POK में हालात बेकाबू : 12 की मौत के बाद 4,000 रेंजर्स तैनात, मीडिया पर भी रोक

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POK में प्रदर्शन करते लोग (Photo: X)

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. मुजफ्फराबाद मार्च से पहले कई शहरों और कस्बों को सील कर दिया गया है. मंगलवार (14 जुलाई) को हुई झड़पों में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई. इसके बाद पाकिस्तान प्रशासन ने कार्रवाई और तेज कर दी है.

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पाकिस्तान की सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को प्रतिबंधित और हथियारबंद संगठन बता रही हैं. इसके बावजूद संगठन ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है. इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

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मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 12 लोगों की मौत हो गई. इसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया है. अब मुजफ्फराबाद की ओर बड़े मार्च की तैयारी है. POK के कई शहरों को पूरी तरह सील कर दिया गया है. वहीं, BBC उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक रावलाकोट में बिना किसी आधिकारिक घोषणा के मीडिया ब्लैकआउट लागू कर दिया गया है. प्रशासन ने पत्रकारों के शहर में प्रवेश पर रोक लगा दी है, जिससे वहां की स्थिति और घटनाओं की जानकारी बाहर नहीं पहुंच पा रही है.

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने क्या किया दावा?

POK में पिछले एक महीने से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. बुधवार (15 जुलाई)  को भी इलाके में तनाव बना रहा. रिपोर्टों के मुताबिक, POK के कई शहरों और कस्बों में हजारों लोग जुट गए हैं. वहीं, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं का दावा है कि करीब 40 हजार प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने की तैयारी में हैं.

प्रदर्शन मार्च रोकने के लिए प्रशासन तैयार

यह हिंसा ऐसे समय हुई है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा सरकार विरोधी आंदोलन चल रहा है. BBC उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन मार्च रोकने के लिए प्रशासन ने कम से कम 4,000 रेंजर्स, पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स के जवान तैनात किए हैं.

ये भी पढ़ें: POK को लेकर भारत का पाकिस्तान पर वार, कहा- प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है पाक सरकार

विरोध प्रदर्शन क्यों किया जा रहा है POK में?

POK में जारी अशांति पिछले कई हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का बड़ा रूप ले चुकी है. शुरुआत में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बाहरी लोगों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों और भेदभाव के आरोपों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था. बाद में इसमें महंगाई, खराब शासन व्यवस्था और राजनीतिक अधिकारों जैसे मुद्दे भी जुड़ गए. अब यह आंदोलन सरकार विरोधी बड़े अभियान में बदल चुका है, जिसमें राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की मांग की जा रही है.


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