सर्जिकल आइटम के बाजार पर अब जरूरत है सर्जिकल अटैक की

Updated at : 31 Oct 2017 5:10 AM (IST)
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सर्जिकल आइटम के बाजार पर अब जरूरत है सर्जिकल अटैक की

मरीज हुए कंगाल. खुदरा दुकानदार जम कर कमा रहे मुनाफा सर्जिकल आइटम पर मूल्य अनाप-शनाप लिखा रहता है. खुदरा दुकानदार इस पर कोई छूट नहीं देते. ऐसे में मरीज के परिजनों को भारी परेशानी होती है. सरकार को एमआरपी पर कंट्रोल करने की जरूरत है. सहरसा : किसी भी वस्तु को बाजार में बेच डबल […]

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मरीज हुए कंगाल. खुदरा दुकानदार जम कर कमा रहे मुनाफा

सर्जिकल आइटम पर मूल्य अनाप-शनाप लिखा रहता है. खुदरा दुकानदार इस पर कोई छूट नहीं देते. ऐसे में मरीज के परिजनों को भारी परेशानी होती है. सरकार को एमआरपी पर कंट्रोल करने की जरूरत है.
सहरसा : किसी भी वस्तु को बाजार में बेच डबल मुनाफा कमाते व्यवसाय के बारे में आमलोगों को भी जानकारी होती है. लेकिन ऐसे किसी व्यवसाय के बारे में आपको जानकारी है कि जिसमें दो सौ गुणा से अधिक फायदा होता है. आपको यह बातें जरूर अटपटी लगेगी, लेकिन मेडिकल बाजार के अंदर बिकने वाले सर्जिकल आइटम की यह सच्चाई है. सर्जिकल आइटम बेचनेवाले दुकानदार खुलेआम इस मुनाफे के खेल को खेल रहे हैं और इसका खामियाजा भुगतने पर मजबूर है बेचारी आम जनता.
दिलचस्प यह है कि मुनाफे के इस खेल में अस्पताल भी साझेदार हैं. जबकि शासन, प्रशासन इस मामले से अनजान बनी हुई है. इस मुनाफे के खेल पर रोक लगाकर सस्ता इलाज मुहैया कराने के सरकारी एजेंडे को पूरा किया जा सकता है. दूसरी तरफ इन दवाई कंपनी के प्रतिनिधि बाजार में अपने प्रोडक्ट को कायम रखने के लिए नियमित नर्सिंग होम व दवाई विक्रेताओं के संपर्क में रहते है.
एमआरपी के नाम पर होता है शोषण: बाजार में सर्जिकल आइटम की आप खरीदारी करते है तो दुकानदार आपको महज दस से पंद्रह प्रतिशत रियायत देकर फायदा पहुंचाने की बात करता है. जबकि उस सामग्री पर पचास से साठ प्रतिशत डिस्काउंट देकर भी दुकानदार ज्यादा मुनाफा कमा सकता है. दूसरी तरफ जिले के नर्सिंग होम में मरीजों को उनके दुकान से ही सर्जिकल आइटम खरीदने की मजबूरी रहती है. जिसमें दुकानदार मरीज से एमआरपी पर दवाई व उपकरण बेच सौ से दो सौ गुणा मुनाफा कमाता है. जिसमें कमाई का अधिकांश हिस्सा डॉक्टर व दुकानदार के बीच बांट लिया जाता है.
7 की गलब्स का वसूलते हैं 49 रुपये
अस्पताल में होनेवाले ऑपरेशन व मरीजों के इलाज में सबसे ज्यादा गलब्स व सिरिंज का उपयोग होता है. औसतन एक मरीज पर प्रतिदिन करीब छह सिरिंज व चार गलब्स का प्रयोग होता है. जानकारी लेने पर चौंकानेवाले तथ्य सामने आये. जिले में प्रत्येक वर्ष चार से पांच करोड़ रुपये का गलब्स व सिरिंज का कारोबार होता है. 3.25 रुपये की सिरिंज काे मरीज से 22 रुपये व सात रुपया की गलब्स 49 रुपये में बेची जाती है. आइवी-सेट, बीटी सेट, यूरीन बैग, एफ कैथेटेर, आइवी कैनुला, गलब्स, नेपोर प्लस(पेपर टेप) व कॉटन पर भी दौ सौ से तीन सौ गुणा मुनाफा खुदरा दुकानदार व नर्सिंग होम संचालक कमा रहे है.
