सहरसा का बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर, जहां आस्था और शिवभक्ति का संगम है
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 15 Jun 2026 7:47 AM
बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर
Aaj Ka Darshan: "जहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है! जानिए सहरसा के बाबा मटेश्वर धाम की अद्भुत महिमा"
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट.
Aaj Ka Darshan: सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के काठो गांव में स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और लोकविश्वास का प्राचीन केंद्र है. वर्षों से यह मंदिर शिवभक्तों के लिए श्रद्धा का प्रमुख स्थल बना हुआ है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना को बाबा मटेश्वरनाथ अवश्य सुनते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. यही कारण है कि आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
स्वयंभू शिवलिंग से जुड़ी है मंदिर की विशेष मान्यता
स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुआ था. तभी से यहां नियमित पूजा-अर्चना का क्रम जारी है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को आध्यात्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव होता है. सुबह की आरती से लेकर शाम की पूजा तक यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.
सावन में हर-हर महादेव से गूंज उठता है पूरा इलाका
सावन महीने में बाबा मटेश्वर धाम का स्वरूप और भी भव्य हो जाता है. मुंगेर जिले के छर्रापट्टी से श्रद्धालु गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा के माध्यम से यहां पहुंचते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं. यह सिलसिला पूरे सावन माह तक चलता है. मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहता है और हजारों शिवभक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
महाशिवरात्रि पर लगता है भक्ति और संस्कृति का संगम
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इस दौरान कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और विशेष श्रृंगार के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा की पूजा संपन्न होती है. रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है.
धार्मिक पर्यटन के रूप में बढ़ रही पहचान
बाबा मटेश्वर धाम अब धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ ग्रामीण संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का भी अनुभव करते हैं. मंदिर परिसर में लगातार हो रहे विकास कार्यों और सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है.
भक्तों का विश्वास है कि बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता. सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई प्रार्थना यहां अवश्य स्वीकार होती है. यही अटूट आस्था इस प्राचीन शिवधाम को क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल करती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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