धनतेरस पर हुआ 80 करोड़ का कारोबार

धनतेरस पर हुआ 80 करोड़ का कारोबार ज्वेलर्स, ऑटोमोबाइल की हुई खरीदारी प्रतिनिधि, सहरसा नगरदीपावली के पूर्व सोमवार को धनतेरस के मौके पर बाजार में गरमाहट बनी रही. चुनावी मौसम में धीमी हो चुकी बाजार की रफ्तार को ग्राहकों ने बढ़ाने का काम किया है. धनतेरस के मौके पर ज्वेलरी, ऑटो मोबाइल, गारमेंट, बरतन के […]
धनतेरस पर हुआ 80 करोड़ का कारोबार ज्वेलर्स, ऑटोमोबाइल की हुई खरीदारी प्रतिनिधि, सहरसा नगरदीपावली के पूर्व सोमवार को धनतेरस के मौके पर बाजार में गरमाहट बनी रही. चुनावी मौसम में धीमी हो चुकी बाजार की रफ्तार को ग्राहकों ने बढ़ाने का काम किया है. धनतेरस के मौके पर ज्वेलरी, ऑटो मोबाइल, गारमेंट, बरतन के कारोबारियों की बल्ले-बल्ले रही. बाजार के जानकारों की माने तो धनतेरस के मौके पर लगभग 80 करोड़ का कारोबार हुआ है. सबसे ज्यादा फायदा ज्वेलरी व ऑटोमोबाइल विक्रेताओं को हुआ है. डिस्काउंट व हॉलसेल रेट ऑफरदीपावली पर लोगों को कपड़ों की खरीदारी पर डिस्काउंट रेट व गिफ्ट देकर दुकानदारों ने अपनी और आकर्षित किया. कपड़ा पट्टी स्थित पनघट के संदीप भीमसेरिया बताते है कि ग्राहकों ने स्वेटर सहित जाड़े के कपड़ों की खरीददारी शुरू कर दी है. कपड़ा पट्टी स्थित कीलर शोरूम के मो अम्मार उर्फ छोटू कहते हैं कि डिस्काउंट नहीं उत्तम क्वालिटी पर भरोसा करते हैं.सोना नही हॉलमार्क चाहिए किसी भी परिचित ज्वेलर्स की दुकानों पर आभूषण बनवाना अब पुरानी बात हो गयी है. अब ग्राहक महानगरों की तरह छोटे शहरों में भी जुबानी गारंटी नहीं हॉलमार्क पर विश्वास करने लगे हैं. धर्मशाला रोड स्थित अलंकार ज्वेलर्स के मनोज सर्राफ बताते है कि उनके यहां बने ज्वेलरी में हॉलमार्क की गारंटी होने की वजह से ग्राहकों द्वारा धनतेरस के लिये आर्डर की बुकिंग पहले से की जा रही है. इसके अलावा चांदी के सिक्के भी विभिन्न प्रकार के उपलब्ध है. वही अलंकार के रवि सर्राफ कहते है कि इस बार चांदी के सिक्कों से ज्यादा चांदी के बिस्किट की मांग है. मालूम हो कि वजन के अनुसार 350 रुपया से लेकर 1300 रुपया तक के सिक्के बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. सिक्के का आदान-प्रदान लोग एक दूसरे को गिफ्ट देने के लिये भी करते है.खूब बिके बरतन धनतेरस का सही अर्थ बरतन की खरीददारी से है. इस दीपावली बरतन की दुकानों पर अप्रत्याशित भीड़ दिखी. पूरे बाजार पसरौटा की सजी दुकान पर लोगों ने अपनी पसंद और जरूरत के सामान की जमकर खरीदारी की. यहां चम्मच से लेकर टिफिन और कराही से लेकर पतीले तक की जम कर बिक्री हुई. बटराहा के खरीदार ललित नाथ झा ने बताया कि धनतेरस का सही अर्थ बरतन या द्रव्य खरीदने से ही है. आधुनिक युग में लोग इलेक्ट्रॉनिक्स अथवा अन्य सामान की ओर लगाव बना रहे हैं. लेकिन बदल रही मानसिकता लोगों को फिर इस ओर लौटा रही है.