कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर साइबर अटैक: डार्क वेब पर लीक हुईं 19,000 से अधिक सिक्रेट फाइलें

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कुडनकुलम परमाणु उर्जा पावर प्लांट (फोटो : X)

कुडनकुलम परमाणु उर्जा पावर प्लांट (फोटो : X)

तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में साइबर अटैक का दावा किया जा रहा है. दावा है कि इससे जुड़े 19 हजार से अधिक बेहद संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर लीक हुए हैं. रैंसमवेयर समूह 'वर्ल्ड लीक्स' द्वारा चुराया गया यह 14.3 GB का डेटा कथित तौर पर संयंत्र के थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता 'योट्टा' के सर्वर से हैक किया गया है.

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Kudankulam Nuclear Power Plant Cyber Attack : भारत की आंतरिक और तकनीकी सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद गंभीर खबर सामने आई है. तमिलनाडु स्थित देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र 'कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट' पर एक बड़ा साइबर हमला होने का दावा किया गया है. कुख्यात रैंसमवेयर हैकर समूह 'वर्ल्ड लीक्स' ने डार्क वेब पर इस संयंत्र से जुड़े 19,000 से अधिक अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज और डेटा सार्वजनिक करने की बात कही है. शुरुआती इनपुट्स के अनुसार, यह गोपनीय डेटा सीधे संयंत्र के मुख्य सिस्टम से नहीं, बल्कि इसके एक ठेकेदार रिलायंस समूह से जुड़े थर्ड-पार्टी के डेटा सेंटर प्रदाता 'योट्टा' के सर्वर से चुराया गया है, जिसकी संबंधित कंपनी ने भी आंशिक रूप से पुष्टि की है.

सर्वर पर संदिग्ध एक्टिविटी के संकेत

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, लीक की गई फाइलों में कुडनकुलम संयंत्र के निर्माणाधीन यूनिट-3 और यूनिट-4 के बेहद महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग ब्लूप्रिंट, वेंटिलेशन व कूलिंग सिस्टम के लेआउट, संयंत्र में उपयोग होने वाले उपकरणों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट और सप्लायरों की पूरी सूची शामिल है. साइबर शोधकर्ता राकेश कृष्णन के अनुसार, कुल 14.3 जीबी का यह डेटा 11 जून से ही डार्क वेब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है. इस संदिग्ध गतिविधि की भनक लगते ही तकनीकी विशेषज्ञों ने तुरंत सरकार और संबंधित उच्च सुरक्षा एजेंसियों को पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दे दी है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं.

देश का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है कुडनकुलम

तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम देश का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण परमाणु ऊर्जा संयंत्र है. वर्तमान समय में इस प्लांट के भीतर यूनिट-3 और यूनिट-4 का बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है, जिनके आगामी वर्ष 2027 तक पूरी तरह से चालू होने की संभावना जताई गई है. सुरक्षा विश्लेषकों का दावा है कि साइबर हमले का शिकार हुई 19 हजार से अधिक फाइलें इन्हीं दोनों निर्माणाधीन यूनिट्स की आंतरिक सुरक्षा और डिजाइन आर्किटेक्चर से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण इस लीक को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. मामले की तह तक जाने के लिए सर्वर लॉग्स की बारीकी से जांच की जा रही है. ये भी पढ़ें : अमेरिका का ईरान पर 7 घंटे लगातार हमला, 37 की मौत और 260 घायल


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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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