ईरान-US वार्ता फेल, तेहरान का आया रिएक्शन, अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

Published by : Pritish Sahay Updated At : 12 Apr 2026 5:24 PM

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अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत फेल, फोटो- पीटीआई

US Iran Peace Talks Fail: तेहरान ने शांति वार्ता फेल होने का ठीकरा अमेरिका पर फोड़ा है. कहा-अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा. दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे तक वार्ता हुई, जो बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. बातचीत फेल होने के बाद पाकिस्तान ने उम्मीद जताई की दोनों देश युद्धविराम को बनाएं रखेंगे.

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US Iran Peace Talks Fail: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत फेल होने के बाद तेहरान की प्रतिक्रिया सामने आई है. न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट करते हुए कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 21 घंटे चली बातचीत के दौरान कई सकारात्मक और रचनात्मक प्रस्ताव दिए, लेकिन अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा. उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका को तय करना होगा कि वह ईरान का विश्वास हासिल कर सकता है या नहीं.

अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फेल होने के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गये हैं. ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि अमेरिका की ज्यादा और सख्त मांगों के कारण बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटने को तैयार नहीं था, इसलिए शांति समझौता नहीं हो सका. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने अपनी तरफ से आखिरी और सबसे अच्छा प्रस्ताव रखा था, लेकिन ईरान ने उसे नहीं माना. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई (Esmail Baghaei) ने कहा है कि कूटनीति कभी खत्म नहीं होती. इसका अर्थ है कि आगे भी बातचीत की संभावना बनी हुई है.

अमेरिका और ईरान की बातचीत फेल होने पर पाकिस्तान ने क्या कहा?

अमेरिका और ईरान की बातचीत फेल होने के बाद पाकिस्तान का बयान सामने आया है. पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वह दोनों देशों के बीच बातचीत में आगे भी मदद करता रहेगा. पाकिस्तान ने दोनों देशों से युद्धविराम बनाए रखने की अपील की है. मीडिया से बात करते हुए पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ईशाक डार (Ishaq Dar) ने कहा कि पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की गहन और सार्थक बातचीत में मध्यस्थता की. डार ने बताया कि कि उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ मिलकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की. इशाक डार ने उम्मीद जताई कि आगे चलकर बातचीत में प्रगति होगी. उन्होंने कहा कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए.

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ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से रवाना

वार्ता विफल होने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से रवाना हो गया है. इससे पहले ही अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद से अमेरिका के लिए निकल चुके थे. स्थानीय समयानुसार रविवार सुबह करीब 7 बजे वेंस अपनी टीम के साथ सरकारी विमान से स्वदेश रवाना हो गए थे. अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता 21 घंटे तक चली. दोनों देशों ने बातचीत के लिए आठ अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई थी. वेंस ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने से अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है. इसी कारण बातचीत नहीं सार्थक नहीं हो पाई.

इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष दोनों तरीके से हुई

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता पहले पाकिस्तान के जरिए परोक्ष रूप से हुई और बाद में दोनों देशों के बीच सीधे संवाद हुआ. इस पूरी प्रक्रिया में हर चरण पर पाकिस्तान भी मौजूद रहा. बातचीत की शुरुआत शनिवार को हुई थी, जब अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों ने अलग-अलग पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ. ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने किया, जबकि अमेरिकी टीम की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे. दोनों देशो की सीधी बातचीत करीब ढ़ाई घंटे तक चली.

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1979 के बाद पहली बार अमेरिका और ईरान में हुई सीधी बात

अमेरिका और ईरान के बीत सीधी वार्ता 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार हुई है. हालांकि आमने-सामने बातचीत होने के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका. इससे दो हफ्तों के लिए कायम युद्धविराम पर सवाल खड़े हो गए हैं. साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए अहम माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की संभावना भी अब अनिश्चित हो गई है.

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Video : बातचीत फेल होना अमेरिका के लिए बुरी खबर, देखें इस्फहान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने क्या कहा

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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