यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी रेगुलेशन के समर्थन में संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति ने निकाला मशाल जुलूस

Published by : Dipankar Shriwastaw Updated At : 10 Feb 2026 6:22 PM

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जातीय व सामाजिक भेदभाव एक गंभीर समस्या

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जातीय व सामाजिक भेदभाव एक गंभीर समस्या सहरसा . यूजीसी द्वारा जारी प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन के समर्थन में संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के आह्वान पर शुक्रवार देर संध्या जिला परिषद प्रांगण से नेताजी सुभाष चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकाला गया. मशाल जुलूस का नेतृत्व छात्र व युवा संघर्ष समिति के नेताओं ने किया. जिसमें छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, आंदोलनकारी एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. मशाल जुलूस जिला परिषद प्रांगण से प्रारंभ होकर थाना चौक, वीर कुंवर सिंह चौक, गांधी पथ, मीर टोला होते नेताजी सुभाष चौक पर संपन्न हुआ. जुलूस के दौरान प्रतिभागियों ने यूजीसी नियमों को कॉलेज, विश्वविद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने की जोरदार मांग की. संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने, जाति, धर्म, लिंग व अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकने तथा सभी छात्रों को समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी रेगुलेशन लागू किया गया था. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर रोक लगाया जाना न्यायसंगत नहीं है व यह निर्णय चिंताजनक है. नेताओं ने कहा कि आज भी देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक व महिला विद्यार्थियों के साथ भेदभाव व उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आती रहती है. रोहित वेमुला, पायल तड़वी एवं दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों की मौत इस बात का प्रमाण है कि जातीय व सामाजिक भेदभाव एक गंभीर समस्या बनी हुई है. यूजीसी के जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच जातीय भेदभाव से संबंधित शिकायतों में लगभग 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. ऐसे में समानता से जुड़े यूजीसी के नियम भले ही पूर्ण रूप से पर्याप्त नही हों, लेकिन वे भेदभाव रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थे. संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि तत्काल प्रभाव से एक सशक्त एवं प्रभावी रोहित एक्ट लागू किया जाये एवं यूजीसी गाइडलाइंस को और अधिक सख्त एवं प्रभावी बनाया जाये. जिससे भारतीय संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के मूल्यों को वास्तविक रूप में लागू किया जा सके. मशाल जुलूस का नेतृत्व जिला परिषद उपाध्यक्ष धीरेंद्र यादव, एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक मनीष कुमार, एआईवाइएफ के शंकर कुमार, आरवाइए के राष्ट्रीय पार्षद कुंदन यादव, छात्र राजद के धीरज सम्राट, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के सनोज राम, अभाविप के कृष्णाकांत गुप्ता, छात्र लोजपा रामविलास के अमरेश पासवान, छात्र जदयू के गौरव बंटी, डीवाईएफआई के कुलानंद कुमार, युवा राजद के भारत यादव, रोहित कुमार चौधरी, आइआइपी के विद्या शर्मा ने किया. मशाल जुलूस में मो ताहिर, धनिकलाल मुखिया, विक्की राम, भीम कुमार भारती, सुशील यादव, प्रेम शंकर उर्फ प्रमोद यादव, सरोज यादव, मनोज पासवान, नसीमुद्दीन, वकील कुमार यादव, आईआईपी के पूर्व प्रवक्ता डॉ धनोज कुमार, अमित कुमार, आशीष कुमार, आइसा जिलाध्यक्ष आशीष आनंद, सागर कुमार शर्मा, सुरेंद्र यादव, सोनू यादव, रंजय शर्मा, रमेश यादव, भवेश यादव, मंशु यादव, विवेक कुमार रिंकू, ताबिश मेहर, मो मोबिन, पुनपुन यादव, दिलखुश राम, संदीप पासवान, सुशील कुमार, संतोष सरकार, रमेश साह, मो ओसामा, सुबोध कुमार यादव, कैलाश राय, अजय कुमार आजाद, माली बाबू कृष्णा, राजा यादव, पवन यादव, मो मुर्शीद सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे.

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