राज्य का चौथा ''स्मार्ट'' शहर आरा ऑनलाइन वोटिंग में जिले को मिला 162 अंक व 172वां रैंक

Published at :03 Mar 2017 5:17 AM (IST)
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राज्य का चौथा ''स्मार्ट'' शहर आरा ऑनलाइन वोटिंग में जिले को मिला 162 अंक व 172वां रैंक

स्मार्ट सिटी योजना की सफलता में अभी करनी है काफी मशक्कत आरा : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट सिटी’ योजना के तहत आरा नगर का शुमार तो हो गया है, पर अभी लक्ष्य से काफी दूर है. स्मार्ट सिटी योजना की सफलता के लिए जितने प्रावधान किये गये हैं, उसके अनुसार नगर को अभी तक […]

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स्मार्ट सिटी योजना की सफलता में अभी करनी है काफी मशक्कत

आरा : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट सिटी’ योजना के तहत आरा नगर का शुमार तो हो गया है, पर अभी लक्ष्य से काफी दूर है. स्मार्ट सिटी योजना की सफलता के लिए जितने प्रावधान किये गये हैं, उसके अनुसार नगर को अभी तक मात्र 161.20 अंक ही मिले हैं. वहीं, इसका रैंक 172 वां है. इस योजना के तहत नगर को लाभ मिलने के लिए प्रशासन सहित नगरवासियों को अभी काफी मशक्कत करनी है. स्वच्छता के मामले में नगर अभी काफी पीछे है. इस स्थिति के लिए निगम व नगरवासी दोनों जिम्मेदार हैं. हालांकि निगम द्वारा जिस स्तर पर नगर की सफाई के लिए नगरवासियों के बीच प्रचार-प्रसार करना चाहिए, उतना नहीं किया जा रहा है. वहीं, लोगों में भी इसके प्रति जागरूकता की कमी देखी जा रही है.
बिहार के कुल 10 शहर हैं योजना में शामिल : बिहारशरीफ, पटना, औरंगाबाद, आरा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, बक्सर, किशनगंज तथा छपरा सहित कुल 10 शहर इस योजना के तहत बिहार में शामिल किये गये हैं, जबकि पूरे देश में इस योजना के तहत 4041 शहर शुमार हो चुके हैं, जिन्हें स्मार्ट सिटी बनाया जाना है.
दो अक्तूबर, 14 को पीएम ने किया था शुभारंभ : दो अक्तूबर, 14 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के राजघाट पर सड़क की सफाई कर इस योजना का शुभारंभ किया था, ताकि लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा हो सके. इससे शहर साफ रहेगा व पर्यावरण की स्थिति ठीक रहेगी.
औरंगाबाद को मिला तीसरा स्थान
योजना के तहत सभी प्रक्रियाओं को ध्यान में रख कर नगर को जितने अंक मिले हैं, उसके अनुसार यह चौथे स्थान पर है. 1858.10 अंक के साथ बिहारशरीफ बिहार में पहले स्थान पर है तथा इसे 68वां रैंक प्राप्त हुआ है. वहीं, 882.40 अंक पाकर पटना दूसरे स्थान पर है तथा 99वां रैंक प्राप्त हुआ है, जबकि 230.70 अंक पाकर औरंगाबाद तीसरे स्थान पर है तथा इसे 155 रैंक प्राप्त हुआ है.
अन्य मानकों पर भी काफी पीछे है आरा नगर
स्मार्ट सिटी योजना के तहत निर्धारित किये गये उपयोगकर्ता सहभागिता, उपयोगकर्ता संतुष्टि एवं एजेंसी सक्रियता के मानकों पर आरा नगर अभी काफी पीछे है. इसके लिए लोगों को एवं निगम प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. उपयोगकर्ता सहभागिता में नगर को 156.60 ही अंक मिल पाये हैं, जबकि उपयोगकर्ता संतुष्टि में महज 0.6 अंक ही मिल पाये हैं. वहीं, एजेंसी की सक्रियता में चार अंक ही नगर जुटा पाया है.
मोबाइल व अन्य माध्यमों से ली जाती है जानकारी
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शामिल शहरों की स्थिति को जानने के लिए मानकों के बारे में केंद्र सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा संबंधित नगर के निवासियों से मोबाइल द्वारा मानकों से संबंधित प्रश्न पूछ कर उनके उत्तर के आधार पर नगरों के लिए अंक निर्धारित करती है. विगत दस दिनों से सरकार द्वारा यह सर्वें मोबाइल तथा अन्य प्रणाली से की जा रही है.
आरा-बिक्रमगंज
10 वर्षों से जर्जर हाल में सामुदायिक भवन, नहीं मिल रहा लाभ
नगर निगम चुनाव की घोषणा नजदीक आते ही चुनाव की सरगर्मी नगर में दिखने लगी है. नगरवासियों को लुभाने के लिए जगह-जगह बैनरों व होर्डिंग लगाये गये हैं और इसके माध्यम से मतदाताओं को पर्व-त्योहारों के बहाने शुभकामना संदेश दिये जा रहे हैं. इस बीच वर्तमान पार्षद व संभावित प्रत्याशियों द्वारा चुनावी हथकंडे अपनाने के लिए रणनीति बननी शुरू हो गयी है, पर वार्ड में कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जो आज भी विकास के नाम पर मुंह चिढ़ा रहे हैं.
इन्हीं समस्याओं से चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाया जाता है.
सड़क व नाले की स्थिति काफी खराब
सामुदायिक भवन पिछले एक दशक से जर्जर स्थिति में है. इसमें जाने से भी लोग कतराते हैं. वहीं, सड़क व नाले की स्थिति भी काफी खराब है. लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है. सड़क से प्रतिदिन 40 हजार लोग गुजरते हैं. वहीं, नाले के टूटे होने के कारण सड़क की स्थिति नारकीय बनी रहती है तथा उससे दुर्गंध निकलती है. इस कारण संक्रामक बीमारी की आशंका से लोग भयभीत रहते हैं.
इसका निर्माण कराने की चिंता छोड़, नेता अपनी जीत के लिए इसे मुद्दा बनाते रहते हैं.
क्या कहते हैं वार्ड वासी
नेताओं का काम केवल आश्वासन देना रह गया है. चुनाव के समय हाथ जोड़नेवाले नेता जीत के बाद हाथ जोड़वाते हैं. समस्या दूर करने की बात उन्हें याद भी नहीं रहती है.
लखी देवी, वार्डवासी
सामुदायिक भवन का हाल काफी खराब है. इससे लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है. नाले व सड़क की स्थिति भी काफी खराब है, पर कोई देखने व सुनने वाला नहीं है.
टिंकू कुमार, वार्डवासी
क्या कहते हैं िजम्मेवार
सामुदायिक भवन की मरम्मत के लिए बोर्ड से लेकर नगर विकास विभाग तक काफी प्रयास किया, पर इसमें सफलता नहीं मिल पायी. विगत पांच वर्षों में काफी काम कराया है.
चंदा देवी, वार्ड पार्षद
निगम में वार्ड के विकास के लिए योजनाएं बनती हैं और अमल भी होती है. कोष के अनुसार कार्य करने में निगम पीछे नहीं रहता है. वार्ड पार्षद की अनुशंसा पर कार्रवाई की जाती है.
प्रमद कुमार, नगर आयुक्त
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