शराबबंदी की हवा निकालने में जुटे हैं तस्कर चोरी-छुपे मंगा रहे बड़ी खेप, छलकेगा जाम

Updated at : 27 Feb 2018 6:12 AM (IST)
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शराबबंदी की हवा निकालने में जुटे हैं तस्कर चोरी-छुपे मंगा रहे बड़ी खेप, छलकेगा जाम

होली में शराब की आपूर्ति के लिए तस्कर सक्रिय सहरसा : रंगों और खुशियों का पर्व होली में अब तीन दिन ही शेष बचे हैं. ऐसे में शराब के कद्रदान की प्यास बुझाने और मुनाफाखोरी के धंधे को चमकाने के लिए शराब के तस्कर भी सक्रिय हो गये हैं. वे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड व […]

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होली में शराब की आपूर्ति के लिए तस्कर सक्रिय

सहरसा : रंगों और खुशियों का पर्व होली में अब तीन दिन ही शेष बचे हैं. ऐसे में शराब के कद्रदान की प्यास बुझाने और मुनाफाखोरी के धंधे को चमकाने के लिए शराब के तस्कर भी सक्रिय हो गये हैं. वे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड व पश्चिम बंगाल जैसे बाहरी राज्यों से चोरी-छिपे करोड़ों की शराब की खेप मंगा कर रकम दोगुनी करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं. शराबबंदी लागू होने की वजह से तस्करों के लिए शराब मुनाफे का कारोबार बन चुका है. हालांकि, होली पर्व को देखते हुए शराब तस्करों से निबटने के लिए पुलिस ने भी पूरी चाक-चौबंद व्यवस्था की है, लेकिन तस्करी के कारोबार में उतरे लोग चौकसी को धता बता धड़ल्ले से अपने धंधे को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं. छोटे तस्कर शराब की खेप स्टोर कर रहे हैं, तो बड़े माफिया ट्रकों के जरिये बॉर्डर पार कराने की फिराक में हैं.
ऐसे चल रहा मुनाफे का खेल: सूत्रों की मानें तो एक बोतल शराब मंगाने पर सभी खर्च जोड़ कर औसतन 600 रुपये की लागत आ रही है. यही माल सेल्समैन के माध्यम से बाजार में 1200 रुपये में बिक रहा है. झारखंड की शराब तो 1400 रुपये तक में बिक रही है.
शहरी क्षेत्रों में भी उतर रही शराब: सूत्रों की मानें तो तस्कर तय ग्राहकों से होली में शराब परोसने के लिए एडवांस में रकम ले चुके हैं, तो बड़े शराब माफिया छोटे तस्करों की मांग पर पूरी खेप उतारने में जुटे हैं. सूत्रों की मानें तो किश्तों में शराब जिले में पहुंच रही है. शहरी क्षेत्र के आसपास सदर थाना क्षेत्र, सोनवर्षा कचहरी, बैजनाथपुर, सत्तरकटैया, कहरा आदि इलाकों में शराब तस्कर ज्यादा सक्रिय हैं. जबकि ट्रेन से शराब सिमरी बख्तियारपुर में पहुंच रही है. वहां से छोटे वाहनों के माध्यम से तस्करी हो रही है.
असली के दाम पर बिक रही नकली शराब: शराबबंदी के बाद नकली शराब के तस्कर भी बाजार में सक्रिय हो गये हैं. मिली जानकारी के अनुसार पुराने पियक्कड़ तो नकली शराब पीते ही पकड़ लेते है. जबकि नये शौकीन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है. इस प्रकार के शराब असली के कीमत पर ही खपाये जा रहे हैं, जबकि इनकी लागत मूल्य सत्तर प्रतिशत तक कम रहती है.
जब्त भी हो रही है शराब: इधर गांव-गांव में शराब पहुंचाने वाले तस्कर पुलिस की गिरफ्त में भी आ रहे हैं. रविवार को महिषी व सत्तरकटैया पुलिस ने शराब की बड़ी खेप बरामद की है. हालांकि शराबबंदी के बाद से शराब जब्त करने का खेल लगातार जारी है. इसके बावजूद तस्करी में कोई कमी नहीं हो रही है. ग्रामीणों की शिकायत है कि गांव-गांव में शराब डिलिवरी करने वाले सक्रिय हैं. ज्ञात हो कि शराब के इस अवैध धंधे में बड़े-बड़े व्यवसायी की संलिप्तता की बात भी लोग दबी जुबान से कह रहे हैं.
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