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बालिग व नाबालिग लड़कियों की खरीद-बिक्री ने कईयों को बना दिया अकूत संपत्ति का मालिक

Updated at : 10 Jan 2026 6:09 PM (IST)
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बालिग व नाबालिग लड़कियों की खरीद-बिक्री ने कईयों को बना दिया अकूत संपत्ति का मालिक

लड़कियों की खरीद-बिक्री ने कईयों को बना दिया अकूत संपत्ति का मालिक

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प्रभात फॉलोअप देह व्यापार से दौलत का साम्राज्य किया खड़ा, ठोस कार्रवाई अब तक नहीं मानव तस्करी, शोषण और अवैध कमाई का संगठित नेटवर्क वर्षों से है सक्रिय सहरसा . सदर थाना क्षेत्र के भारतीय नगर में वर्षों से संचालित देह व्यापार का धंधा अब केवल सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि अकूत संपत्ति खड़ी करने का संगठित कारोबार बन चुका है. बालिग और नाबालिग लड़कियों की खरीद-बिक्री कर इस काले धंधे से जुड़े कई कारोबारी आज करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन चुके हैं. हैरानी की बात यह है कि पुलिस की छापेमारी, नाबालिगों की बरामदगी और मामलों के उजागर होने के बावजूद इस नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाया जा सका है. जानकारी के अनुसार देह व्यापार का यह धंधा पूरी तरह सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा है. इसमें लड़कियों को बाहर से लाने वाले एजेंट, स्थानीय दलाल, मकान मालिक और आर्थिक लाभ उठाने वाले कारोबारी शामिल होते हैं. गरीब और कमजोर तबके की बालिग लड़कियों को रोजगार, बेहतर जिंदगी और शादी का सपना दिखाकर लाया जाता है. जबकि नाबालिगों को बहला-फुसलाकर या जबरन इस दलदल में झोंक दिया जाता है. इसके बाद उनकी खरीद-बिक्री कर मोटी रकम वसूली जाती है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस अवैध धंधे से जुड़े कुछ लोग आज आलीशान मकान, जमीन और अन्य संपत्तियों के मालिक बन चुके हैं. सवाल यह है कि इतनी बड़ी कमाई और संपत्ति के बावजूद अब तक इनके खिलाफ प्रभावी आर्थिक जांच क्यों नहीं हो सकी है. लोगों में चर्चा यह भी है कि देह व्यापार के कारोबार ने कुछ चुनिंदा लोगों को रातों-रात अमीर बना दिया, जबकि कई मासूम जिंदगियां बर्बाद हो गयी. यह सिर्फ देह व्यापार नहीं, बल्कि संगठित अपराध है सबसे गंभीर पहलू नाबालिग लड़कियों की खरीद-बिक्री कर उससे देह व्यापार कराने का है. पुलिस छापेमारी में जब-जब नाबालिग बरामद हुई है तब यह साफ हो गया कि यह धंधा मानव तस्करी में गहराई से जुड़ा हुआ है. इसके बावजूद अब तक इस नेटवर्क की पूरी श्रृंखला को तोड़ने में प्रशासन नाकाम रही है. सामाजिक संस्था व सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नाबालिगों की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि यह सिर्फ देह व्यापार नहीं, बल्कि संगठित अपराध है. वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि छापेमारी के बाद केवल निचले स्तर के दलालों और महिलाओं पर कार्रवाई होती है. जबकि असली कमाई करने वाले कारोबारी बच निकलते हैं. यही वजह है कि कुछ समय बाद वही धंधा फिर नये चेहरों के साथ शुरू हो जाता है. यदि संपत्ति की जांच और अवैध कमाई पर कार्रवाई होती तो इस कारोबार की कमर टूट सकती थी. बौनी पड़ रही मानवीय संवेदनाएं देह व्यापार का दुष्प्रभाव केवल पीड़ित लड़कियों तक सीमित नहीं है. इससे पूरे इलाके का सामाजिक माहौल खराब हो रहा है. खुलेआम जिस्म की नुमाइश, ग्राहकों की आवाजाही और असामाजिक गतिविधियों ने आम लोगों का जीना भी मुश्किल कर दिया है. महिलाओं और बच्चों के लिए यह माहौल असुरक्षित बनता जा रहा है. लेकिन कारोबारियों के अकूत कमाई के आगे मानवीय संवेदनाएं बौनी पड़ती दिख रही हैं. जबकि कभी कभी पुलिस और प्रशासन की ओर से देह व्यापार के खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस धंधे से जुड़े बड़े खिलाड़ी आज भी बेखौफ हैं. इन कारोबारियों की बेखौफी तभी दूर होगी जब इनके अवैध कमाई से बनी संपत्तियों की जांच होगी और उन दोषियों की संपत्ति जब्त की जायेगी. तभी जाकर ऐसे कारोबार पर विराम लग सकेगा. देह व्यापार के इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल छापेमारी नहीं, बल्कि आर्थिक और कानूनी दोनों स्तरों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. मानव तस्करी के मामलों में कठोर दंड, अवैध संपत्ति की जब्ती और पीड़ितों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था ही इसका स्थायी समाधान हो सकती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw

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