प्रतिमा को दिया जा रहा अंतिम रूप

सोनवर्षाराज : सोनवर्षा स्थित दुर्गा मंदिर में भगवती की प्रतिमा को कलाकार द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है. एक अक्तूबर को कलश स्थापना के साथ ही 11 दिवसीय दुर्गा पुजा का शुरूआत हो चुकी है. मां भगवती का आगमण घोड़े पर तथा विदाई पांव पैदल होनी है. सोनवर्षा मंदिर मे कार्यभार संभाल रहे आर्चाय […]
सोनवर्षाराज : सोनवर्षा स्थित दुर्गा मंदिर में भगवती की प्रतिमा को कलाकार द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है. एक अक्तूबर को कलश स्थापना के साथ ही 11 दिवसीय दुर्गा पुजा का शुरूआत हो चुकी है. मां भगवती का आगमण घोड़े पर तथा विदाई पांव पैदल होनी है. सोनवर्षा मंदिर मे कार्यभार संभाल रहे आर्चाय पंडित सुमन कुमार ठाकुर विस्तार से बताते है कि मां भगवती का घोड़े पर आना शासन सत्ता में परिवर्तन का सूचक है. वही पांव पैदल जाना रोग शोक में वृद्धि तथा आपसी द्वेष मे बढोतरी का संकेत माना जाता है. लेकिन भगवती की अराधना से सारा शंकट दूर किया जा सकता है.
आर्चाय श्री ठाकुर सोनवर्षा मे पूजा विधि के बारे में बताते है कि यहां देवी की पुजा तांत्रिक एवं वैदिक दोनो विधियों से कि जाती है तथा भगवती के प्रतिमा का विसर्जन लोगो के कंधो पर ही होता है. सोनवर्षा दुर्गा मंदिर में प्रतिमा निर्माण का कार्य पुस्तेनी रूप से बनमा ईटहरी प्रखंड क्षेत्र के रसलपुर गांव निवासी मुख बधीर रामसागर पोद्वार द्वारा किया जाता रहा है. इसी तरह भैंसा एवं छागर की बली कार्य पुस्तेनी रूप से स्वर्गीय किरपाली सिंह के परिवार द्वारा ही किया जाता है. पूजा के 10 दिन तक दिन में वैदिक तथा रात्रि में पूजा का विधान पुर्नत: तांत्रिक विधि से किया जाता है. वैदिक विधान में देवी को सात्वीक भोग तथा तांत्रिक विधि में निशा पूजा के रात छप्पन भोग में मछली भी चढाई जाती है. निशा पूजा के रात से ही बली प्रदान का कार्यक्रम शुरू हो जाता है जो नौवमी पूजा तक चलता है.
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