समस्तीपुर : चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के पक्ष में लहर देखी गई और नतीजा भी वैसा ही रहा. चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया है कि समस्तीपुर(सु.) व उजियारपुर लोकसभा सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के द्वारा उछाला गया ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ नारा को जनता ने अपना लिया है.

इस बार ऐंटी-इन्कंबेंसी फैक्टर और तमाम मसलों पर विपक्षी हमलों के मद्देनजर ऐसा माना जा रहा था कि नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर मिल सकती है लेकिन जबर्दस्त चुनाव प्रचार, जनता तक पहुंच और स्पष्ट नीति ने मोदी को एक बार फिर से पीएम बना दिया है.

शिक्षाविद् अभिलाषा सिंह ने बताया कि वैसे तो चुनावी नारे, पोस्टर, प्रचार पहले से होते आ रहे हैं लेकिन 2014 के बाद इसमें गजब की आधुनिकता दिखी. इस बार बीजेपी उससे भी आगे जाकर युवा मतदाताओं को साधने में कामयाब रही.

कांग्रेस ने जब चौकीदार चोर है का नारा उछाला तो चुनाव से ठीक पहले मोदी ने ट्विटर पर खुद को चौकीदार लिखकर नया अभियान चला दिया. पीएम ने उल्टा विपक्ष पर हमला करते हुए अपने-अपने क्षेत्र में काम करने वालों से चौकीदार बनने को कहा. बड़ी संख्या में सोशल मीडिया और चुनाव प्रचार में मैं भी चौकीदार कैंपेन सफल रहा.

मोदी है तो मुमिकन है और आएगा तो मोदी ही जैसे कैंपेन ने मोदी के प्रति लोगों के भरोसे को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई. जिस समय लोग मोदी के साथ उनके विकल्प के तौर पर तुलना करने की सोचते तो उन्हें उतना भरोसा किसी विपक्षी नेता में नहीं दिखता. समाजसेवी राजू शर्मा कहते है कि मोदी के पक्ष में मिले अपार जनसमर्थन का ही नतीजा है कि वह निर्विवाद रूप से 39 दलों के समर्थन वाले एनडीए में सबसे बड़े नेता के तौर पर बने हुए हैं. जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से नाता तोड़कर बीजेपी ने आतंकवाद पर सख्त नीति से समझौता न करने का संदेश दिया.

एक समय ऐसा कहा जा रहा था कि बीजेपी अपने दम पर अगर बहुमत हासिल नहीं कर पाती है तो हो सकता है कि सहयोगी दल किसी दूसरे नेता को प्रधानमंत्री पद देना चाहें पर जैसे-जैसे चुनाव प्रचार बढ़ा बीजेपी और पूरे एनडीए में मोदी का विकल्प मोदी ही बनते गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भी बड़े नेता के तौर पर उभरेंगे और कड़े फैसले ले सकेंगे.

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