समाजसेवी रुपेश पाण्डेय की माता का निधन, परिवार में शोक की लहर

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Rupesh Pandey

समाजसेवी रुपेश पाण्डेय अपनी मां सरोज पाण्डेय के साथ

Rupesh Pandey: समाजसेवी रुपेश पाण्डेय की माता सरोज पांडेय का कल शाम 6 बजे निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार थीं. सरोज पाण्डेय समाजसेवा के लिए जानी जाती थीं. उनके निधन से परिवार, समर्थकों और पश्चिमी चंपारण में गहरा शोक है. रुपेश पाण्डेय ने अपनी दिवंगत मां को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया है.

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Rupesh Pandey: समाजसेवी और राजनीतिज्ञ रुपेश पाण्डेय की माता सरोज पाण्डेय का कल शाम 6 बजे निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं. सरोज पाण्डेय अपने गांव में हमेशा लोगों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं और समाजसेवा में सक्रिय भूमिका निभाती थीं. रुपेश पाण्डेय, जो ईस्टर्न हाईलैंड्स ग्रुप के संस्थापक हैं और समाजसेवा से जुड़े हुए हैं, ने अपनी माता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा- मेरी माता जी के निधन से मुझे अत्यंत दुख हुआ है. वह हमेशा मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत थीं. रुपेश पाण्डेय की माता के निधन पर उनके समर्थकों और परिचितों ने भी शोक जाहिर किया है. उनकी माता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जा रही है.

रुपेश पाण्डेय मूल रूप से बिहार के चंपारण जिले के रहने वाले है. फिलहाल वो मुंबई में उभरते बिजनेसमैन और समाजसेवी हैं. उनकी माता सरोज पाण्डेय के निधन से उनके परिवार समेत गृह जिले पश्चिमी चंपारण में शोक है. उनके पैतृक आवास पर शुभचिंतको का आना जाना लगा हुआ है. खुद रुपेश पाण्डेय भी काफी आहत हैं. उन्होंने कहा- मां के निधन के समाचार ने मुझे गहरे दुख में डाल दिया है. वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा थीं. उनका प्यार और संघर्ष हमेशा मेरे साथ रहेगा.

अंतिम संस्कार की सभी प्रक्रिया परिवार के करीबी सदस्यों की मौजूदगी में संपन्न किया जाएगा. रुपेश पाण्डेय और उनका परिवार इस कठिन समय में अपने सभी मित्रों और शुभचिंतकों से समर्थन और प्रार्थना की अपील कर रहा है.

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प्रीतीश सहाय

लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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