बिना लाइसेंस चल रहे प्लांट

Published at :20 Sep 2017 4:33 AM (IST)
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बिना लाइसेंस चल रहे प्लांट

अनदेखी. पानी बेचना बना व्यवसाय, भूजल दोहन से गिर रहा जलस्तर समस्तीपुर : शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं है जहां भूजल का दोहन न होता हो. पानी के कारोबारियों द्वारा हर रोज धरती की कोख से पानी निकाला जा रहा है, लेकिन सरकारी महकमे नियम कानून की दुहाई देकर तमाशा देख रहे हैं. तमाम […]

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अनदेखी. पानी बेचना बना व्यवसाय, भूजल दोहन से गिर रहा जलस्तर

समस्तीपुर : शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं है जहां भूजल का दोहन न होता हो. पानी के कारोबारियों द्वारा हर रोज धरती की कोख से पानी निकाला जा रहा है, लेकिन सरकारी महकमे नियम कानून की दुहाई देकर तमाशा देख रहे हैं. तमाम दावों के बावजूद सरकारी महकमे व जल संरक्षण के लिए कार्य करने वाले संगठन पानी के कारोबारियों पर नकेल नहीं कस पा रहे हैं. शहर में दर्जनों गाड़ियां प्रतिदिन में शहर में पानी लेकर दौड़ती रहती हैं. दरअसल, पानी बेचने का कारोबार इतना चोखा है कि यह अब बड़ा व्यवसाय बन गया है. शहर के लेकर ग्रामीण इलाकों में अवैध आरओ प्लांट लगे हैं, जो दिन रात पानी का दोहन कर रहे हैं. वर्तमान में शहर में करीब 14 प्लाटों से करीब छह हजार कैंपर रोजाना सप्लाई की जाती है.
जानकारी के अनुसार, आरओ के नाम पर अधिकांश सप्लायर लोगों को सामान्य पानी ठंडा करके पिला रहे हैं. पीने वाला एक डिब्बा पानी 20 से 40 रुपये में बिक रहा है. पानी बेचने के गोरखधंधे में बड़े लोगों के शामिल होने से यह बड़ा व्यवसाय का रूप ले चुका. सूत्रों की मानें तो शहर में जिन कंपनियों की स्थानीय पता लिखी मिनरल वाटर की बोतलें और पाउच उपलब्ध हैं,
वह सब अवैध तरीके से बेचे जा रहे हैं. मिनरल वाटर के नाम पर बोतल व पाउच में पानी पैक कर बाजार में बेचा जा रहा है. इन बोतलों पर अधिकांश कंपनी का नाम-पता, रजिस्ट्रेशन नंबर आदि लिखा होता है, जबकि यह कंपनियां कहीं दर्ज ही नहीं हैं. इसके बाद भी धड़ल्ले से अवैध कारोबार फल-फूल रहा है. शहर में गर्मी बढ़ते ही बोतल बंद पानी की बिक्री में वृद्धि हो गयी है. यहां न तो पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही उसके मानक पर.
चीलिंग प्लांट लगा हो रही पानी सप्लाई
आरओ प्लांट के नाम पर चल रही पानी की दुकान से जहां एक ओर लोगों को रोजगार मिल रहा है, वहीं एक नया व्यवसाय विकसित हुआ है. शहरों में बोतल के अलावा 10 से 15 लीटर के जार में भी पानी की सप्लाई की जाती है. यह पानी चीलिंग प्लांट से लाया जाता है. आरओ प्लांट की तरह ही एक अच्छी ग्राउंड वाटर क्वालिटी वाली जगह पर चीलिंग प्लांट लगाये जाते हैं. चीलिंग प्लांट में पानी को इस स्तर पर ठंडा किया जाता है कि उसके बैक्टीरिया मर जाते हैं.
फिर इस ठंडे पानी को जार में घरों या दुकानों में रोजाना सप्लाई की जाती है. इस प्लांट को लगाने में दो से चार लाख रुपये तक का खर्च आता है. एक बार काम चल निकले तो 30 से 40 हजार रुपये कमा रहे हैं. इनके खिलाफ शिकायतें भी होती हैं. खाद्य व औषधि विभाग बिना पंजीयन के इन प्लांटों के चलने की बात तो स्वीकारता है, लेकिन कार्रवाई से मुंह मोड़ता रहता है.
पानी की गुणवत्ता व उसके मानक की जांच करने से संबंधित निर्देश खाद्य एवं औषधि विभाग को दिये गये हैं. इनकी जांच करा कर कार्रवाई की जायेगी.
प्रणव कुमार, डीएम, समस्तीपुर
बीआइएस से लाइसेंस जरूरी
सबसे पहले आपको ऐसी जगह चुननी होगी, जहां पानी का टीडीएस लेवल अधिक न हो. इसके बाद आपको प्रशासन से लाइसेंस और आइएसआइ नंबर लेना होगा. खाद्य व औषधि विभाग की माने को आरओ प्लांट लगाने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के लाइसेंस की आवश्यकता होती है. पानी जांच के बाद इसे दिल्ली से जारी किया जाता है. यहां से आइएसआइ हाॅल मार्क जारी कर पानी पैक करने की अनुमति दी जाती है. बीआइएस से लाइसेंस मिलने के बाद ही खाद्य व औषधि विभाग की ओर से लाइसेंस देने की प्रक्रिया आगे शुरू होती है.
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