मोहर्रम पर सहरसा में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, हिंदू-मुस्लिम एकता की बनी मिसाल

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सहरसा - रणक्षेत्र ले जाते तजिया

Saharsa Muharram: सहरसा में मोहर्रम पर्व शांतिपूर्ण और आपसी भाईचारे के साथ संपन्न हुआ. ताजिया मिलान, मेले और पारंपरिक करतबों ने लोगों का ध्यान खींचा. प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा.

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सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Saharsa Muharram: शनिवार को सहरसा की गलियां अलग ही रंग में नजर आईं. कहीं ताजिया के साथ निकलते जुलूस थे, तो कहीं ढोल-ताशों की धुन पर जंगी करतब दिखा रहे थे. इमामबाड़ों के आसपास मेले जैसा माहौल था. बच्चे, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में मौजूद थे. लेकिन इस पूरे आयोजन के बीच सबसे खास बात रही आपसी भाईचारे और शांति का संदेश.

जिले में मोहर्रम पर्व जिला प्रशासन की सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. शहरी क्षेत्र से लेकर विभिन्न रणक्षेत्रों तक प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहा. हर संवेदनशील स्थल पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई थी.

आखिर ऐसा क्या हुआ?

जिला प्रशासन की गाइडलाइन के अनुरूप जिले के निर्धारित स्थानों पर मोहर्रम मनाया गया. जिला मुख्यालय के विभिन्न इमामबाड़ों में ताजिया पहुंचने के बाद मेले जैसा माहौल देखने को मिला. श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी.

सहरसा बस्ती, मीर टोला, गांधी पथ इमामबाड़ा और अन्य क्षेत्रों में ताजिया मिलान का आयोजन किया गया. इस दौरान युवाओं ने पारंपरिक लाठी, तलवार और फरसा के आकर्षक करतब दिखाकर लोगों का ध्यान खींचा.

क्यों खास रहा इस बार का मोहर्रम?

मीर टोला के इम्तियाज आलम, सहरसा बस्ती के मो. मंसूर आलम और वार्ड पार्षद प्रतिनिधि अकबर हुसैन ने बताया कि इस वर्ष इमामबाड़ों में विशेष रौनक देखने को मिली. बड़ी संख्या में लोगों ने मोहर्रम जुलूस में हिस्सा लिया.

उन्होंने कहा कि मोहर्रम सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का भी प्रतीक है. यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जो गंगा-जमुनी संस्कृति की खूबसूरत मिसाल है.

प्रशासन क्यों रहा पूरी तरह अलर्ट?

पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार निगरानी करता रहा. सदर एसडीओ श्रीयांश तिवारी और सदर एसडीपीओ आलोक कुमार के नेतृत्व में सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार सहित पुलिस पदाधिकारी दिनभर विभिन्न क्षेत्रों का जायजा लेते रहे.

प्रशासनिक अधिकारियों ने सहरसा बस्ती, मीर टोला सहित विभिन्न रणक्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थानीय लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से पर्व मनाने की अपील की.

कहां-कहां हुआ ताजिया मिलान?

बस्ती रणक्षेत्र में बस्ती, झपड़ा टोला, कॉलेज गेट और फकीर टोला से ताजिया पहुंचा. वहीं मीर टोला में अलीनगर से ताजिया लाया गया. मछली मार्केट, ननसी टोला और सराही से आए ताजियों का गांधी पथ इमामबाड़ा के पास मिलन कराया गया.

इसके बाद सभी ताजियों को रणक्षेत्र ले जाया गया, जहां पारंपरिक विधि-विधान के साथ ताजिया मिलान संपन्न हुआ.

Saharsa Muharram: मोहर्रम क्यों है महत्वपूर्ण?

इस्लामी परंपरा के अनुसार मोहर्रम गम और कुर्बानी का पर्व है. यह कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हसन और इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है. इस अवसर पर ताजिया बनाकर उनकी कुर्बानी को याद किया जाता है.

सहरसा में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ मोहर्रम एक बार फिर यह संदेश दे गया कि धार्मिक आस्था के साथ आपसी सद्भाव और भाईचारा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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