कोयला व बालू से छान कर पानी पीने को लोग मजबूर

Published at :25 Apr 2017 5:36 AM (IST)
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कोयला व बालू से छान कर पानी पीने को लोग मजबूर

विडंबना. आयरनयुक्त पानी पीने से बीमार हो रहे लोग आजादी के 70 साल पूरे होने में अब कुछ महीने ही शेष बचे हैं. प्रखंड क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पाया है. आज भी लोग कोयला व बालू से छान कर पानी पीते हैं. सोनवर्षाराज : लगभग संपूर्ण प्रखंड में पीने वाले […]

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विडंबना. आयरनयुक्त पानी पीने से बीमार हो रहे लोग

आजादी के 70 साल पूरे होने में अब कुछ महीने ही शेष बचे हैं. प्रखंड क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पाया है. आज भी लोग कोयला व बालू से छान कर पानी पीते हैं.
सोनवर्षाराज : लगभग संपूर्ण प्रखंड में पीने वाले पानी में आयरन की मात्रा निर्धारित मानक से पांच गुने अधिक है. जिसके उपयोग से लोग तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं. हास्यास्पद तो यह है कि साल भर से बंद मिनी जलापूर्ति प्लांट से ही हर घर नल जल पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.
पांच गुने आयरनयुक्त पानी के उपयोग से क्षेत्र में गैस्ट्राईिटस, अल्सर, पित्ताशय की पथरी, किडनी की बीमारी व पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों से लोग ग्रसित होते जा रहे हैं. डॉक्टर की सलाह पर बीमारी के इलाज के रूप में सक्षम लोग तो फिल्टर का उपयोग कर रहे हैं. लेकिन उनकी संख्या दो फीसदी भी नहीं है.
शेष में से कुछ गैस, अल्सर व अन्य फैलती बीमारी के रोकथाम के लिए आज भी दशकों पुराना जुगाड़ तकनीक ही अपना रहे हैं. उनके घरों में स्थायी रूप से बालू, कोयला व पत्थर से पानी को छान कर ही उपयोग किया जा रहा है. जबकि क्षेत्र के अधिकतर अत्यंत गरीब व अशिक्षित उसी पांच गुने आयरन युक्त पानी का ही उपयोग कर रहे हैं. डॉक्टर बताते हैं कि इतना अधिक आयरनयुक्त पानी मानव के लिए ही नहीं, पशु के लिए भी काफी हानिकारक है.
बंद जलापूर्ति प्लांट से जोड़ा जा रहा सीएम योजना का हर घर नल
हास्यास्पद है सरकारी प्रयास
लोगों को शुद्व पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सभी सरकारी प्रयास यहां विभागीय अनदेखी के कारण विफल साबित हुए हैं. क्षेत्र के आयरनयुक्त पानी की पूरी जानकारी होने के बावजूद प्रखंड मुख्यालय में लगभग 85 लाख रुपये की लागत से बिना लौह निस्तारक संयंत्र (आइआरपी) के ही प्लांट लगा दिया. एक प्लांट से 60 से 70 वाटर पोस्ट को जोड़ा गया था. प्रारंभिक दिनों में इन पोस्टों से क्षेत्र के लोगों को पानी तो मिल रहा था लेकिन आइआरपी नहीं होने से लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल सका. ये प्लांट भी बीते साल भर से अधिक समय से बंद व सूखे पड़े हैं.
सूखे प्लांट से घर जा रहा नल
इधर राज्य सरकार खासकर सीएम नीतीश कुमार के महत्वाकांक्षी परियोजना सात निश्चय मे शामिल ‘हर घर नल का जल’ योजना शुरू कर दी गई है. अंचल क्षेत्र के प्रत्येक पंचायत में पीएचइडी द्वारा पूर्व से स्थापित मिनी पाइप जलापूर्ति प्लांट से 50 अतिरिक्त घरों को पाइप के सहारे जोड़ा जा रहा है. वह भी इस बात की जानकारी होने के बावजूद कि पूर्व से स्थापित मिनी पाइप जलापूर्ति प्लांटों मे कई प्लांट बंद व सूखे पड़े हैं. जबकि कई बंद होने के कगार पर है.
मात्र पांच हजार गैलन एवं 60 पोस्ट की क्षमता वाले एक प्लांट से अतिरिक्त 50 घरों को जोड़ा जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि जिस प्लांट से 50 से 60 वाटर पोस्ट तक ही पानी की आपूर्ति सही ढंग से हो सकती है. उसी प्लांट से 50 अन्य घरों को जोड़ा जाना कितना उचित है. ऐसे में मुख्यमंत्री की योजना का लोगों को कोई लाभ नहीं मिल सकेगा. हां, विभाग के कागजों पर ही हर घर नल जल पहुंचा दिया जायेगा.
थाने का पानी भी है दूषित
क्षेत्र के बसनही थाना के चापाकल का पानी गिलास में रखने के साथ ही पीला पड़ने लगता है. जीभ पर डालने के साथ ही अजीब दुर्गंध व काफी खराब स्वाद आता है. उबकायी आने लगती है. जिला मुख्यालय के पीएचइडी स्थित प्रयोगशाला से पानी जांच कराने पर एक्सपर्ट ने उसमें आयरन की मात्रा 5.0 बतायी. बताया कि यह तेजी से बीमार करने वाला धीमा जहर है. जांच रिपोर्ट में बताया गया कि किसी भी परिस्थिति में यह पानी पीने, नहाने या अन्य किसी भी तरह के उपयोग के लिए योग्य नहीं है.
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