अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे अनिल मेनन, चांद-मंगल मिशन की तैयारियों पर करेंगे रिसर्च

अपने साथियों के साथ अनिल मेनन (फोटो : X)
भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन सफलतापूर्वक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं. वे अगले आठ महीनों तक वहां रहकर ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जिनसे भविष्य में चांद और मंगल पर मिशन को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी.
Anil Menon ISS Mission : भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इतिहास रचते हुए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कदम रख दिया है. वे रूस के अंतरिक्ष यात्रियों प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से सफलतापूर्वक स्टेशन पहुंचे. यह डॉ. मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा है. वे अगले आठ महीनों तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, उनके ये शोध न केवल भविष्य में चांद और मंगल पर जाने वाले मानव मिशन को सुरक्षित बनाएंगे, बल्कि पृथ्वी पर स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक तकनीकों के विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएंगे.
तीन घंटे में पहुंचे अंतरिक्ष स्टेशन, अप्रैल 2027 में होगी वापसी
रूसी अंतरिक्ष एजेंसी 'रोसकॉस्मोस' का सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान भारतीय समयानुसार रात 8:17 बजे कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रवाना हुआ था. महज तीन घंटे की छोटी उड़ान के बाद रात 11:52 बजे यह यान अंतरिक्ष स्टेशन के प्रचाल मॉड्यूल से सुरक्षित जुड़ गया. तकनीकी जांच पूरी होने के बाद अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद टीम ने नए यात्रियों का स्वागत किया. यह पूरा मिशन लगभग आठ महीने तक चलेगा. डॉ. अनिल मेनन की पृथ्वी पर वापसी अप्रैल 2027 में तय की गई है.
माइक्रोग्रेविटी के असर और आधुनिक तकनीक पर प्रयोग
डॉ. अनिल मेनन अंतरिक्ष स्टेशन पर शून्य गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रेविटी) का मानव शरीर पर पड़ने वाले असर को समझेंगे. वे अध्ययन करेंगे कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से इंसान के ब्लड सर्कुलेशन, नसों, हड्डियों और शरीर की कार्यप्रणाली में क्या-क्या बदलाव आते हैं. ये आंकड़े नासा के आगामी आर्टेमिस प्रोजेक्ट और मंगल मिशन के लिए बेहद जरूरी साबित होंगे. इसके अलावा, वे अंतरिक्ष में सीमित संसाधनों के बीच पीने के पानी से ही इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड तैयार करने की तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) से अल्ट्रासाउंड जांच और बायोप्रिंटिंग जैसे आधुनिक प्रयोगों का हिस्सा बनेंगे.
धरती से लेकर अंतरिक्ष तक मिलेगा लाभ
इस मिशन से मिलने वाले डेटा का फायदा सिर्फ अंतरिक्ष यात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धरती पर भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति आ सकती है. इससे उम्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज, नई दवाओं की खोज, उन्नत चिकित्सा तकनीकों और एआई पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलेगी. बता दें कि डॉ. अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में एक भारतीय और यूक्रेनी मूल के प्रवासी परिवार में हुआ था. वे पेशे से इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञ हैं, अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल हैं और नासा के फ्लाइट सर्जन भी रह चुके हैं.
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By आलोक पाठक
आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।
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