कानफोड़ू आवाज कहीं बना न दे आपको मरीज

Published at :30 Apr 2016 7:51 AM (IST)
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कानफोड़ू आवाज कहीं बना न दे आपको मरीज

शहर में मैरेज हॉल में बजने वाले डीजे ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है़ चिकित्सक भी मान रहे हैं कि डीजे की तेज आवाज से लोगों में सुनने की क्षमता तेजी से कम हो रही है़ इधर लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर भी अधिकारियों द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जाता […]

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शहर में मैरेज हॉल में बजने वाले डीजे ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है़ चिकित्सक भी मान रहे हैं कि डीजे की तेज आवाज से लोगों में सुनने की क्षमता तेजी से कम हो रही है़ इधर लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर भी अधिकारियों द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जाता है़
डेहरी ऑन सोन : शहर के रिहायशी इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह खुले मैरेज हॉलों में बजले वाली डीजे की शोर से लोग परेशान हैं. इसका सबसे अधिक असर वृद्धों व बच्चों पर पड़ रहा है. डीजे की तेज साउंड से वृद्धों का कलेजा तक कांप जाता है.
वहीं, बच्चों की पढ़ाई भी काफी प्रभावित होती है. 10 बजे रात के बाद शोरगुल न करने के लिए सरकार द्वारा बनाये गये कानून का शहर में खुलेआम उल्लंघन होता दिखता है. शहर के रिहायशी इलाको में करीब दो दर्जन से अधिक मैरेज हाॅल हैं.
शादी-विवाह के मौसम में इनके आस-पास रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया. शहर के तारबंगला में दो, पाली रोड में 10, रामारानी मोड़ के पास एक, डेहरी बाजार में पांच, गांधी नगर में एक, स्टेशन रोड में पांच, मोहन बिगहा में चार, पानी टंकी में दो, डालमियानगर में तीन मैरेज हॉल है. इसके अलावा डालमियानगर के कुछ खाली र्क्वाटरों को भी मैरेज हॉल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
बच्चे खो रहे सुनने की क्षमता
शहर के प्रतिष्ठित आंख, कान व नाक विशेषज्ञ डाॅ अमिताभ का कहना है कि 23 डीबी से अधिक आवाज से मनुष्यके शरीर पर असर पड़ता है. आज डीजे की शोर से न जाने कितने ही लोगों ने अपनी कान से सुनने की क्षमता खो दी है.
करीब 120 डीबी से अधिक शोर मचाने वाले डीजे आज खुलेआम बजाये जा रहे हैं. इससे इनसान की सुनने की क्षमता में ह्रास के साथ-साथ बल्ड प्रेशर बढ़ने से डिप्रेशर में जाने व हर्ट के रोग से ग्रसित होनेवालों की संख्या में वद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि आज हमारे पास कई छोटे बच्चे आते हैं और यह कहते हैं कि कान से कम सुनायी देता है.
बच्चे बताते हैं कि डीजे के पास था. वहीं, आवाज कम सुनायी देने लगा, तो मुझे काफी दुख होता है. उन्होंने यह भी कहा कि ध्वनि प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित कम उम्र के बच्चे व वृद्ध हो रहे हैं. इससे, जहां बच्चों में कम सुनायी देने की बीमारी बढ़ी है. वहीं वृद्धों के हर्ट व ब्लड प्रेशर पर इस का प्रभाव देखने को मिल रहा है. उन्होंने स्थानीय प्रशासन से भी अपील किया कि हाइकोर्ट द्वारा ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के आदेश का अपने स्तर पर पालन कराना जनहित में सुनिश्चित कराये.
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