जुगाड़ टेक्नोलॉजी कर रही काम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Apr 2016 3:44 AM (IST)
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आदत. शराबबंदी के बाद भी चोरी-छिपे उठा रहे शराब का लुत्फ ऐसे तो क्षेत्र में पूरी तरह शराबबंदी लागू है. लेकिन, जुगाड़ लगा कर लोग इसका लुत्फ उठा ही रहे हैं. पंचायत चुनाव में उम्मीदवार भी चोरी-छिपे रखे बोतलों को मतदाताओं के बीच दिखा कर वोट की सौदेबाजी कर रहे हैं. कई ठिकानों पर इधर-उधर […]
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आदत. शराबबंदी के बाद भी चोरी-छिपे उठा रहे शराब का लुत्फ
ऐसे तो क्षेत्र में पूरी तरह शराबबंदी लागू है. लेकिन, जुगाड़ लगा कर लोग इसका लुत्फ उठा ही रहे हैं. पंचायत चुनाव में उम्मीदवार भी चोरी-छिपे रखे बोतलों को मतदाताओं के बीच दिखा कर वोट की सौदेबाजी कर रहे हैं. कई ठिकानों पर इधर-उधर से भी शराब पहुंच रही है.
बिक्रमगंज : शराबबंदी की घोषणा के बाद सूबे में शराब पीना व पीलाना दोनों अपराध है. शायद इसे बंद होने में कुछ महीने अभी और लगेंगे. सालों भर शराब के नशे में डूबे रहने वाले शराबी आज भी शाम ढलते ही शराब की बूंदों के साथ अपनी दिनचर्या को पूरा करते हैं. यह नजारा कोई एक गांव या एक शहर की नहीं है यह हाल अधिकतर गांवों, कस्बों व बाजारों की है. शराबियों का जबाब भी कम दिलचस्प नहीं है कि जब तक इच्छा होगी हमारी शराबबंदी नहीं होगी. चाहे कोई सरकार आ जाये. जबकि, शराब मिलने की जानकारी मिलते ही प्रशासन की कड़ी रुख से लोग भयभीत हो जा रहे हैं.
कैसे मिलती है शराब : 31 मार्च को जब शराबबंदी की आखिरी तिथि थी, उस दिन तमाम देसी विदेशी शराब दुकानों के दुकानदार किसी जुगाड़ से बोतलों को बेचने में लगे थे. इसकी वजह से शराब की सौ रुपये में बिकने वाली बियर की बोतल पहले 80 फिर 60 व फिर अंत में 40 रुपये में बिकने लगी. इसी तरह अन्य शराब की बोतले भी कुछ इसी तरह से हाथो हाथ बिक गयी. इसके घटे दाम शराबियों के लिए यह सुनहरा मौका था. जिसकी जितनी हैसियत वह उतनी बोतले खरीद कर रखने में मशगूल था. इसकी चिंता किसी भी शराबी को नहीं हुई की अगर पकड़े गये तो क्या होगा. जो जितना ले सका लेकर रख लिया. वहीं शराब की बोतले आज शराबियों की शाम रंगीन कर रही है.
चुनाव को ले किये गये भंडारण: सूबे के पंचायत चुनाव में वैसे तो अब पियकड़ों की संख्या में काफी कमी आ गयी है. फिर भी खास खास लोगों के लिए रखी शराब की बोतले रोजाना ही रातों को रंगीन कर देती है. अब तो शराब की एक घुट पर वोटों की राजनीति होने लगी है. जिसके पास जितनी शराब की पेटियां है उसके उतने ही समर्थक है. हालात यह है कि शराब की बोतले जिसने नहीं रखी है वह खरीदी दाम से कई गुना अधिक दे कर भी शराब की पेटियां रखना चाहता है. क्योंकि बोतलों में बंद शराब की एक-एक बूंद कई वोट बना सकती है. वरना खराब भी कर सकती है. एक प्रत्याशी ने, तो कहा कि काश मैं उस दिन खरीद कर रख सकता तो मेरी जीत पक्की हो जाती.
नशे के आदी किसी-न-किसी तरह पूरी कर रहे इच्छा
किसी ने शराब रखी हो, तो दें सूचना
शराब पीना व पिलाना दोनों जुर्म है. इसके उल्लंघन करने वाले निश्चित ही दंड के भागी होंगे. किसी ने अगर शराब की खेप जमा की है तो इसकी जानकारी मिलते ही उस पर कानूनी कार्रवाई होगी चाहे वह कितना भी पॉवरफूल क्यों न हो. एसडीओ राजेश कुमार के इस ऐलान को सार्थक करने में लगे अनुमंडल के सभी थाने चौकस और मुस्तैद हैं. पर, इतनी मुस्तैदी के बावजूद पंचायत चुनाव में उतरे प्रत्याशियों के पास काफी मात्रा में शराब की पेटियां रखी पड़ी है और पुलिस को इसकी जानकारी भी नहीं है. इसका मतलब की जान कर भी पुलिस मौन साधे खड़ी है और खुलेआम कानून की धज्जी उड़ाई जा रही है.
पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
शराब पीने वाले किसी तरह जुगाड़ कर ही लेते है. पंचायत चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए शराब गुप्त ठिकाने पर रखी गयी है. यह कोई एक प्रत्याशी की बात नहीं है कमो बेस अधिकतर प्रत्याशियों ने जमा कर रखी है. सवाल यह उठता है की आखिर पुलिस को उस ठिकाने की भनक कैसे नहीं लगती है. जबकि रोजाना ही कई बोतले उसी ठिकाने से निकल जाती है. क्या जान कर भी अनजान है पुलिस या उसके बदले में अपनी कमाई कर रही है. लोग तो इसके लिए सीधे तौर पर पुलिस की भूमिका को ही संदेहास्पद मानते हैं.
बहाल हुआ अमन-चैन
सूबे में शराबबंदी की घोषणा के साथ ही खुलेआम शराब पीते लोगों की संख्या एक दम ही कम हो गयी है. अगर कोई किसी माध्यम से पीता भी है, तो वह छिप छिपा कर ही पीता है. चाहे वह वोट के नाम पर मिली शराब हो या खुद की खरीदी हुई हो. शराबबंदी के बाद शायद ही कोई हो जो खुलेआम शराब पी रहा हो. बिक्रमगंज निवासी पंडित बैद्य बिनोद शर्मा कहते हैं की मुख्यमंत्री को धन्यवाद जिनके एक फैसले ने अमन चैन बहाल कर दिया. अब तो कोई दीखता ही नहीं जो शराब की नशे में चूर हो किसी की परवाह किये बगैर बक-बक किये जा रहा हो. अगर वह चोरी छिपे पीता भी होगा तो कोई बात नहीं खुलेआम तो नहीं पीता है. धीरे-धीरे वह भी बंद हो जायेगा. आखिर कितना दिन चोरी की रखी शराब साथ देगी.
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