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राम का नाम आते ही कुछ लोगों को होती है अनावश्यक आपत्तिः डॉ आलोक रंजन

Updated at : 09 Jan 2026 6:15 PM (IST)
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राम का नाम आते ही कुछ लोगों को होती है अनावश्यक आपत्तिः डॉ आलोक रंजन

राम का नाम आते ही कुछ लोगों को होती है अनावश्यक आपत्तिः डॉ आलोक रंजन

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जी राम जी बिल श्रमिकों के लिए रोजगार व आजीविका की ठोस गारंटी सहरसा. भारतीय जनता पार्टी द्वारा भीवी जी राम जी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण योजना चलाई गयी है. इस योजना को आम जनता के बीच रखने के लिए शुक्रवार को परिसदन में प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से मुख्य वक्ता सह पूर्व मंत्री डॉ आलोक रंजन ने विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह बिल राम राज्य की भावना व महात्मा गांधी के विचारों के अनुरूप विकसित भारत की ओर निर्णायक कदम है. उन्होंने बिल को ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण, गरीबों की आजीविका की सुरक्षा तथा विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने वाला दूरदर्शी व ऐतिहासिक विधेयक बताया. उन्होंने कहा कि राम का नाम आते ही कुछ लोगों को अनावश्यक आपत्ति होती है. जबकि महात्मा गांधी स्वयं राम राज्य की परिकल्पना करते थे. रघुपति राघव राजा राम से लेकर हे राम तक गांधी जी का पूरा जीवन इसी विचार से प्रेरित था. भीवी जी राम जी बिल उसी भावना के अनुरूप हर गरीब को रोजगार, सम्मान एवं आत्मनिर्भरता देने के उद्देश्य से लाया गया है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक विशेष रूप से गरीब, जनजाति, पिछड़े वर्ग व ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार व आजीविका की ठोस गारंटी प्रदान करता है. इस योजना के तहत हर ऐसे ग्रामीण परिवार को, जो अकुशल श्रम करने को तैयार है प्रति वर्ष 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा. साथ ही वन क्षेत्रों में कार्यरत अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार देने का प्रावधान किया गया है. जिससे कृषि एवं मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई खोखली घोषणा नहीं है. बल्कि वित्तीय रूप से समर्थित गारंटी है. मनरेगा पर अब तक कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये वर्तमान सरकार के कार्यकाल में खर्च किये गये हैं. बिल में 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बजटीय प्रावधान के साथ 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि रोजगार योजनाओं के नाम को लेकर भ्रम फैलाना विपक्ष की पुरानी आदत है. 1980 से लेकर 2005 तक विभिन्न सरकारों ने रोजगार योजनाओं के नाम बदले. लेकिन आज इसपर सवाल उठाया जा रहा है. वास्तविकता यह है कि मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है. उन्होंने कहा कि कहा कि वर्ष 2005 का ग्रामीण भारत एवं 2025 का ग्रामीण भारत पूरी तरह बदल चुका है. ग्रामीण गरीबी 2011–12 में 25.7 प्रतिशत थी. जो 2023–24 में घटकर 4.86 प्रतिशत रह गयी है. कनेक्टिविटी एवं आजीविका के नये साधनों के कारण पुराने ओपन-एंडेड मॉडल को फिर से संरचित करना समय की मांग बन गयी थी. बिल में पारदर्शिता एवं तकनीक को प्राथमिकता दी गयी है. रियल टाइम डेटा अपलोड, जीपीएस आधारित निगरानी, मोबाइल मॉनिटरिंग एवं एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण होगा व सही लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि नये अधिनियम का फोकस जल संबंधी कार्य, कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर एवं खराब मौसम के कारण काम में होने वाली कमी को कम करना है. किसानों के हित में बुआई एवं कटाई के मौसम में 60 दिन कार्य स्थगन का प्रावधान किया गया है, जो मनरेगा में कभी नहीं था. नये बिल में हर सप्ताह भुगतान, मजदूरी दरों का केंद्र द्वारा निर्धारण, 15 दिन में काम नहीं मिलने पर राज्य सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि बिल गरीबों के सम्मान, ग्रामीण भारत की मजबूती और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है. भारतीय जनता पार्टी इस जनहितकारी विधेयक के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है एवं देश व राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है. मौके पर जिलाध्यक्ष साजन शर्मा, जिला महामंत्री शिव भूषण सिंह, भैरवानंद झा, जिला उपाध्यक्ष मनोज यादव, राजीव रंजन साह, मिहीर झा, रिंकी देवी, अरविंद भगत, संजू देवी, सुरजीत सिंह कुशवाहा, अभिलाष कुमार, प्रवक्ता संजीव कूमर, जिला मिडिया प्रभारी सुमित सिन्हा, संतोष गुप्ता, राज किशोर झा, शशि सोनी, विजय बसंत सहित अन्य मौजूद थे.

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