चांदी के सिक्कों की है डिमांडमार्का से ज्यादा दुकानदार पर भरोसा करोड़ से ज्यादा है धनतेरस का कारोबारपांच ग्राम से सौ ग्राम तक का सिक्का बाजार में है उपलब्धसहरसा नगर. धनतेरस का रस्म यानी समृद्धि का आह्वान होता है, जिसके लिये धर्म शास्त्रों में वर्णित है कि अमुक तिथि एवं समय पर स्वर्ण, चांदी जैसे अमूल्य चीजों की खरीद करने की परंपरा. इसके पीछे लोगों की धारणा होती है कि धनतेरस पर सोने चांदी खरीदने से धन धान्य की वृद्धि होती है. स्थानीय ज्वेलर्सों के अनुसार दस साल पूर्व तक दीपावली से पहले सोना व उससे बने आभूषणों की खरीद के लिये बाजार में ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ होती थी, लेकिन इन दिनों सोने की बढ़ती कीमत की वजह से चांदी के सिक्के खरीद कर लोग परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं. सर्राफा विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार मंहगाई की समस्या होने के बावजूद धनतेरस का कारोबार करोड़ के पार कर गया. उनके अनुसार जिले भर में ज्वेलरी की लगभग 150 दुकानें है, जहां एक करोड़ रुपये तक के चांदी के सिक्के तो चालीस लाख तक के गोल्ड एवं बीस लाख तक के डायमंड सेट की बिक्री हुई.मार्का नही विश्वास जरूरीभारत सरकार द्वारा सर्राफा बाजार में किये जाने वाले गोरखधंधे को देखते हुए ग्राहकों के हित में जहां प्रमाणित मार्का का चलन शुरू किया गया. वही स्थानीय लोग अब भी मार्का नही ग्राहक व दुकानदार के विश्वास को अहमियत देते है. ज्वेलर्स बताते हैं कि मार्का होने के बाबजूद ग्राहक हमारे विश्वास पर ही समान की खरीद करते हैं. इसके पीछे की वजह बताते हैं कि आज जो ग्राहक हमारे दुकान पर खरीदारी के लिये आते हैं उनसे पहले उनके परिवार के अन्य सदस्य भी यहीं आते थे. धनतेरस के अवसर पर सोने व चांदी जैसे द्रव्यों की बिक्री लगभग पांच करोड़ के पार रही.वाहन की हुई खरीदारीजिला मुख्यालय स्थित सभी बाइक कंपनी के शो रूम में इन दिनों बाइकर्स को आकर्षित करने की होड़ मची रही.पेराडाइज बजाज के अमित कुमार बताते है कि पूर्व की अपेक्षा बिक्री ज्यादा रही. पेराडाइज बजाज के अमित कुमार कहते है कि पेट्रोल की बढती दर व मंहगाई ने लोगों को अपनी च्वाइस से समझौता करने के लिये बाध्य जरूर कर दिया था. लेकिन धनतेरस पर बाइक की बिक्री संतोषजनक रहीं. पियाजो डीलर व मां तारा ऑटोमोबाइल के गौतम तिवारी व राजीव तिवारी कहते है कि व्यवसायिक वाहनों की तरफ भी लोगों का रूझान रहा. लोगों ने ऑटो की खरीद को प्राथमिकता दिया. बलुआहा स्थित सब डीलर अमित चौधरी कहते है कि धनतेरस में पियाजों ग्राहकों की पहली पसंद बनी है. सुबह से दिखने लगा लोगों में उत्साहबरतन की दुकानों पर उमड़ी अप्रत्याशित भीड़सहरसा सिटी सोमवार की सुबह ग्यारह बजते-बजते बाजार की चहल-पहल बढने लगी. अन्य दिनों की अपेक्षा धनतेरस को लेकर दुकान समय से पूर्व खुल व सज गये थे. महिला-पुरुष सहित किशोरवय बच्चे परिवार के साथ बरतन व ज्वेलरी दुकान की शोभा बनने लगे. दिन के दो बजते-बजते शहर पूरी तरह जाम की चपेट मे आ गया. लोगों को न तो आगे बढ़ने की जगह मिल रही थी और न ही वे वापस ही हो पा रहे थे. परेशान आम आदमी सहित ग्राहक