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पति की मौत का नहीं था गम, एक जेल में रहने की बात सुन भरी जेल जाने की हामी

25 Mar, 2019 6:30 am
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पति की मौत का नहीं था गम, एक जेल में रहने की बात सुन भरी जेल जाने की हामी

सहरसा : शादी के समय अग्नि के समक्ष पूरी जिंदगी साथ निभाने के लिए सात वचन भी अब कमजोर पड़ने लगा है. रिश्तों की डोर कमजोर हो गयी है. स्थिति यह है कि छह वर्ष पूर्व शादी के समय अग्नि का फेरा लेने के बाद उसकी हत्या का साजिश भी पत्नी ही रच रही है. […]

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सहरसा : शादी के समय अग्नि के समक्ष पूरी जिंदगी साथ निभाने के लिए सात वचन भी अब कमजोर पड़ने लगा है. रिश्तों की डोर कमजोर हो गयी है. स्थिति यह है कि छह वर्ष पूर्व शादी के समय अग्नि का फेरा लेने के बाद उसकी हत्या का साजिश भी पत्नी ही रच रही है. ताजा मामला दंत चिकित्सक किशोर कुमार भाष्कर से जुड़ा है. शादी के बाद सबकुछ ठीक चल रहा था.

उसी दौरान चिकित्सक के फुफुरे भाई बमबम व चिकित्सक की पत्नी नेहा के बीच बढ़ी नजदीकियों ने उसे मौत की नींद सुला दी. इतना ही नहीं पति की हत्या की जानकारी होने के बाद भी नेहा अनजान बनी रही, लेकिन पुलिसिया साक्ष्य के सामने नेहा अपनी करतूतों पर पर्दा नहीं डाल पायी. साक्ष्य के सामने नेहा को अपनी करतूतों को स्वीकार करना पड़ा. जिसकी जानकारी आग की तरह शहर में फैल गयी.

लोग रिश्ते को कलंकित करने की बात कह विश्वास की डोर कमजोर बताने लगे. लोगों ने कहा कि पुरुष शादी के बाद अपने सुख-दुख की जानकारी पत्नी को देते हैं. लेकिन इस घटना ने सोचने का मजबूर कर दिया है.
दिन में चार से पांच घंटे होती थी बात : कांड के अनुसंधान में यह बात सामने आयी है कि नेहा व बमबम एक दूसरे से दिन में चार से पांच घंटे बात करते थे. इससे स्पष्ट होता है कि डॉक्टर के क्लिनिक पर जाने व जब भी मौका मिलता था दोनों एक-दूसरे से फोन पर कनेक्ट हो जाते थे.
किसी महिला को ग्यारह माह का बच्चा हो ओर वह इतनी देर तक अपने प्रेमी से बात कर रही हो तो सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितना समय अपने बच्चों को और कितना समय अपने परिवार को दे पाती होगी. ऐसे में रिश्ते व विश्वास की डोर कमजोर होना लाजिमी है.
साक्ष्य के अभाव में पांच दिन बची रही नेहा : घटना के कुछ देर बाद से ही पुलिस को घटना में अपनों का हाथ होने की बात पता चल गयी थी. लेकिन पुलिस अपनों पर बिना साक्ष्य के हाथ डालने से परहेज कर रही थी.
घटना के दिन मानवता के नाते, दूसरे दिन अंतिम संस्कार व तीसरे दिन नेहा को स्लाइन चढ़ने के कारण पुलिस उसे हिरासत में नहीं ले रही थी. इसके बाद चौथे दिन पुलिस उससे ससुराल में ही पूछताछ की, लेकिन वह अपने करतूतों पर पर्दा डालती रही. शनिवार को साक्ष्य इकट्ठा होते ही पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास शुरू कर दिया.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नेहा व बमबम को घरवालों के समक्ष ही सच्चाई बताना पड़ा. पुलिसिया साक्ष्य के सामने वह अपनी करतूतों पर पर्दा नहीं डाल पायी. इसमें मृतक के परिजनों को भी पुलिस को समझाना पड़ा. जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर सदर थाना लाया गया. यहां भी नेहा ने एक ही जेल में रहने की बात पर जेल जाने की हामी भरी. सच को स्वीकारा.
क्या था मामला
मालूम हो कि संतनगर निवासी दंत चिकित्सक डॉ किशोर कुमार भाष्कर जो गंगजला चौक पर क्लिनिक चलाता था. अपनी कार से बीते 19 मार्च को ससुराल कटिहार जाने के लिए निकला. शाम लगभग चार बजे उसका शव कार में बैजनाथपट्टी के समीप मिला. जिसके बाद आइएमए का शिष्टमंडल पुलिस अधीक्षक से मिल कर अविलंब हत्यारे को गिरफ्तार करने की मांग की.
एसपी ने 48 घंटे का समय लिया. शिष्टमंडल ने 48 घंटे का समय देकर कहा कि समय सीमा में गिरफ्तारी नहीं होने पर चिकित्सक हड़ताल पर चले जायेंगे. जिसके बाद चिकित्सक हड़ताल पर चले गये. निजी नर्सिंग होम का ओपीडी, आकस्मिक सेवा व सदर अस्पताल का ओपीडी ठप हो गया.
हत्या के दिन सुबह से ही रख रहा था नजर
योजना में नेहा की सहमति व बमबम के पुराने दोस्त के तैयार हो जाने के बाद 19 मार्च का दिन तय किया गया. योजना के तहत बमबम 19 मार्च की सुबह अपने गांव मधेपुरा जिला के रेसना ग्वालपाड़ा से सहरसा के लिए विदा हुआ. वह सीधे गंगजला चौक पहुंचा. जहां कोसमो केयर क्लिनिक में चिकित्सक मौजूद था.
बमबम व उसका सहयोगी बाइक से डॉक्टर पर नजर रख रहा था. लगभग 12 बजे डॉक्टर क्लिनिक से अपने घर के लिए निकला. बाइक से दोनों ने उसका पीछा शुरू किया. लगभग दो बजकर 17 मिनट पर डॉक्टर कार से अपने घर से कटिहार के लिए निकला. बमबम घर से कुछ दूरी पर खड़ा था.
डॉक्टर की कार आते ही उसने उसे रोका और पूछा कि कहां जा रहे हैं. डॉक्टर द्वारा कटिहार जाने की बात कहने पर उसे भी उधर जाने की बात कह कार में बैठ गया. योजना के अनुसार बमबम का सहयोगी घटनास्थल से लगभग चार सौ मीटर पहले बाइक छोड़ कर खड़ा था.
उसके पास पहुंचने पर बमबम ने डॉक्टर को उसके दोस्त के भी उधर ही जाने की बात कह कार रोकवा कर उसे भी बैठा लिया. सौ मीटर आगे जाने पर रास्ता खराब होने की बात कह डॉक्टर को दूसरे रास्ते से ले जाने की बात कह बैजनाथपट्टी की तरफ कार को मोड़वा दिया.
जहां पुल के समीप बमबम का सहयोगी गोली चलाने का प्रयास किया, लेकिन गोली नहीं चली. एक गोली जो सीट में लगी तो उनलोगों को विश्वास नहीं हुआ कि गोली लग गयी है. जिसके बाद आगे की सीट पर बैठे बमबम ने उससे पिस्तौल लेकर उसके कनपट्टी के समीप गोली मार दी. गोली लगने के बाद दोनों कार से उतर कर बाइक पर सवार होकर विदा हो गया.
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