नेपाल में फिर भड़का Gen Z आंदोलन, बेरोजगारी और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा

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नेपाल में पीएम के इस्तीफे की मांग करते युवा (फोटो : X)

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नेपाल में जेन-जी एक बार फिर अपनी सत्ता के खिलाफ सड़कों पर आ गए हैं. राजधानी काठमांडू में एक राइड-शेयर चालक की आत्मदाह के बाद युवाओं का आंदोलन उग्र हो गया है. भड़के प्रदर्शनकारी पुलिस प्रताड़ना और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर पीएम बालेन शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

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Nepal Gen Z Protest : पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर 'जेन-जी' युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. यह आंदोलन केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं में बढ़ते असंतोष, पुलिसिया ज्यादती, कथित अतिक्रमण हटाने की हालिया प्रशासनिक कार्रवाई और सरकार से जवाबदेही की मांग का एक संयुक्त रूप बन चुका है. दिलचस्प बात यह है कि काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जिन्हें पिछले वर्ष इसी जेन-जी आंदोलन का बहुत बड़ा समर्थन प्राप्त हुआ था, अब वे खुद इसी युवा वर्ग के तीव्र विरोध और तीखे आक्रोश का सामना कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी युवा अब सीधे बालेन शाह से उनके पद से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि संसद के भीतर भी विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए मंत्रियों को जनता की समस्याओं का सामना करने की नसीहत दी है.

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​राइड-शेयर चालक गणेश नेपाली के आत्मदाह से बिगड़े हालात

​नेपाल में ताजा विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 25 वर्षीय राइड-शेयर चालक गणेश नेपाली की दर्दनाक मौत के बाद हुई. जानकारी के अनुसार, नगर निगम पुलिस के साथ पार्किंग विवाद होने के बाद पीड़ित गणेश ने मानसिक अवसाद में आकर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी. गंभीर रूप से झुलसने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. आरोप है कि ट्रैफिक चालान और पुलिस की कथित कार्रवाई से तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया था. इस घटना के बाद से पूरे देश के युवाओं में आक्रोश फैल गया है और मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच की मांग बेहद बुलंद हो रही है.

​झुग्गी बस्तियों को हटाने और पुलिस के बल प्रयोग का विरोध

​आंदोलन के उग्र होने का दूसरा बड़ा कारण काठमांडू में झुग्गी बस्तियों को हटाने का प्रशासनिक अभियान है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पुनर्वास की व्यवस्था किए, नदियों के किनारे रह रहे गरीब लोगों की झुग्गियां जबरन हटा दीं, जिससे हजारों गरीब परिवार बेघर हो गए हैं. इसके अलावा, सड़कों पर उतरे युवाओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, अत्यधिक बल प्रयोग और हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया है. विभिन्न युवा संगठनों के लोग दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर डटे हुए हैं.

​क्यों टूट रही है युवाओं की उम्मीदें? ​

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2025 के आंदोलन के बाद युवाओं को नई सरकार से पारदर्शिता, रोजगार और भ्रष्टाचार पर सख्ती की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन इन अपेक्षाओं पर सरकार पूरी तरह खरी नहीं उतरी. यही कारण है कि जिस जेन-जी आंदोलन ने कभी बालेन शाह को व्यवस्था परिवर्तन का प्रतीक बनाकर सत्ता तक पहुंचाया था, आज वही युवा उनके सबसे बड़े नीतिगत विरोधी बनकर सामने खड़े हैं. हालांकि सरकार ने आत्मदाह की घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे नाकाफी मानते हुए राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं.

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