एमआरपी व वास्तविक मूल्य में काफी अंतर
सर्जिकल आइटम में सिरिंज के मैक्सिमम रिटेल प्राइस (एमआरपी) व उसके वास्तविक मूल्य में काफी अंतर रहता है. निजी अस्पतालों में मरीजों से सिरिंज का एमआरपी लिया जाता है. 10 एमएल सिरिंज का अस्पताल 21 रुपये तक मूल्य वसूलता है, जबकि थोक में इसकी कीमत 3.25 रुपये है. पांच एमएल की सिरिंज में करीब 600 प्रतिशत की मार्जिन होती है. थोक में पांच एमएल की सिरिंज 1.51 रुपये में मिलती है, जबकि खुदरा में 10.50 रुपये में बिकती है. अस्पताल में इसके 14 रुपये तक लिये जाते हैं. तीन एमएल की सिरिंज थोक में 1.25 रुपये में मिलती है, लेकिन खुदरा में 7.50 रुपये में बिकती है. यानी इस पर 500 प्रतिशत की मार्जिन होती है. दो एमएल की सिरिंज थोक में 1.22 रुपये में मिलती है, जबकि खुदरा में यह 6.50 रुपये में बिकती है. वहीं अस्पताल में 9.50 रुपये लिया जाता है.
खुदरा बेचने वालों को ज्यादा मुनाफा
इसमें थोक विक्रेताओं का मुनाफा कम होता है, लेकिन खुदरा बाजार में आते ही यह आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है. जानकारों की मानें, तो इसमें तकरीबन 200 से 500 फीसदी तक का मार्जिन भी है. निजी अस्पतालों में यह मार्जिन करीब 800 प्रतिशत तक हो जाता है. थोक विक्रेताओं के बिल व नर्सिंग होम में मरीजों से लिये गये चार्ज को देख मुनाफे के इस खेल को आसानी से समझा जा सकता है.
मरीजों के जेब पर डाका
सिरिंज के कारोबार में सबसे ज्यादा लाभ निजी अस्पतालों को होता है. निजी अस्पताल कम मूल्य में सिरिंज खरीदते हैं, लेकिन मरीजों से एमआरपी पर पैसा वसूलते हैं. शहर के दो प्रतिष्ठित निजी अस्पताल के बिल की समीक्षा की गयी, तो मुनाफे का मार्जिन 500 प्रतिशत तक पाया गया. निजी अस्पताल में दो एमएल की सिरिंज 9.50 रुपये में, तीन एमएल की सिरिंज 6.50 रुपये में, पांच एमएल की सिरिंज 14 रुपये में एवं 10 एमएल की सिरिंज 22 रुपये तक में मिलती है.
सरकार बनाये नीति
थोक विक्रेता सर्जिकल आइटम पांच से दस फीसदी मुनाफा पर खुदरा विक्रेता को बेच देते है. प्रोडक्ट पर एमआरपी बहुत ज्यादा अंकित होता है. जिसका फायदा लोग उठा रहे है. एमआरपी पर सरकार का नियंत्रण है. सरकार नीति बनाकर इस अंकित मूल्य को कम कर सकती है. ड्रग एसोसिएशन पूरी मदद करेगी. जनहित से जुड़े व्यवसाय में मरीजों का शोषण नहीं होना चाहिए. सरकार व प्रशासन मामले की गंभीरता को समझे.
हरि नारायण प्रसाद यादव, सचिव, जिला ड्रग एसोसिएशन, सहरसा
आइएमए करेगा विमर्श
इस प्रकार की मुनाफाखोरी को रोकने के लिए आइएमए की पहल पर शहर के कुछ नर्सिंग होम में मरीजों को रियायत दी जाती है. लेकिन बाजार के दवाई दुकानदारों पर उनलोगों का कोई नियंत्रण नहीं है. आइएमए इस विषय पर विमर्श करेगा.
डॉ शिलेंद्र कुमार, सचिव, आइएमए सहरसा
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