सिर्फ पैसे का खेल है एमडीएम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 May 2016 5:54 AM (IST)
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गड़बड़झाला. प्रधानाचार्यों ने प्रभार मुक्त करने के लिए डीइओ को दिया आवेदन एमडीएम में लगातार गड़बड़ी की खबरें आती हैं. लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती. दरअसल इसमें पैसे का खेल है, जो भ्रष्टाचार की जड़े मजबूत करता जा रहा है. सहरसा शहर : स्कूलों में चलने वाला मध्याह्न भोजन योजना पूरी तरह शिक्षा […]
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गड़बड़झाला. प्रधानाचार्यों ने प्रभार मुक्त करने के लिए डीइओ को दिया आवेदन
एमडीएम में लगातार गड़बड़ी की खबरें आती हैं. लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती. दरअसल इसमें पैसे का खेल है, जो भ्रष्टाचार की जड़े मजबूत करता जा रहा है.
सहरसा शहर : स्कूलों में चलने वाला मध्याह्न भोजन योजना पूरी तरह शिक्षा विभाग के लूट-खसोट का जरिया है. इसमें प्रधानाध्यापकों के अलावा बीआरपी, डीपीओ व डीइओ कार्यालय तक की मिलीभगत होती है. सभी प्रधानाध्यापकों से अधिकारियों को बंधी-बंधाई रकम पहुंच जाती है. नहीं पहुंचने पर निरीक्षण कर विभिन्न तरह से प्रताड़ित किया जाता है. अफसरों को चढ़ावा देने के लिए ही शिक्षक सारे नियम कानूनों को ताक पर रख देते हैं.
बच्चे स्कूल आयें या न आयें, उनकी उपस्थिति रोज बनती है. मीनू का पालन नहीं किया जाता है. तभी तो एमडीएम में गड़बड़ी की शिकायत को लेकर अधिकारियों को दिये जाने वाले आवेदनों का उन पर पर कोई असर नहीं होता है.
त्रस्त शिक्षकों ने कहा, कर दें प्रभारमुक्त
प्रधानाचार्यों ने कहा
बच्चे आयें या न आयें, बनानी पड़ती है हाजिरी
बीआरपी से लेकर डीपीओ तक हर माह देना होता है चढ़ावा, नहीं देने पर होते हैं प्रताड़ित
जिले के दर्जनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने डीइओ व डीपीओ (एमडीएम) को आवेदन देकर एमडीएम के प्रभार से मुक्त करने की गुहार लगायी है. हालांकि जिला शिक्षा कार्यालय ने ऐसे किसी भी विद्यालय का नाम उद्घाटित नहीं किया है. कार्यालय कर्मी ने बताया कि डीइओ अभी पटना में हैं उनके आने पर ही इन आवेदनों पर किसी तरह की कार्रवाई की जायेगी. लेकिन वैसे कई प्रधान शिक्षकों ने बताया कि वे विद्यालय में एमडीएम की व्यवस्था संभालने से लाचार हैं. खाना बनवाने और बच्चों को खिलाने के चक्कर में अध्यापन कार्य नहीं कर पाते हैं. ऊपर से हर हमेशा विभागीय अधिकारी सहित शिक्षा समिति एवं अभिभावकों की खरी-खोटी सुननी पड़ती है. शिक्षकों ने बताया कि एमडीएम अधिकारियों के लूट-खसोट की योजना है. विभाग के अधिकारियों को मासिक चढ़ावा देना ही होता है. इसलिए बच्चे विद्यालय आयें या न आयें फरजी तरीके से हाजिरी बनाना पड़ता है.
होती है कार्रवाई : डीपीओ
इस बाबत पूछे जाने पर डीपीओ स्थापना सह एमडीएम प्रभारी नंद किशोर राम ने बताया कि पैसे उगाही की कुछ शिकायत मिली है. ऐसे में संवेदक व बीआरपी की जांच की जा रही है अगर ऐसी बात सामने आयी है तो तत्काल इन पर कार्रवाई की जायेगी तथा किसी भी हाल में लूट में छूट नही दी जायेगी. उन्होंने कहा कि उनके द्वारा विद्यालयों के जांच में एमडीएम की सघनता से जांच की जाती है तथा कई विद्यालयों में फर्जी एमडीएम रजिस्टर को पकड़ा गया है तथा ऐसे प्राचार्यों पर विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा गया है.
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