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कारगिल में शहीद हो अमर हो गये 20 वर्षीय रमण झा

अमर कुमार चौधरी, सहरसा : 1999 में पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध करने व दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में सहरसा भी अपनी भागीदारी पर गर्व करता है. हालांकि कारगिल में हुए युद्ध में सहरसा ने अपना एक बेटा गंवा दिया, लेकिन उसकी शहादत पर आंखें नम नहीं होती, गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है. बनगांव […]

अमर कुमार चौधरी, सहरसा : 1999 में पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध करने व दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में सहरसा भी अपनी भागीदारी पर गर्व करता है. हालांकि कारगिल में हुए युद्ध में सहरसा ने अपना एक बेटा गंवा दिया, लेकिन उसकी शहादत पर आंखें नम नहीं होती, गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है.

बनगांव के फूल झा व उमा देवी देश की बलिवेदी पर अपने पुत्र को समर्पित कर धन्य हो गये. उन्हें यह पता नहीं था कि उनके छोटा पुत्र रमण कुमार झा ने देश की सेवा के लिए ही जन्म लिया है. रमण की शहादत पर आज सिर्फ उनका परिवार और गांव ही नहीं, बल्कि पूरा जिला गर्व महसूस करता है.
कारगिल के बटालिक सेक्टर में लगी गोली: रमण झा का जन्म पांच मार्च 1979 में हुआ था. 19वें वर्ष साल 1998 में सेना के 14 सिख रेजीमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए और एक साल बाद ही पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध की रणभेरी बज गयी.
रमण को भी युद्धभूमि में जाने व देश की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने का सौभाग्य मिल गया. एक जुलाई 1999 की तारीख थी. कारगिल बटालिक सेक्टर में पाकिस्तान की सेना के विरुद्ध जंग छिड़ गयी.
दोनों ओर से गोलियां बरसायी जाने लगी. रेजीमेंट के अन्य साथियों के साथ रमण भी लंबे समय तक मुंहतोड़ जबाव देते रहे. अंत में दुश्मन की ओर से आयी एक गोली ने रमण कुमार झा को अपना निशाना बना लिया. सिख रेजीमेंट के दो अन्य साथियों के साथ रमण भी वहीं शहीद हो गये. रमण के शहादत की खबर चार दिनों बाद उसके गांव आयी.
जबकि कारगिल से 12 किलोमीटर दूर धनसाल सेक्टर में 16 सिख रेजीमेंट में क्लर्क के पद पर तैनात रमण के भाई सुमन कुमार झा को पांचवें दिन टेलीग्राम से रमण के शहादत की खबर मिली. सम्मान के साथ रमण का शव बनगांव पहुंचा और राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार हुआ. अंतिम संस्कार में जिले के तमाम वरीय नेता व अधिकारी शामिल हुए.
जबकि कुछ दिनों के बाद ही तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद बनगांव पहुंचे व रमण की शहादत को नमन किया. केंद्र सरकार ने शहीद के परिवार को 25 लाख रुपये की सहायता राशि के अलावे एक गैस एजेंसी और दिल्ली में एक मकान दिया, जबकि बिहार सरकार ने दस लाख रुपये की सहायता राशि के अलावे रमण झा के बड़े भाई पवन कुमार झा को शिक्षक की नौकरी दी. आज रमण झा की स्मृति में शहर में गैस एजेंसी, गांव में एक पब्लिक स्कूल व गांव के मैदान में ही एक स्मारक है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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