सहरसा में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में मेडिकल स्टोर ठप, जीवन रक्षक दवाओं के लिए भटकते रहे मरीज

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सहरसा में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में मेडिकल स्टोर ठप, जीवन रक्षक दवाओं के लिए भटकते रहे मरीज

बंद दवा दुकान

ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) और बड़े कॉरपोरेट घरानों के बढ़ते एकाधिकार के खिलाफ ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के देशव्यापी आह्वान पर सहरसा जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले की दवा दुकानें मंगलवार को पूरी तरह बंद रहीं. इस 24 घंटे की महाहड़ताल के कारण थोक और खुदरा दवा बाजार में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

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सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट:

बंद रहे दवा दुकानों के शटर, जीवन रक्षक दवाओं के लिए मची अफरा-तफरी

सहरसा जिले में मंगलवार को दवाइयों की अभूतपूर्व बंदी देखी गई. संघ द्वारा आपातकालीन सेवा के लिए घोषित मुट्ठी भर चिन्हित काउंटरों को छोड़ दिया जाए, तो जिले की तमाम छोटी-बड़ी दवा दुकानों के शटर पूरी तरह गिरे रहे. इसके चलते सुबह से ही अस्पतालों और क्लीनिकों के बाहर मरीजों के तीमारदार और परिजन जीवन रक्षक दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान भटकने को मजबूर दिखे. अचानक हुई इस पूर्ण बंदी के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को समय पर आवश्यक दवाइयां नहीं मिल सकीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला.

पूंजी के दम पर भारी डिस्काउंट देकर बाजार बिगाड़ रही हैं ऑनलाइन कंपनियां

दवा व्यवसायियों के इस देशव्यापी आक्रोश का मुख्य कारण इंटरनेट और मोबाइल ऐप्स के जरिए धड़ल्ले से हो रही दवाओं की ऑनलाइन होम डिलीवरी है. प्रदर्शन कर रहे दवा विक्रेताओं ने बताया कि बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां अपनी असीमित पूंजी के दम पर दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर भारी-भरकम छूट (डिस्काउंट) दे रही हैं. इस अनुचित व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण पारंपरिक खुदरा बाजार का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है. इसके चलते पीढ़ियों से पारंपरिक रूप से मेडिकल स्टोर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले छोटे दुकानदारों और खुदरा विक्रेताओं के रोजगार पर अब पूरी तरह ताला लटकने का संकट पैदा हो गया है.

बिना वैध पर्चे के नशीली दवाओं की होम डिलीवरी, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा

हड़ताल का नेतृत्व कर रहे केमिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राघव प्रसाद सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि दवा कोई सामान्य उपभोग की वस्तु नहीं है जिसे बिना किसी नियंत्रण के बेचा जाए. ऑनलाइन माध्यमों से बिना किसी डॉक्टर के वैध पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के भी गंभीर, संवेदनशील और नशीली दवाओं की होम डिलीवरी की जा रही है. युवाओं में बढ़ती नशे की लत और गलत दवाओं के सेवन का यह एक बड़ा कारण बनता जा रहा है, जो पूरे समाज और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बेहद गंभीर और खतरनाक चेतावनी है.

ई-फार्मेसी के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग, उग्र आंदोलन की चेतावनी

एसोसिएशन के अध्यक्ष राघव प्रसाद सिंह ने साफ किया कि आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखकर कुछ वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी, लेकिन आम दिनों की तरह दवाइयां मिलना पूरी तरह मुश्किल रहा. दवा व्यवसायियों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार देश में ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवाओं की सप्लाई को लेकर अविलंब बेहद सख्त नियम और कानून बनाए. व्यवसायियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के अस्तित्व की रक्षा के लिए ठोस कानूनी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में देशव्यापी स्तर पर बेमियादी और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा.

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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