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सुप्रीम कोर्ट में सहरसा एम्स अस्पताल की सुनवाई 16 को

सुप्रीम कोर्ट में सहरसा एम्स अस्पताल की सुनवाई 16 को

एम्स सहरसा आंदोलन अब निर्णायकः प्रवीण आनंद सहरसा. कोसी प्रमंडल के करोड़ों लोगों की वर्षों पुरानी आशा व संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. एम्स सहरसा की मांग से संबंधित एसएलपी की सुनवाई 16 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय में निर्धारित है. कोसी विकास संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष विनोद कुमार झा व संरक्षक प्रवीण आनंद ने बताया कि इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करने वाले न्यायाधीश सूर्यकांत अब भारत के मुख्य न्यायाधीश बन चुके हैं. ऐसे में देखने की बात होगी कि इस तारीख को सुनवाई होती है या नई तारीख मिलती है. लेकिन जनता की उम्मीद अब सिर्फ अंतिम आदेश पर टिकी है. कोसी के लोग मानते हैं कि न्याय अवश्य मिलेगा. उन्होंने कहा कि सहरसा के पक्ष में सांसद संजय झा ने राज्यसभा में एक प्रस्ताव रखा है. राज्यसभा सांसद एवं जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने केंद्र सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जैसे दिल्ली एम्स का विस्तार झज्जर में किया गया. ठीक उसी तर्ज पर दरभंगा एम्स का विस्तार सहरसा में किया जाय. यह बयान ना केवल ऐतिहासिक है. बल्कि यह सरकार को भी यह संकेत देता है कि एम्स के लिए सर्वश्रेष्ठ एवं वैज्ञानिक रूप से उपयुक्त स्थान केवल सहरसा ही है. जबि दरभंगा की ज़मीन पर एम्स असंभव है एवं रिपोर्ट की सच्चाई सामने है. ऐसे भूभाग पर विश्वस्तरीय संस्थान एम्स का निर्माण सिर्फ अव्यवहारिक नहीं, बल्कि जन-जीवन के लिए खतरनाक भी है. इसलिए हमारा तर्क और भी मजबूत होकर सामने आया है कि एम्स सहरसा ना केवल सही मांग है. बल्कि वैज्ञानिक, तकनीकी व जनहित की दृष्टि से बिल्कुल न्यायसंगत मांग है. जनता की उम्मीदें अब सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों से है. सरकार भी समझ रही है कि एम्स सहरसा अपरिहार्य है व न्यायपालिका से भी उचित, तार्किक व ऐतिहासिक निर्णय की आशा है. उन्होंने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि यह संघर्ष या तो सरकार के निर्णय से या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से अवश्य सफल होगा. सभी कोशी वासियों से भावपूर्ण अपील करते कहा कि अब समय है कि हर नागरिक अपने नवनिर्वाचित विधायक, सांसद एवं जनप्रतिनिधियों से खुले शब्दों में कहे कि एम्स सहरसा हमारी ज़िंदगी व भविष्य का सवाल है. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक संघर्ष ऐतिहासिक जीत की दहलीज़ पर पहुंच चुकी है. सहरसा ही नहीं, पूरा कोसी क्षेत्र आज एक नये युग के सामने खड़ा है. हमारी पीढ़ियों का संघर्ष, हमारे वर्षों की मेहनत हमारी आवाज़ अब इतिहास बनने जा रही है.

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