सड़क जाम कर की राहत की मांग

Published at :17 Oct 2013 12:34 AM (IST)
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सड़क जाम कर की राहत की मांग

सरसी: भारी बारिश एवं तेज हवा के कारण सरसी पंचायत समेत पारसमनी, चंपावती, चिकनी आदि पंचायतों में भी भारी क्षति हुई है. सैकड़ों फूस के घर धराशायी हो गये. खेती में भारी नुकसान हुआ है. विशेष कर आलू तथा धान की फसल को हुए भारी नुकसान के कारण किसानों के बीच मायूसी है. भारी बारिश […]

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सरसी: भारी बारिश एवं तेज हवा के कारण सरसी पंचायत समेत पारसमनी, चंपावती, चिकनी आदि पंचायतों में भी भारी क्षति हुई है. सैकड़ों फूस के घर धराशायी हो गये. खेती में भारी नुकसान हुआ है. विशेष कर आलू तथा धान की फसल को हुए भारी नुकसान के कारण किसानों के बीच मायूसी है. भारी बारिश के कारण स्थानीय छोटी नदियां उफान पर है. जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. कई गांवों में अब तक लोग पानी में फंसे हुए हैं. सरसी पंचायत के वार्ड नं 8,5,10,9,11,7, सरसी मिलिक, वर्मा कॉलोनी, मुस्लिम टोला, कनुनमा रहिका टोला, गोरहीटोला बेला, सिहुली, सरसी गौठ विशेष प्रभावित हैं. सरसी पंचायत के मुखिया बिंदेश्वरी पासवान ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में तकरीबन 100 से अधिक फूस के घर गिर गये हैं तथा पंचायत क्षेत्र में एक हजार एकड़ की भूमि पर लगी आलू की फसल, करीब 700 एकड़ धान की फसल तथा करीब 50 एकड़ केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि कनुनमा रहिका टोला का सड़क संपर्क पूरी तरह भंग है. तकरीबन 300 लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं. किसान राजेंद्र मेहता, प्रमोद मेहता, सुरेश मेहता, विद्यानंद मेहता, शिवानंद मेहता, सदानंद मेहता, सुरेश मेहता, रेशमलाल मेहता, अनमोल मेहता, अभिषेक कुमार सिंह, अनिल सिंह, जगजीवन सिंह, रविशंकर सिंह, संजीव कुमार सिंह, राजेश सिंह, दिलीप कुमार सिंह, मधुकर सिंह, कमला पंडित, सुधीर सिंह, गोराम सिंह, विकास सिंह, चंद्र शेखर मेहता, अमरेंद्र मेहता, विकास मेहता, अजय यादव आदि किसानों ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व ही खेत में आलू का बीज डाला था जो भारी बारिश के कारण गल गया. किसान राजेंद्र मेहता ने बताया कि 1800-2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पंजाब, जलंधर, लुधियाना आदि जगहों से आलू का बीज मंगवाया था तथा खेती के लिए 12 क्विंटल प्रति एकड़ आलू का बीज, सात हजार रुपया प्रति एकड़ खाद तथा चार हजार रुपये प्रति एकड़ खेत आलू की खेती के लिए खर्च पड़ता है. जो आपदा में बर्बाद हो गया. किसान प्रमोद मेहता, सुरेश मेहता, रेशमलाल मेहता सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि लीज पर खेत ले कर वे लोग खेती किया करते हैं. घर का जेवर आदि बंधक रख कर खेती किये थे परंतु सारा कुछ नष्ट हो गया. किसानों ने बताया कि पुन: खेती के लिए हमलोगों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है. सारी पूंजी खेती में लगा दी थी. किसान देवचरण मेहता ने बताया कि 20 एकड़ की जमीन पर सात लाख रुपये का सिर्फ बीज डाल कर आलू की खेती की थी परंतु पौधा निकलने से पूर्व ही सब कुछ बारिश में डूब गया. आपदा में हुए क्षति के कारण किसान देवचरण मेहता का बुरा हाल है. वे बार बार अपने खेतों को देख फफक कर रो पड़ते हैं. क्षेत्र में ऐसे कई किसान है जिनका भारी नुकसान हुआ है. ज्ञात हो कि पंचायत स्तर पर फिलहाल सरकारी कर्मियों द्वारा क्षति का आकलन किया जा रहा है. पंचायत क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने सरकार से आपदा में हुए क्षति की पूर्ति की मांग की है.

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