प्रशासन को कोसते नजर आये. लोगों ने सरकते हुए बरतन सहित सोना-चांदी की दुकान के और रुख करने लगे. जहां ग्राहकों ने बरतन के विभिन्न प्रकारों एवं हीरा, सोना, चांदी से बनी सामग्री खरीद धनतेरस की परंपरा को पूरा किया. बरतन की दुकानों में बाल्टी सेट, बरतन स्टैंड, राशन डिब्बा सहित कुकर व पतीलो की खूब बिक्री हुई. यहां दुकानदारों ने ग्राहकों की जेब से लाखों रुपये निकालने में सफल रहे. वही आभूषण की दुकान में मंहगाई के बाद भी सोने व चांदी ने बाजी मार ली. सहरसा जैसे विकासशील शहर में भी हीरों की परख व खरीदारी करने वालों की फे हरिस्त काफी लंबी है इसका पता धनतेरस के दिन जौहरी के यहां लगी लंबी भीड़ बता रही थी. इसके अलावा चांदी के सिक्के, नोट व अन्य सामान की बिक्री भी परवान पर रही. धर्मशाला रोड, स्टेशन रोड, बनगांव रोड स्थित ढाई दर्जन से अधिक ज्वेलरी के शो रूम से लाखों रुपये के हीरे, एक करोड़ के स्वर्ण आभूषण एवं लाखों रुपये के चांदी के सामानों की बिक्री रही. इन दुकानों पर हीरे व सोने के इयर रिंग व नोज पिन की सबसे ज्यादा बिक्री हुई. धनतेरस के बाजार पर मंहगाई का असर नही दिख रहा था, लोग जमकर खरीददारी कर रहे थे. अपने जरूरतों को पूरा करने में लोगों की भीड़ इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर भी देर रात तक जमी रही. जहां एलइडी, एलसीडी सहित फ्रिज व वाशिंग मशीनों को ठेला पर लाद लोग घर की ओर जाते दिखे इसके अलावे 3जी,4जी सहित स्टाइलिश मोबाइलों की बिक्री भी आंशिक रूप से हुई. दिन भर सड़क पर रेंगते रहे वाहन रविवार को चुनाव का मतगणना समाप्त होते ही सोमवार को धनतेरस के मौके पर लोगो की भीड़ सुबह से ही सड़को पर उमड़ पड़ी. शहर का सभी मुख्य मार्ग वाहनों के काफिले से लोग उतरने लगे. 11 बजे के बाद शहर के सभी सड़कों पर वाहन रेंगने लगे. यातायात व्यवस्था में अन्य दिनों की तरह लगाये गये जवान जाम के सामने बेबस नजर आये. लगभग दो बजे पुलिस लाइन से 21 रंगरूटों को शहर के सभी मुख्य चौक-चौराहों पर तैनात किया गया. उसके बाद भी जाम टस से मस होने का नाम नही ले रहा था. लोगो की सूचना पर खुद सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह व यातायात प्रभारी नागेंद्र राम पुलिस बलों के साथ थाना चौक से शंकर चौक तक मोर्चा संभाला. जिसके बाद लोग कुछ देर के लिये राहत की सांस ली. थानाध्यक्ष के हटते ही पुन: सड़को पर वाहनो का रेंगना शुरू हो गया. अमूमन शहर के महावीर चौक, रिफ्यूजी चौक, चांदनी चौक, स्टेशन रोड, दहलान चौक, कपड़ा पट्टी, शंकर चौक, डीबी रोड, थाना चौक, गंगजला चौक, नगरपालिका चौक सहित अन्य सड़कों पर संबह से ही वाहनों का रेंगना शुरू हो गया था. फोटो- धनतेरस 2- दहलान चौक पर बरतन खरीदती महिला फोटो- धनतेरस 3- ज्वेलरी की दुकान में खरीदारी करते लोगफोटो- धनतेरस 4- बरतन की खरीदारी करते लोगफोटो- धनतेरस 5- धनतेरस को लेकर शंकर चौक पर लगा जामफोटो- धनतेरस 6- बाजार में जाम लगने के बाद पहुंचे जवान
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