जिधर बसाते हैं गांव, उधर घूम जाती कोसी

Published at :23 Aug 2017 3:38 AM (IST)
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जिधर बसाते हैं गांव, उधर घूम जाती कोसी

बाढ़ का कहर. कोसी ने किया सातवीं बार विस्थापित, तीन दर्जन से अधिक परिवार विस्थापित पूर्व मुखिया सहित तीन दर्जन से अधिक परिवार के घर का कोसी ने कर दिया कटाव नवहट्टा : कोसी नदी ने केदली पंचायत के असैय चाही में पूर्व मुखिया जानकी कुमारी सहित तीन दर्जन से अधिक परिवार के घर का […]

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बाढ़ का कहर. कोसी ने किया सातवीं बार विस्थापित, तीन दर्जन से अधिक परिवार विस्थापित

पूर्व मुखिया सहित तीन दर्जन से अधिक परिवार के घर का कोसी ने कर दिया कटाव
नवहट्टा : कोसी नदी ने केदली पंचायत के असैय चाही में पूर्व मुखिया जानकी कुमारी सहित तीन दर्जन से अधिक परिवार के घर का कटाव कर सातवीं बार विस्थापित कर दिया. मुखिया सहित यह विस्थापित परिवार पूर्वी कोसी तटबंध पर अपने घर को नाव से ले जाकर रख रहे हैं. कटाव का आलम यह है कि नदी गांव के पश्चिम की दिशा से कटाव शुरू कर मकुर यादव, तशविंद यादव, मिथिलेश यादव, राजकुमार यादव, दिनेश यादव, दिलीप यादव, सुमन यादव, रमन यादव, अमेरिका देवी, पुलकित शर्मा, अर्जुन शर्मा, छोटेलाल शर्मा, शंभु शर्मा सहित अन्य के घर का कटाव सोमवार को कर दिया.
कोसी ने असैय गांव की बड़ी आबादी को िकया प्रभावित
पुनर्वास में है पानी
सरकार के द्वारा असैय चाही गांव के लिए तटबंध के अंदर नौलखा गांव के पास पुनर्वास तो आवंटन कर दिया. लेकिन उस पुनर्वास स्थल पर पानी ही पानी नजर आ रहा है. लोग परेशान हैं. लोग आखिर अपने घर के समान को कहां लेकर जायेंगे, यह मुख्य समस्या बनी हुई है.
केदली पंचायत के लोग बार बार हो रहे हैं विस्थापित
केदली पंचायत का असैय चाही को तटबंध निर्माण के बाद कोसी नदी ने अब तक पांच बार विस्थापित कर दिया है. असैय चाही निवासी 75 वर्षीय रघुनंदन यादव ने बताया कि असैय गांव 1982 के बाद अब तक पांच बार विस्थापित हुआ है. पहले असैय गांव यहां से चार किलोमीटर पश्चिम परताहा गांव की सीमा पर गांव की आबादी बसती थी. 1982 में कोसी ने असैय गांव की बड़ी आबादी को कटाव कर विस्थापित कर दिया. दूसरी बार 1996 में पुनः कोसी ने गांव का कटाव किया. यह सिलसिला चलता ही रहा. कभी बांध तो कभी कोसी के नया भराई वाली जगह पर लोग बसते रहे. वर्ष 2008 में रामपुर छतबन सीमा पर से इस जगह आकर बसे, जिसे कोसी एक बार फिर उजाड़ रही है. अब स्थिति ऐसी बन गयी कि बांध ही अब हमलोगों को आसरा दिख रहा है.
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