हाईकोर्ट की फटकार के बाद विधाननगर अदालत में अभिषेक बनर्जी ने रिकॉर्ड कराया आवाज का नमूना

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कड़ी सुरक्षा के बीच विधाननगर कोर्ट परिसर में अभिषेक बनर्जी.

कड़ी सुरक्षा के बीच विधाननगर कोर्ट परिसर में अभिषेक बनर्जी.

Abhishek Banerjee Voice Sample: कथित धमकी भरे भाषण मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने विधाननगर कोर्ट में अपनी आवाज का नमूना दिया. हाईकोर्ट की फटकार और कड़े निर्देश के बाद ममता बनर्जी के भतीजे बुधवार को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुए. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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Abhishek Banerjee Voice Sample: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 प्रचार के दौरान दिये गये एक कथित धमकी भरे भाषण मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को विधाननगर अदालत में अपनी आवाज का नमूना (Voice Sample) दिया. कलकत्ता हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए वे दोपहर 12 बजे मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हुए.

2 बार की गैर-हाजिरी के बाद तीसरी बार में पेशी

जांच एजेंसी की लगातार कोशिशों और आवेदनों के बाद विधाननगर के उप-संभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (SDJM) अदालत ने अभिषेक बनर्जी को आवाज का नमूना देने के लिए पहले 2 बार अवसर दिये थे. हालांकि, उन दोनों ही मौकों पर डायमंड हार्बर के सांसद मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को आदेश दिया कि अभिषेक को हर हाल में 15 जुलाई को अदालत के समक्ष अपनी आवाज का नमूना रिकॉर्ड करवाना होगा.

सुरक्षा के इंतजाम और ‘अंडे’ से संरक्षण का निर्देश

अभिषेक बनर्जी की अदालत में पेशी को देखते हुए साल्टलेक स्थित विधाननगर अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किये गये थे. किसी भी संभावित अप्रिय घटना या विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.हाईकोर्ट ने पुलिस को सख्त निर्देश दिये थे कि जब डायमंड हार्बर के सांसद अदालत या जांच एजेंसी के समक्ष पेश हों, तो उन पर उग्र प्रदर्शनकारियों द्वारा अंडे न फेंके जायें. 30 मई को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी को जन-विरोध का सामना करना पड़ा था.

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जांच में असहयोग पर हाईकोर्ट ने जतायी थी नाराजगी

10 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल चुनाव 2026 के प्रचार के दौरान दिये गये कथित आपत्तिजनक भाषण की जांच में ‘सहयोग नहीं करने’ पर अभिषेक बनर्जी के प्रति नाराजगी व्यक्त की थी. जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने टीएमसी सांसद की उस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने निचली अदालत के आवाज का नमूना देने के आदेश को चुनौती दी थी. कोर्ट ने कहा था कि 21 मई के आदेश के तहत उन्हें 31 जुलाई तक मिली दंडात्मक कार्रवाई से राहत तभी तक प्रभावी है, जब तक वे जांच में सहयोग करेंगे.

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क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले का है. आरोप है कि 29 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा में अभिषेक बनर्जी ने अपने प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित रूप से बेहद आक्रामक और धमकी भरी टिप्पणियां की थी. इस भाषण के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करायी गयी थी. तृणमूल सांसद ने इस एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.

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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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