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धीरे-धीरे अवसान की ओर जा रहा श्री उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव

धीरे-धीरे अवसान की ओर जा रहा श्री उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव

तीन दिवसीय श्री उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव में भव्यता के नाम पर अब सिर्फ हो रही खानापूर्ति सहरसा . दूर्गा पूजा के अवसर पर पिछले 13 वर्षों से पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन के सहयोग से हो रहा तीन दिवसीय श्री उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव धीरे-धीरे अवसान की ओर जाता दिख रहा है. विभाग से राशि तो आवंटन होती है. लेकिन भव्यता के नाम पर अब सिर्फ खानापूर्ति ही बची है. कार्यक्रम में जो भव्यता दिखती थी, वह अब मात्र कहने को रह गयी है. स्थानीय कलाकारों सहित बाहरी कलाकारों को बुलाकर सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही है. इस वर्ष का कार्यक्रम काफी फीका रहने वाला दिख रहा है. महोत्सव के नाम पर मात्र खानापूर्ति ही रह गयी है. पहले महोत्सव के एक महीने पूर्व से ही बैठकों का दौर शुरू होता था. बैठक के माध्यम से कमेटियों का गठन किया जाता था. मीडिया प्रतिनिधियों को भी विभिन्न कमेटियों में दायित्व दिया जाता था. प्रचार प्रसार का दौर शुरू होता था. लेकिन इस वर्ष सिर्फ खानापूर्ति ही देखी जा रही है. महोत्सव के आयोजन को मात्र 25 दिन बचे हैं. सिर्फ एक बैठक अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में हुई है. जिसमें कमेटियों का तो गठन किया गया. साथ ही पूर्व की तरह दूर्गा पूजा के दूसरे दिन चार अक्तूबर से छह अक्तूबर तक महोत्सव के आयोजन की तिथि निर्धारित की गयी. लेकिन पूर्व की भांति इस बार कमेटी में प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधियों को जगह तक नहीं दी गयी. कलाकारों के चयन को लेकर भी भीतर ही भीतर शायद तैयारी चल रही हो. लेकिन अब तक निर्णय सामने नहीं आया है. इधर ना ही स्थानीय कलाकारों के चयन को लेकर कोई सुगबुगाहट दिख रही है. जबकि इस महोत्सव में कोसी प्रमंडल स्तर के कलाकारों के लिए चयन समिति द्वारा ऑडिशन के बाद चयन किया जाता रहा है. लेकिन अबतक इसकी तिथि भी निर्धारित नहीं हुई है. जिसको लेकर स्थानीय कलाकार पेशोपेश में हैं.

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Prabhat Khabar News Desk
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