मैट्रिक में फेल सहरसा की प्रियंका को हाइकोर्ट ने टॉप-10 में दिलायी जगह
Updated at : 21 Oct 2017 4:54 AM (IST)
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जिद ने दिलाया मुकाम Â खुद पर भरोसे ने दिलायी जीत, बीएसइबी की गड़बड़ी उजागर सहरसा : अपनी योग्यता पर पूरा भरोसा करनेवाली सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के गंगा प्रसाद गांव की बेटी प्रियंका ने मिसाल कायम की है. मैट्रिक परीक्षा में फेल हुई प्रियंका सिंह ने बीएसइबी को उच्च न्यायालय में खुली चुनौती देकर न […]
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जिद ने दिलाया मुकाम Â खुद पर भरोसे ने दिलायी जीत, बीएसइबी की गड़बड़ी उजागर
सहरसा : अपनी योग्यता पर पूरा भरोसा करनेवाली सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के गंगा प्रसाद गांव की बेटी प्रियंका ने मिसाल कायम की है. मैट्रिक परीक्षा में फेल हुई प्रियंका सिंह ने बीएसइबी को उच्च न्यायालय में खुली चुनौती देकर न सिर्फ प्रथम स्थान हासिल किया, बल्कि टॉप-10 में अपनी जगह भी सुनिश्चित करवायी. राजीव कुमार सिंह की पुत्री प्रियंका ने मैट्रिक की परीक्षा डीडी हाइस्कूल सरडीहा से दी थी. प्रियंका का राेल कोड 41047 और राेल नंबर 1700124 था. उसे संस्कृत में मात्र नौ अंक मिले थे. इस वजह से वह फेल हुई. वहीं साइंस में मिला अंक भी कम लग रहा था.
मैट्रिक में फेल…
रिजल्ट देखते ही प्रियंका सदमे में आ गयी. बोर्ड की रिजल्ट में वह फेल थी. प्रियंका इसे मानने को तैयार नहीं थी कि वह फेल हो सकती है. अभिभावक की फटकार के बावजूद उसे खुद पर भरोसा था. अभिभावक की रजामंदी पर प्रियंका ने स्क्रूटनी के लिए फाॅर्म भरा, लेकिन बोर्ड ने नो चेंज कह कर प्रियंका को फिर से फेल कह दिया. वह खुद को अब भी फेल मानने को तैयार नहीं थी. वह अभिभावक को भरोसे में लेकर किसी तरह उच्च न्यायालय पहुंची और न्याय की गुहार लगायी. बीएसइबी ने प्रियंका सिंह के दावे को यहां भी पहले झुठलाने का प्रयास किया. साथ ही कोर्ट और बोर्ड का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया.
प्रियंका अपने भरोसे पर अड़ी रही कि फेल हूं तो कोर्ट मेरी आंसर शीट दिखाये. हाइकोर्ट ने आंसर शीट दिखाने के लिए बोर्ड के कहे अनुसार 40 हजार रुपये जमा करने को कहा व दावा गलत निकलने पर रुपये जब्त हो जाने की बात कही. प्रियंका ने अपने परिजनों को भरोसे में लेकर इधर-उधर से पैसे की व्यवस्था कर रुपये जमा कराये. पैसे जमा होने के बाद कोर्ट ने बोर्ड को प्रियंका की संस्कृत और साइंस की आंसर शीट लेकर आने को कहा. बोर्ड कॉपी लेकर कोर्ट में पहुंची व फिर से जांचने में कोई गड़बड़ी नहीं होने की बात दोहरायी. प्रियंका ने जब कॉपी देखी तो कॉपी ही बदली हुई पायी.
प्रियंका ने चैलेंज किया व कोर्ट ने सामने में बैठ हैंडराइटिंग का नमूना देने को कहा. कोर्ट ने भी पाया कि प्रियंका की आंसर शीट और ओरिजनल हैंडराइटिंग एक नहीं है. आंसर शीट की तलाश शुरू हुई. तलाश में बोर्ड की गड़बड़ी सामने आयी. मालूम हुआ कि प्रियंका की आंसर शीट में बार कोडिंग गलत तरीके से हुई थी जिससे प्रियंका की आंसर-शीट से दूसरी छात्रा संतुष्टि कुमारी को संस्कृत और साइंस में फेल से पास कर दिया गया था. वहीं प्रियंका पास से फेल कर दी गयी थी. कोर्ट ने बोर्ड को पांच लाख रुपये का जुर्माना भरने को कहा व मैट्रिक परीक्षा 2017 की सभी आंसर शीट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया. प्रियंका की जिद ने बोर्ड की गड़बड़ी को उजागर कर दिया व अपनी प्रतिभा का परचम लहराया.
पांच लाख जुर्माना देने का भी दिया गया निर्देश
सहरसा के अपर समाहर्ता व वरीय उप समाहर्ता से स्पष्टीकरण : पटना : छात्रा के रिजल्ट में गड़बड़ी पर हाइकोर्ट की पांच लाख जुर्माने की कार्रवाई के बाद बिहार बोर्ड भी हरकत में आया है. बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने मामले की जांच को लेकर बनायी गयी टीम की रिपोर्ट के आधार पर सहरसा जिले के अपर समाहर्ता (सह चीफ सेक्रेसी पदाधिकारी) व वरीय उप समाहर्ता (उप मुख्य सेक्रेसी
सहरसा के अपर…
पदाधिकारी) से स्पष्टीकरण की मांग की है. इसके साथ ही बोर्ड के विधि पदाधिकारी तनुज वर्मा ने फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट के डबल बेंच में जाने की घोषणा की है. बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि संज्ञान में आते ही इस मामले की जांच माध्यमिक परीक्षा नियंत्रक, आइटी उप निदेशक व तीन विषय विशेषज्ञों से करायी गयी थी. जांच में पाया गया कि छात्रा की बारकोडिंग की प्रक्रिया तथा बारकोडिंग के बाद फ्लाइंग स्लिप फाड़ कर अलग करने की प्रक्रिया पूरी तरह ठीक तरीके से संपादित की गयी थी. लेकिन बारकोडिंग के बाद किसी कर्मी द्वारा प्रियंका सिंह एवं एक अन्य छात्रा की फ्लाइंग स्लिप निकाल कर उसमें छेड़छाड़ की गयी.
गौरतलब है कि सहरसा के डीडी हाइ स्कूल सगडिहा की छात्रा प्रियंका सिंह ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि पहले तो परीक्षा समिति ने जबरन उसका रिजल्ट खराब किया और फिर पुर्नमूल्यांकन में भी न्याय नहीं किया. उसे संस्कृत में नौ और विज्ञान में महज सात अंक दिये गये. अदालत की सख्ती के बाद छात्रा की मूल कॉपी अदालत में पेश की गयी तो उसे विज्ञान में 80 और संस्कृत में 61 अंक मिले. दरअसल किसी ने उसकी मूल कॉपी ही बदल दी थी.
इसके बाद हाइकोर्ट ने बिहार बोर्ड पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया.
फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील करेगा बिहार बोर्ड
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